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New Delhi नई दिल्ली : भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के बीच “विशेष” संबंध हैं और इन संबंधों को आगे बढ़ाने तथा उनकी पूरी क्षमता का उपयोग करने का यह एक महत्वपूर्ण अवसर है। दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई।
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-नेपाल संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की। इसमें विकास सहयोग, कनेक्टिविटी, व्यापार और पारगमन, ऊर्जा क्षेत्र और लोगों के बीच संबंध जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल रहे। दोनों पक्षों ने इन क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने और संबंधों को “नई ऊंचाइयों” पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई।
बैठक के दौरान यह भी चर्चा हुई कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है। दोनों नेताओं ने माना कि सहयोग के नए क्षेत्रों को विकसित कर द्विपक्षीय साझेदारी को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
इससे पहले नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनल ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल से भी मुलाकात की। इस बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
शिशिर खनल ने शुक्रवार को नई दिल्ली का तीन दिवसीय दौरा शुरू किया था, जिसका उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना बताया गया है। हालांकि यह दौरा उस समय हुआ जब नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की सीमा विवाद से जुड़ी हालिया टिप्पणियों के बाद दोनों देशों के बीच कुछ कूटनीतिक चर्चाओं को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है।
इसके बावजूद दोनों देशों ने संवाद और कूटनीति के जरिए मतभेदों को सुलझाने पर जोर दिया है। भारत ने हमेशा नेपाल के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दी है और दोनों देशों के बीच सहयोग को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
बैठक में दोनों नेताओं ने यह भी स्वीकार किया कि भारत-नेपाल संबंध केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह लोगों के बीच गहरे सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों पर आधारित हैं। इसी कारण इन संबंधों को और मजबूत करने के लिए निरंतर संवाद और सहयोग आवश्यक है।
कुल मिलाकर, इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों ने आपसी सहयोग बढ़ाने, रिश्तों को नई दिशा देने और मौजूदा मतभेदों को बातचीत के माध्यम से हल करने पर जोर दिया है, जिससे भारत-नेपाल संबंधों में आगे और मजबूती आने की उम्मीद जताई जा रही है।





