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CJP प्रदर्शन की जांच शुरू करेगी हाई पावर कमेटी, सुप्रीम कोर्ट ने तय किए अहम बिंदु

Kavita2
16 Sept 2026 10:15 AM IST
CJP प्रदर्शन की जांच शुरू करेगी हाई पावर कमेटी, सुप्रीम कोर्ट ने तय किए अहम बिंदु
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नई दिल्ली। जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़े आरोपों की जांच अब पांच सदस्यीय हाई पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को जांच शुरू करने के लिए प्राथमिक बिंदु तय कर दिए हैं। इनमें प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के कथित इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा और उत्पीड़न के आरोप, पुलिसकर्मियों को लगी चोटें, दोनों पक्षों की ओर से कथित हिंसा और सार्वजनिक तथा निजी संपत्ति को हुए नुकसान की जांच प्रमुख रूप से शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि HPEC शुरुआती चरण में घटनाओं से जुड़े तथ्य जुटाने और जिम्मेदारी तय करने से संबंधित पहलुओं पर ध्यान देगी। वहीं प्रदर्शनों से पैदा हुए व्यापक संवैधानिक और कानूनी सवालों पर फैसला खुद सुप्रीम कोर्ट करेगा। इससे कमेटी की जांच का दायरा और शीर्ष अदालत के सामने विचाराधीन कानूनी मुद्दे अलग-अलग रहेंगे।

पांच सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में पांच सदस्यीय स्वतंत्र जांच समिति गठित की थी। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। कमेटी को 20 जुलाई को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की भूमिका से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की जिम्मेदारी दी गई है।

मामले की सुनवाई के दौरान कमेटी के पुनर्गठन की मांग भी उठी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि समिति स्वतंत्र रूप से काम करेगी और उसकी प्रक्रिया न्यायिक निगरानी में रहेगी।

पैलेट गन का इस्तेमाल जांच का प्रमुख मुद्दा

कमेटी के सामने सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में पैलेट गन के कथित इस्तेमाल की जांच शामिल है। 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च के दौरान हुई कार्रवाई के बाद कम से कम तीन लोगों के पैलेट से घायल होने के मामले सामने आए थे। इसके बाद CRPF ने भी घटनाक्रम और रैपिड एक्शन फोर्स की भूमिका को लेकर आंतरिक जांच शुरू की थी।

दिल्ली पुलिस ने उस समय अपने कर्मियों द्वारा पैलेट गन इस्तेमाल करने से इनकार किया था। हालांकि सफदरजंग अस्पताल में इलाज कराने वाले एक घायल की मेडिकल रिपोर्ट में पैलेट से जुड़ी चोटों का उल्लेख सामने आया था। प्रदर्शन स्थल पर CRPF की रैपिड एक्शन फोर्स भी तैनात थी।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को प्रदर्शन के दौरान तैनात RAF कर्मियों के गोला-बारूद से जुड़े लॉग सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। अदालत ने CCTV, ड्रोन और बॉडी कैमरा फुटेज समेत दूसरे रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखने को कहा था, ताकि जांच के लिए जरूरी साक्ष्य उपलब्ध रहें।

महिला प्रदर्शनकारियों से कथित दुर्व्यवहार की जांच

HPEC को महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित लक्षित हिंसा, दुर्व्यवहार और उत्पीड़न से जुड़े आरोपों की भी जांच करनी है। अदालत के सामने प्रदर्शन में शामिल महिलाओं और लड़कियों से कथित दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने CJP प्रदर्शन से जुड़ी एक नाबालिग लड़की को कथित रूप से धमकाए जाने और परेशान किए जाने के मामले पर भी चिंता जताई थी। अदालत ने अधिकारियों से उसकी और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था।

कमेटी उपलब्ध वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड, शिकायतों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य सामग्री के आधार पर आरोपों की जांच कर सकती है।

पुलिसकर्मियों को लगी चोटों की भी होगी जांच

जांच केवल प्रदर्शनकारियों के आरोपों तक सीमित नहीं रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों को लगी चोटों को भी प्राथमिक जांच बिंदुओं में शामिल किया है। जुलाई में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से करीब 250 पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात कही गई थी।

इससे साफ है कि जांच में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों दोनों की भूमिका की पड़ताल होगी। कमेटी यह भी देखेगी कि हिंसा कैसे शुरू हुई, किन परिस्थितियों में बल प्रयोग हुआ और अलग-अलग घटनाओं में किस स्तर पर क्या कार्रवाई की गई।

संपत्ति के नुकसान की भी होगी पड़ताल

प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को हुए कथित नुकसान की भी जांच होगी। HPEC यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि हिंसा या तोड़फोड़ की घटनाएं कहां और किन परिस्थितियों में हुईं तथा उनके लिए कौन जिम्मेदार था।

20 जुलाई को CJP के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र संसद की ओर मार्च कर रहे थे। यह आंदोलन NEET पेपर लीक के आरोपों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांगों को लेकर किया गया था। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच टकराव हुआ था।

व्यापक कानूनी सवालों पर सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला

इस मामले में कई बड़े कानूनी और संवैधानिक सवाल भी उठे हैं। इनमें भीड़ नियंत्रण के दौरान पैलेट गन जैसे हथियारों के इस्तेमाल की सीमा, पुलिस निगरानी, निषेधाज्ञा और विरोध प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े प्रश्न शामिल हैं। अदालत ने संकेत दिया है कि ऐसे व्यापक संवैधानिक मुद्दों पर HPEC के बजाय सुप्रीम कोर्ट स्वयं विचार करेगा।

पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका भी अदालत के सामने है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि मौजूदा नियम असाधारण परिस्थितियों में इनके इस्तेमाल की अनुमति देते हैं और उन नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दिए बिना सीधे पूर्ण प्रतिबंध के सवाल पर विचार करना अलग कानूनी मुद्दा है।

अब पांच सदस्यीय HPEC की जांच पर नजर रहेगी। कमेटी के सामने पुलिस कार्रवाई के साथ प्रदर्शनकारियों की भूमिका, महिलाओं से कथित दुर्व्यवहार, पैलेट से लगी चोटों, पुलिसकर्मियों के घायल होने और संपत्ति के नुकसान जैसे कई पहलुओं की जांच करने की जिम्मेदारी है। कमेटी की जांच से सामने आने वाले तथ्य आगे सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

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