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IIT दिल्ली ने बनाया देश का पहला स्वदेशी माइक्रो GPU

Ratna Netam
24 Sept 2026 9:34 PM IST
IIT दिल्ली ने बनाया देश का पहला स्वदेशी माइक्रो GPU
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नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और आधुनिक कंप्यूटिंग के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारतीय शोधकर्ताओं ने ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट यानी GPU तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने एक स्वदेशी माइक्रो-GPU डिजाइन किया है, जो काम करने की स्थिति में है और प्रदर्शन के लिए तैयार है।शोधकर्ताओं के मुताबिक, उनकी जानकारी में यह भारत में किसी विश्वविद्यालय द्वारा डिजाइन किया गया पहला काम करने वाला और डेमो के लिए तैयार स्वदेशी माइक्रो-GPU है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वर्तमान में देश में इस्तेमाल होने वाले GPU के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी तकनीक और आयात पर निर्भरता है।
आधुनिक तकनीक में बढ़ रही GPU की भूमिका
GPU को शुरुआत में मुख्य रूप से कंप्यूटर ग्राफिक्स को तेजी से प्रोसेस करने के लिए विकसित किया गया था। समय के साथ इसकी समानांतर प्रोसेसिंग क्षमता के कारण इसका इस्तेमाल कई दूसरे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ा है।आज GPU का उपयोग गेमिंग और ग्राफिक्स के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा प्रोसेसिंग, वैज्ञानिक गणना, रोबोटिक्स और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है।खासकर AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और बड़ी मात्रा में डेटा पर गणना करने के लिए GPU महत्वपूर्ण हार्डवेयर बन चुका है। यही कारण है कि दुनियाभर में GPU और उससे जुड़ी सेमीकंडक्टर तकनीक की मांग लगातार बढ़ रही है।
IIT दिल्ली के शोधकर्ताओं ने तैयार किया डिजाइन
IIT दिल्ली के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की टीम ने माइक्रो-GPU को स्वदेशी स्तर पर डिजाइन किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह केवल सैद्धांतिक डिजाइन नहीं है, बल्कि काम करने वाला सिस्टम है, जिसका प्रदर्शन किया जा सकता है।टीम ने कहा, “हमारी जानकारी के मुताबिक, भारत में किसी यूनिवर्सिटी की तरफ से डिजाइन किया गया यह पहला काम करने वाला और डेमो के लिए तैयार स्वदेशी माइक्रो-GPU है।”किसी विश्वविद्यालय स्तर पर GPU आर्किटेक्चर को डिजाइन करना हार्डवेयर अनुसंधान और सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। GPU डिजाइन में कंप्यूटिंग आर्किटेक्चर, मेमोरी प्रबंधन और समानांतर गणनाओं से जुड़े कई तकनीकी पहलुओं पर काम करना पड़ता है।
विदेशी GPU पर निर्भरता बड़ी चुनौती
भारत में कंप्यूटर, सर्वर, डेटा सेंटर और AI से जुड़े सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले GPU के लिए फिलहाल विदेशी कंपनियों और वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भरता है।GPU जैसे उच्च क्षमता वाले प्रोसेसर तैयार करने के लिए केवल डिजाइन ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधाओं, डिजाइन टूल और तकनीकी विशेषज्ञता की भी जरूरत होती है।ऐसे में IIT दिल्ली की ओर से विकसित माइक्रो-GPU डिजाइन घरेलू स्तर पर इस तकनीक को समझने और आगे विकसित करने की दिशा में एक शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।हालांकि किसी प्रायोगिक माइक्रो-GPU से बड़े पैमाने पर व्यावसायिक GPU उत्पादन तक पहुंचने के लिए कई चरणों में अनुसंधान, परीक्षण, निर्माण और उद्योग सहयोग की आवश्यकता होती है।
AI और मशीन लर्निंग में हो सकता है उपयोग
