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कैसे बदला मिशन का प्लान ऑपरेशन सिंदूर में भोलारी एयरबेस पर हमले की कहानी

Ratna Netam
25 Aug 2026 9:03 PM IST
कैसे बदला मिशन का प्लान ऑपरेशन सिंदूर में भोलारी एयरबेस पर हमले की कहानी
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नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अब कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं। इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना (IAF) ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इसी कड़ी में पाकिस्तान के **भोलारी एयरबेस** पर हुए हमले को लेकर पूर्व सैन्य अधिकारियों ने बताया कि कैसे आखिरी समय में रणनीति में बदलाव किया गया और एक बेहद अहम लक्ष्य को निशाना बनाया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने लंबी दूरी के हथियारों और सटीक हमले की रणनीति अपनाई। भोलारी एयरबेस पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में शामिल है, जहां निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से जुड़े विमान तैनात रहते हैं।
आखिरी वक्त में बदली गई रणनीति
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए बताया कि सैन्य अभियानों में परिस्थितियों के हिसाब से फैसले बदलने पड़ते हैं।
बताया गया कि शुरुआत में हमले की योजना किसी और लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई थी, लेकिन ऑपरेशन के दौरान मिले इनपुट और बदलती स्थिति को देखते हुए रणनीति में बदलाव किया गया।
सैन्य अभियानों में खुफिया जानकारी, दुश्मन की गतिविधियां और समय की अहम भूमिका होती है। यही वजह है कि कमांडर मौके की स्थिति के अनुसार अंतिम फैसला लेते हैं।
भोलारी एयरबेस क्यों बना बड़ा लक्ष्य?
पाकिस्तान का भोलारी एयरबेस सिंध प्रांत में स्थित एक महत्वपूर्ण एयरबेस है। यह पाकिस्तान वायुसेना की रणनीतिक क्षमता से जुड़ा हुआ है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यहां किए गए हमले में एयरबेस के एक हैंगर को नुकसान पहुंचा था। स्वतंत्र सैटेलाइट विश्लेषणों में भी भोलारी एयरबेस पर नुकसान के संकेत मिलने की बात सामने आई थी।
इस एयरबेस की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यहां निगरानी और कम्युनिकेशन से जुड़े विमान संचालित किए जाते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में क्या थी रणनीति?
ऑपरेशन सिंदूर भारत की ओर से पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू की गई सैन्य कार्रवाई थी। इसमें भारतीय सेनाओं ने आतंकवादी ढांचे और उससे जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही थी।
इसके बाद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिशों के जवाब में भारत ने कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
भारतीय वायुसेना ने इस दौरान सटीक हथियारों, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और निगरानी तकनीक का इस्तेमाल किया।
लक्ष्य बदलने में खुफिया जानकारी की भूमिका
किसी भी सैन्य अभियान में खुफिया जानकारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। दुश्मन की तैनाती, हथियारों की स्थिति और संभावित खतरे की जानकारी के आधार पर लक्ष्य तय किए जाते हैं।
अगर ऑपरेशन के दौरान कोई ज्यादा महत्वपूर्ण लक्ष्य सामने आता है तो कमांड स्तर पर बदलाव किया जा सकता है।
भोलारी एयरबेस को लेकर भी यही बताया जा रहा है कि वहां मौजूद रणनीतिक महत्व को देखते हुए कार्रवाई की दिशा बदली गई।
पाकिस्तान के लिए क्यों था बड़ा झटका?
भोलारी जैसे एयरबेस किसी भी देश की वायु क्षमता के लिए बेहद अहम होते हैं। यहां मौजूद विमान, तकनीकी सिस्टम और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ऐसे ठिकानों को नुकसान पहुंचने से किसी देश की ऑपरेशनल क्षमता प्रभावित हो सकती है।
आधुनिक युद्ध में बदल रही रणनीति
आज के दौर में युद्ध केवल जमीन पर सैनिकों की लड़ाई तक सीमित नहीं है। सैटेलाइट निगरानी, ड्रोन, लंबी दूरी की मिसाइलें और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम युद्ध की दिशा बदल रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में भी भारत ने तकनीक और सटीक हमले की रणनीति पर जोर दिया।
पूर्व CDS ने क्या बताया?
पूर्व CDS के अनुसार, ऑपरेशन जैसे अभियानों में योजनाएं पहले से तैयार होती हैं, लेकिन अंतिम फैसला परिस्थितियों के आधार पर लिया जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि सैन्य नेतृत्व को हर समय कई विकल्प तैयार रखने पड़ते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत बदलाव किया जा सके।
भारत की सैन्य क्षमता का प्रदर्शन
ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय रक्षा व्यवस्था की क्षमता और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
इस अभियान में भारतीय सेनाओं ने सीमित समय में लक्ष्य हासिल करने और रणनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश की।
आगे की नजर
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कई पहलू धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। हालांकि सैन्य अभियानों की पूरी जानकारी अक्सर सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं की जाती।
लेकिन भोलारी एयरबेस पर हुई कार्रवाई ने यह जरूर दिखाया कि आधुनिक युद्ध में सही समय पर लिया गया रणनीतिक फैसला कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।
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