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दिल्ली में बनेंगे 10 हजार छात्रों के हॉस्टल

Kavita2
15 Sept 2026 4:21 PM IST
दिल्ली में बनेंगे 10 हजार छात्रों के हॉस्टल
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नई दिल्ली। राजधानी में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे विद्यार्थियों की आवास संबंधी समस्याओं को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बड़े स्तर पर छात्रावास बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि दिल्ली में 10 हजार विद्यार्थियों की क्षमता वाले छात्रावास बनाए जाएंगे। इनमें छात्र और छात्रा दोनों के रहने की व्यवस्था होगी। दिल्ली के किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थी इन छात्रावासों की सुविधा के लिए आवेदन कर सकेंगे। सरकार ने योजना के लिए स्थानों की पहचान और नीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार का उद्देश्य उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित, किफायती और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराना है। छात्रावास बनने से विद्यार्थियों को निजी पीजी, किराये के कमरे और दूसरी महंगी आवासीय व्यवस्थाओं पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से दूसरे राज्यों और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को इस योजना से राहत मिल सकती है।

दिल्ली देश में उच्च शिक्षा के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। यहां विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी आते हैं। इनमें से अनेक विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों के छात्रावासों में जगह नहीं मिल पाती। ऐसे में उन्हें कॉलेज या विश्वविद्यालय के आसपास निजी कमरा, फ्लैट या पीजी तलाशना पड़ता है। किराया अधिक होने और सुरक्षित स्थान मिलने में कठिनाई के कारण विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि छात्रावास निर्माण की योजना को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों के साथ बैठकें की जा चुकी हैं। छात्रावासों के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान भी की गई है। फिलहाल योजना से संबंधित नीति का मसौदा तैयार किया जा रहा है। हालांकि छात्रावास किन-किन स्थानों पर बनेंगे, निर्माण कब शुरू होगा और परियोजना कब तक पूरी होगी, इसकी विस्तृत समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

प्रस्तावित छात्रावास किसी एक शिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं होंगे। सरकार की घोषणा के अनुसार, दिल्ली के किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज में दाखिला लेकर पढ़ाई करने वाले पात्र विद्यार्थी इनमें रहने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे उन विद्यार्थियों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है, जिनके शिक्षण संस्थान में अपना छात्रावास नहीं है या जहां उपलब्ध सीटों की संख्या सीमित है।

सरकार छात्र और छात्राओं के लिए छात्रावास की व्यवस्था तैयार करेगी। छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परिसर में आवश्यक प्रबंध किए जाने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाना चाहती है, जहां अभिभावक अपने बच्चों को निश्चिंत होकर रहने के लिए भेज सकें। हालांकि सुरक्षा नियमों, वार्डन, प्रवेश प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था का विस्तृत विवरण नीति का मसौदा अंतिम होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

योजना में विद्यार्थियों के भोजन और दैनिक जरूरतों का भी ध्यान रखने की बात कही गई है। सरकार का प्रयास है कि छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को भोजन और आवास की चिंता से मुक्त रखा जाए, ताकि वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें। छात्रावासों में उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं, भोजन शुल्क और अन्य खर्चों के संबंध में अभी विस्तृत घोषणा नहीं हुई है।

किफायती किराया इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। निजी पीजी और किराये के कमरों का खर्च कई परिवारों के बजट पर भारी पड़ता है। किराये के अतिरिक्त विद्यार्थियों को भोजन, बिजली, पानी और दूसरी सुविधाओं पर भी रकम खर्च करनी पड़ती है। सरकारी छात्रावास उपलब्ध होने से विद्यार्थियों के रहने का खर्च कम हो सकता है। छात्रावास का शुल्क कितना होगा, इसका निर्धारण नीति तैयार होने के बाद किया जाएगा।

छात्रावासों की स्थान संबंधी योजना भी विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण होगी। यदि छात्रावास शिक्षण संस्थानों या सार्वजनिक परिवहन के पास बनाए जाते हैं तो विद्यार्थियों का समय और यात्रा खर्च दोनों बच सकता है। सरकार ने उपयुक्त स्थानों की पहचान करने की जानकारी दी है, लेकिन इन स्थानों की सूची अभी सामने नहीं आई है। जमीन की उपलब्धता, परिवहन सुविधा और शिक्षण संस्थानों से दूरी जैसे पहलुओं को योजना बनाते समय ध्यान में रखा जाना आवश्यक होगा।

10 हजार विद्यार्थियों के लिए छात्रावास बनाना एक बड़ी आधारभूत परियोजना होगी। इसके लिए भूमि, निर्माण लागत, संचालन व्यवस्था, सुरक्षा, भोजन और रखरखाव से संबंधित जिम्मेदारियां निर्धारित करनी होंगी। यह भी तय किया जाना बाकी है कि छात्रावासों का संचालन सरकार सीधे करेगी या किसी अन्य एजेंसी को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी।

छात्रावासों में प्रवेश की पात्रता और सीट आवंटन की प्रक्रिया भी नीति का प्रमुख हिस्सा होगी। दिल्ली में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए उपलब्ध 10 हजार सीटों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आने की संभावना है। ऐसे में पारदर्शी व्यवस्था बनाना जरूरी होगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों, दूरदराज से आने वालों और अन्य पात्र वर्गों के लिए प्राथमिकता निर्धारित की जाएगी या नहीं, इस बारे में अभी आधिकारिक विवरण नहीं दिया गया है।

योजना की घोषणा से उन विद्यार्थियों में उम्मीद बढ़ी है, जो सुरक्षित और कम खर्च वाला आवास तलाशते हैं। इसके लागू होने से निजी आवासीय सुविधाओं पर दबाव कम करने में भी सहायता मिल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक लाभ निर्माण पूरा होने, शुल्क तय होने और पारदर्शी आवंटन व्यवस्था लागू होने के बाद ही सामने आएगा।

फिलहाल संबंधित विभाग नीति का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में हैं। छात्रावासों के स्थान, बजट, निर्माण एजेंसी, समयसीमा, सुविधाओं और प्रवेश नियमों पर विस्तृत जानकारी आना बाकी है। सरकार की घोषणा यदि तय योजना के अनुसार लागू होती है तो दिल्ली में पढ़ने वाले 10 हजार छात्र-छात्राओं को सुरक्षित, किफायती और व्यवस्थित आवास का नया विकल्प मिल सकेगा।

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