AI और मशीन लर्निंग के बढ़ते इस्तेमाल ने GPU की मांग को तेजी से बढ़ाया है। AI सिस्टम को बड़ी संख्या में गणनाएं एक साथ करनी पड़ती हैं। GPU की समानांतर प्रोसेसिंग क्षमता ऐसी गणनाओं के लिए उपयोगी होती है।माइक्रो-GPU जैसी तकनीक शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को GPU आर्किटेक्चर को बेहतर ढंग से समझने, नए प्रयोग करने और भविष्य में खास जरूरतों के अनुसार प्रोसेसर विकसित करने का आधार दे सकती है।यह तकनीक एज कंप्यूटिंग, एम्बेडेड सिस्टम, रोबोटिक्स और सीमित कंप्यूटिंग क्षमता वाले उपकरणों से जुड़े शोध में भी संभावनाएं पैदा कर सकती है। हालांकि वास्तविक उपयोग इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे इसके हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सिस्टम को किस तरह विकसित किया जाता है।
स्वदेशी चिप डिजाइन के लिए महत्वपूर्ण
भारत पिछले कुछ वर्षों से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में घरेलू क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसमें चिप डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग और परीक्षण तक अलग-अलग क्षेत्रों में क्षमता विकसित करने के प्रयास शामिल हैं।GPU तकनीक इस पूरे इकोसिस्टम का एक जटिल हिस्सा है। दुनिया में कुछ ही कंपनियों के पास अत्याधुनिक GPU डिजाइन और उत्पादन की व्यापक क्षमता है।इस लिहाज से भारतीय शिक्षण संस्थानों में GPU डिजाइन से संबंधित शोध भविष्य में देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करने में भी मदद कर सकता है।
छात्रों को मिलेगा व्यावहारिक अनुभव
IIT दिल्ली का माइक्रो-GPU केवल तकनीकी उपलब्धि ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक दृष्टि से भी उपयोगी हो सकता है। कंप्यूटर आर्किटेक्चर और चिप डिजाइन की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को ऐसे प्रोजेक्ट के जरिए वास्तविक हार्डवेयर डिजाइन को समझने का अवसर मिलता है।अब तक GPU तकनीक का बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों द्वारा विकसित बंद या व्यावसायिक प्रणालियों पर आधारित रहा है। स्वदेशी अकादमिक डिजाइन से भारतीय शोधकर्ताओं को इसके अलग-अलग हिस्सों पर प्रयोग करने और अपनी जरूरत के अनुसार बदलाव करने की संभावना मिल सकती है।इससे भविष्य में विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर उद्योग के बीच सहयोग के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।
अभी लंबा है व्यावसायिक उत्पादन का सफर
IIT दिल्ली की उपलब्धि को सीधे विदेशी कंपनियों के हाई-एंड GPU के विकल्प के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। माइक्रो-GPU का उद्देश्य और क्षमता बड़े डेटा सेंटर या अत्याधुनिक AI मॉडल चलाने वाले व्यावसायिक GPU से अलग हो सकती है।किसी GPU को बड़े पैमाने पर बाजार में उतारने के लिए डिजाइन के बाद चिप निर्माण, परीक्षण, ड्राइवर और सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम तैयार करने जैसे कई चरण पूरे करने पड़ते हैं।इसके बावजूद एक काम करने वाले स्वदेशी माइक्रो-GPU का विकास भारत में इस क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान के लिए आधार तैयार कर सकता है।
स्वदेशी तकनीक की दिशा में नई शुरुआत
दुनियाभर में AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कंप्यूटिंग हार्डवेयर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। GPU की मांग बढ़ने के साथ देशों के लिए घरेलू सेमीकंडक्टर और प्रोसेसर डिजाइन क्षमता विकसित करना भी महत्वपूर्ण हो गया है।IIT दिल्ली के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किया गया माइक्रो-GPU इसी दिशा में भारतीय अकादमिक क्षेत्र की एक पहल है। यह तकनीक तत्काल विदेशी GPU की जगह नहीं लेती, लेकिन देश में GPU आर्किटेक्चर से जुड़ी विशेषज्ञता, अनुसंधान और भविष्य के स्वदेशी हार्डवेयर विकास के लिए रास्ता तैयार कर सकती है।आगे इस माइक्रो-GPU की क्षमता, उपयोग और बड़े स्तर पर विकसित किए जाने की संभावनाओं पर शोध जारी रहने की उम्मीद है। अगर अकादमिक शोध के साथ उद्योग और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का सहयोग बढ़ता है, तो इस तरह के स्वदेशी डिजाइन भविष्य में भारत की कंप्यूटिंग और AI हार्डवेयर क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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