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फर्जी भाषण और अश्लील डीपफेक पर रोक, कंगना के पक्ष में हाई कोर्ट का आदेश

nidhi
12 Oct 2026 11:58 AM IST
फर्जी भाषण और अश्लील डीपफेक पर रोक, कंगना के पक्ष में हाई कोर्ट का आदेश
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नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत के व्यक्तित्व अधिकारों की अंतरिम सुरक्षा करते हुए उनके नाम, तस्वीर, आवाज और दूसरी व्यक्तिगत पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाई है। न्यायमूर्ति विकास महाजन ने मेटा प्लेटफॉर्म्स को कंगना की ओर से चिह्नित आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश दिया। आदेश में एआई से बनाए गए डीपफेक, बदले हुए वीडियो, मनगढ़ंत भाषण और झूठे विज्ञापन समर्थन जैसी सामग्री भी शामिल है।

कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को भी संबंधित वेबसाइटों तक पहुंच रोकने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा है। इसके लिए भी 72 घंटे की समयसीमा बताई गई है।
एआई से बनाए गए डीपफेक और फर्जी भाषण भी आदेश के दायरे में
कंगना रनौत ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों पर उनकी तस्वीरों, वीडियो तथा पहचान का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। याचिका के अनुसार, कुछ सामग्री में उनकी तस्वीरों को आपत्तिजनक परिस्थितियों में दिखाया गया, जबकि दूसरी पोस्ट में ऐसे बयान और विचार उनके नाम से जोड़े गए, जिन्हें उन्होंने कभी व्यक्त नहीं किया था। अदालत ने कहा कि एआई से तैयार या बदली गई ऐसी सामग्री दर्शकों को भ्रमित कर सकती है। खासकर जब किसी व्यक्ति की तस्वीर और वर्तमान पद का इस्तेमाल करके फर्जी बयान फैलाए जाते हैं, तो इससे गलत सूचना फैलने का खतरा बढ़ जाता है। कोर्ट का अंतरिम आदेश ऐसी सामग्री के निर्माण, प्रकाशन, प्रसार, होस्टिंग और अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाता है। इसमें फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, पेज, प्रोफाइल और वेबसाइट बनाकर कंगना से जुड़ाव या उनकी ओर से समर्थन का झूठा दावा करना भी शामिल है।
कंगना ने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा की मांग की थी
कंगना रनौत ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने व्यक्तित्व और प्रचार संबंधी अधिकारों की रक्षा की मांग की थी। उनका कहना था कि ऑनलाइन प्रसारित हो रही कुछ सामग्री उनकी प्रतिष्ठा और गरिमा को नुकसान पहुंचा सकती है। इसमें कथित तौर पर अश्लील सामग्री, फर्जी खबरें और एआई से तैयार किए गए भ्रामक वीडियो शामिल थे। व्यक्तित्व अधिकार किसी व्यक्ति को अपनी पहचान, नाम, तस्वीर, आवाज और अन्य विशिष्ट विशेषताओं के व्यावसायिक इस्तेमाल को नियंत्रित करने तथा अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ कानूनी संरक्षण मांगने का अधिकार देते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एआई तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के कारण इन अधिकारों से जुड़े मामले अदालतों में लगातार सामने आ रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी पर जोर
इस मामले में मेटा को चिह्नित सामग्री हटाने और संबंधित सरकारी विभागों को वेबसाइटों तक पहुंच रोकने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। आदेश का उद्देश्य केवल पहले से मौजूद सामग्री को हटाना नहीं, बल्कि कंगना की पहचान का इस्तेमाल करके भ्रामक सामग्री तैयार करने और प्रसारित करने पर भी रोक लगाना है। इस आदेश को कंगना से संबंधित हर तरह की आलोचना या व्यंग्य पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं समझना चाहिए। सुनवाई के शुरुआती चरण में उनकी ओर से यह स्पष्ट किया गया था कि फिलहाल राहत की मांग अश्लील और कथित रूप से फर्जी सामग्री के खिलाफ है, न कि सामान्य मीम या व्यंग्यात्मक पोस्ट के खिलाफ।
डिजिटल पहचान की सुरक्षा के लिहाज से अहम आदेश
यह मामला एआई के जरिए तस्वीरों, आवाज और वीडियो में बदलाव करके किसी व्यक्ति की झूठी छवि प्रस्तुत करने से जुड़े जोखिमों को सामने लाता है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि बिना अंतरिम राहत के कंगना की प्रतिष्ठा और व्यक्तित्व को नुकसान पहुंचने की आशंका वास्तविक हो सकती है और उसकी भरपाई केवल पैसों से करना पर्याप्त नहीं होगा। फिलहाल हाई कोर्ट का आदेश अंतरिम है। मेटा और दूसरे संबंधित पक्षों के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया तथा आदेश के अनुपालन से जुड़े पहलू मामले की अगली कार्रवाई में महत्वपूर्ण रहेंगे।

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