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दिल्ली-एनसीआर
आई-पैक के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की अंतरिम जमानत याचिका खारिज
SHIDDHANT
28 April 2026 8:46 PM IST

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Delhi दिल्ली: पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को कथित कोयला चोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आई-पैक के को-फाउंडर और डायरेक्टर विनेश चंदेल को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
विनेश चंदेल ने अपनी मां की गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने उनकी अर्जी को अस्वीकार कर दिया। इस मामले में अब विनेश चंदेल की नियमित जमानत याचिका पर बुधवार को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई होनी है, जिस पर हर किसी की नजरें टिकी हैं।
इससे पहले, 23 अप्रैल को अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने यह आदेश जारी किया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद कोर्ट ने चंदेल को 7 मई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्देश दिया था। इससे पहले 14 अप्रैल को दिल्ली की एक अदालत ने चंदेल को 10 दिन की ईडी हिरासत में भेजा था। उन्हें देर रात अदालत में पेश किया गया था और सुनवाई देर रात तक चली थी।
बता दें कि ईडी ने चंदेल को 28 मार्च को दर्ज ईसीआईआर के मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला आर्थिक अपराध शाखा की एफआईआर पर आधारित है, जिसमें एम/एस इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, खातों में गड़बड़ी और गैर-हिसाबी धन के इस्तेमाल के आरोप हैं।
ईडी ने अपनी रिमांड अर्जी में कहा था कि कंपनी के संस्थापक निदेशक चंदेल कथित अपराध से जुड़े धन के लेनदेन में सक्रिय रूप से शामिल थे और अवैध धन के पैदा करने, छिपाने और उसे वैध बनाने की प्रक्रिया में उनकी मुख्य भूमिका थी। एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने पैसे लेने के लिए बैंक और नकद दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया। कुछ भुगतान '50 प्रतिशत चेक' के साथ किए जाने के भी संकेत मिले हैं, जिससे पता चलता है कि रकम को अलग-अलग हिस्सों में लिया गया।
ईडी का दावा है कि इन पैसे का इस्तेमाल चुनाव से जुड़े खर्च और अन्य कामों में किया गया, जिसमें लोगों की सोच को प्रभावित करना भी शामिल है। एजेंसी ने यह भी कहा कि कंपनी के खातों में 13.50 करोड़ रुपए बिना किसी ठोस समझौते के 'बिना ब्याज के कर्ज' के रूप में दिखाए गए, जो कथित तौर पर एम/एस रामासेतु इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड से लिए गए थे।
ईडी ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने फर्जी बिल बनाकर पैसे के लेनदेन को सही दिखाने की कोशिश की, जबकि असल में कोई सेवा नहीं दी गई। साथ ही, हवाला के जरिए भी गैर-हिसाबी पैसे का लेनदेन किया गया। एजेंसी का यह भी आरोप है कि चंदेल ने जांच के दौरान गलत बयान दिए और अन्य निदेशकों के साथ मिलकर छापेमारी के बाद ईमेल और वित्तीय डेटा हटाने के निर्देश दिए, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।
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