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New Delhi नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस लाठीचार्ज और हिरासत में कथित मारपीट के मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृह सचिव को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की यह कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर की गई है, जिसे डॉ. अंबेडकर जन कल्याण समिति, भोपाल की ओर से आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। शिकायत में मेरठ में पुलिस कार्रवाई के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
शिकायत पर विचार करने के बाद NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा था। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने बिना किसी उकसावे के प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में कई लोगों को गंभीर चोटें आईं।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि घटना से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिनमें कथित तौर पर पुलिस अधिकारी हिरासत में लिए गए लोगों के साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए लोग निहत्थे थे और उनके साथ पुलिसकर्मियों ने सख्ती बरती।
डॉ. अंबेडकर जन कल्याण समिति ने NHRC से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो की सत्यता की जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाए।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को गंभीर मानते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस और गृह विभाग से जवाब मांगा है। आयोग की ओर से जारी नोटिस में अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
मामले में अब उत्तर प्रदेश पुलिस और गृह विभाग की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा। यदि जांच में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
इस घटनाक्रम के बाद मेरठ पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वहीं पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। NHRC की दखल के बाद अब इस मामले की जांच और कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।





