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सीवर कर्मचारियों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Kavita2
4 Sept 2026 5:15 PM IST

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) में संविदा के आधार पर काम कर रहे सीवर कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी का दर्जा देने की मांग से जुड़ी जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड का पक्ष मांगा है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया और छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने की।

यह जनहित याचिका दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच की ओर से दायर की गई है। याचिका में दिल्ली जल बोर्ड में लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे सीवर कर्मचारियों की स्थिति का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता संगठन का कहना है कि दिल्ली में हजारों कर्मचारी सीवर और सीवेज से जुड़े जोखिमपूर्ण काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारियों को मिलने वाली नौकरी की सुरक्षा और अन्य कानूनी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।

हजारों कर्मचारी संविदा पर कार्यरत होने का दावा

याचिका में कहा गया है कि दिल्ली जल बोर्ड में बड़ी संख्या में सीवर कर्मचारी ठेके या संविदा व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं। इनमें से कई कर्मचारी लंबे समय से एक ही तरह के काम में लगे हुए हैं। इसके बावजूद उनकी नियुक्ति संविदा के आधार पर होने के कारण उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान रोजगार सुरक्षा हासिल नहीं है।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, इन कर्मचारियों का संबंध समाज के सबसे पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से है। सीवर की सफाई और सीवेज से जुड़े काम स्वभाव से ही जोखिमपूर्ण होते हैं। ऐसे काम करने वाले कर्मचारियों को न केवल शारीरिक खतरे का सामना करना पड़ता है, बल्कि नौकरी की अनिश्चितता भी बनी रहती है।

याचिका में अदालत का ध्यान इस बात की ओर भी दिलाया गया है कि संविदा कर्मचारियों की सेवाएं ऐसी व्यवस्था के तहत ली जाती हैं, जिसमें उन्हें नौकरी की स्थायी सुरक्षा हासिल नहीं होती। याचिकाकर्ता ने इसे कर्मचारियों के अधिकारों और सामाजिक न्याय से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।

नियमित कर्मचारियों जैसी सुरक्षा की मांग

जनहित याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली जल बोर्ड में लंबे समय से कार्यरत संविदा सीवर कर्मचारियों को नियमित किया जाए और उन्हें स्थायी कर्मचारियों के अनुरूप रोजगार सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि जो कर्मचारी वर्षों से विभाग के लिए लगातार काम कर रहे हैं, उन्हें केवल संविदा व्यवस्था के नाम पर अनिश्चित स्थिति में नहीं रखा जाना चाहिए।

याचिका में यह भी कहा गया है कि सीवर कर्मचारियों का काम सामान्य कार्यालयी या नियमित श्रम से अलग है। सीवर और सीवेज लाइनों में काम करने के दौरान कर्मचारियों को जहरीली गैसों, संक्रमण, दुर्घटना और अन्य स्वास्थ्य संबंधी खतरों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में उनके लिए मजबूत सामाजिक और रोजगार सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।

अदालत ने अधिकारियों से मांगा जवाब

हाईकोर्ट की पीठ ने याचिका में उठाए गए मुद्दों पर फिलहाल कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए उनका जवाब मांगा है। अधिकारियों को छह सप्ताह का समय दिया गया है।

अब अगली सुनवाई में सरकार और दिल्ली जल बोर्ड की ओर से यह स्पष्ट किया जाएगा कि संविदा पर कार्यरत सीवर कर्मचारियों की संख्या कितनी है, उनकी नियुक्ति किस व्यवस्था के तहत की गई है और उन्हें नियमित करने को लेकर सरकार की क्या नीति है।

अदालत के समक्ष यह भी महत्वपूर्ण सवाल हो सकता है कि लंबे समय से एक ही प्रकार का स्थायी काम कर रहे संविदा कर्मचारियों को किस आधार पर नियमित किया जा सकता है और मौजूदा सेवा नियम इस संबंध में क्या प्रावधान करते हैं।

जोखिम भरे काम के बीच नौकरी की असुरक्षा

सीवर कर्मचारियों की स्थिति लंबे समय से श्रमिक अधिकारों और सामाजिक न्याय से जुड़े विमर्श का हिस्सा रही है। सीवर की सफाई को देश के सबसे जोखिमपूर्ण कार्यों में माना जाता है। ऐसे काम में सुरक्षा उपकरणों, प्रशिक्षण और उचित सुरक्षा मानकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

याचिकाकर्ता संगठन का कहना है कि जब कोई कर्मचारी वर्षों तक विभाग की आवश्यक सेवाओं का हिस्सा बना रहता है, तो उसके रोजगार की स्थिति को लेकर भी सरकार और संबंधित संस्थान की जिम्मेदारी बनती है। संगठन ने अदालत से हस्तक्षेप की मांग करते हुए संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है।

फैसले का हजारों कर्मचारियों पर पड़ सकता है असर

दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद इस मामले पर सीवर कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों की नजरें टिक गई हैं। यदि अदालत इस मामले में याचिकाकर्ता की मांग के पक्ष में कोई महत्वपूर्ण निर्देश देती है, तो उसका असर दिल्ली जल बोर्ड में काम कर रहे बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारियों पर पड़ सकता है।

हालांकि, फिलहाल अदालत ने केवल संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के संबंध में अदालत ने कोई आदेश दे दिया है। अगली सुनवाई में सरकार और दिल्ली जल बोर्ड का जवाब सामने आने के बाद मामले की दिशा अधिक स्पष्ट होगी।

इस मामले ने एक बार फिर संविदा व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण और श्रम अधिकारों का सवाल सामने ला दिया है। खासतौर पर सीवर जैसे अत्यधिक जोखिम वाले कार्यों में लगे कर्मचारियों के लिए रोजगार सुरक्षा और सुरक्षित कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराना इस बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छह सप्ताह के भीतर अधिकारियों के जवाब दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट इस जनहित याचिका पर आगे सुनवाई करेगा।

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