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किशोरियों की HPV वैक्सीन को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई

Saba Naaz
22 July 2026 7:24 PM IST
किशोरियों की HPV वैक्सीन को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई
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नई दिल्ली। किशोरियों को दी जाने वाली एचपीवी वैक्सीन (गार्डसिल) को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) से जवाब मांगा है। अदालत में दाखिल एक जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिना पर्याप्त अध्ययन और विस्तृत सुरक्षा मूल्यांकन के इस वैक्सीन को देशभर में लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र और आईसीएमआर को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह एक महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि इसका सीधा संबंध देश की बड़ी संख्या में किशोरियों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। अदालत ने कहा कि वैक्सीनेशन एक अच्छी स्वास्थ्य योजना है, लेकिन अगर किसी योजना के संभावित दुष्प्रभाव सामने आते हैं तो पूरी सावधानी के साथ निर्णय लेना जरूरी है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।

दरअसल, याचिका में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन गार्डसिल को यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) के तहत किशोर लड़कियों को दिए जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वैक्सीन को लागू करने से पहले पर्याप्त डेटा, सुरक्षा अध्ययन और लंबे समय तक इसके प्रभावों की जांच जरूरी है।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल नहीं उठाया, लेकिन कहा कि यह मुद्दा लाखों लड़कियों से जुड़ा हुआ है, इसलिए किसी भी कदम को बेहद सावधानी और वैज्ञानिक आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। अदालत ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से भी इस मामले में जवाब मांगा है।

एचपीवी दुनिया में सबसे आम यौन संचारित संक्रमणों में से एक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाई रिस्क वाले एचपीवी वायरस से सर्वाइकल कैंसर, एनल कैंसर और गले के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इसी वजह से कई देशों में एचपीवी वैक्सीनेशन को कैंसर से बचाव के उपाय के तौर पर अपनाया गया है।

जनहित याचिका गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सुजाता मित्तल और फिटनेस इन्फ्लुएंसर जितेंद्र चौकसे की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्कूलों में किशोरियों को वैक्सीन देने के लिए अभियान चलाया जा रहा है और स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि कई जगह कम उम्र की लड़कियों पर वैक्सीन लेने के लिए दबाव बनाया जा सकता है।

याचिका में तमिलनाडु की एक 14 वर्षीय लड़की का उदाहरण भी दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि मार्च 2026 में वैक्सीन लगने के कुछ दिनों बाद लड़की को गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का सामना करना पड़ा। इनमें शरीर में कमजोरी, आवाज प्रभावित होना और देखने में परेशानी जैसी शिकायतों का जिक्र किया गया है। इसके अलावा ग्वालियर और बिहार के कुछ मामलों का भी उल्लेख करते हुए वैक्सीन सुरक्षा निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं।

याचिका में कहा गया है कि बिना पूरी जानकारी और उचित सहमति के किसी भी वैक्सीनेशन कार्यक्रम को लागू करना व्यक्ति की शारीरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। याचिकाकर्ताओं ने एचपीवी वैक्सीन कार्यक्रम की न्यायिक जांच की मांग भी की है।

वहीं, याचिका में यह दावा भी किया गया है कि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में वैक्सीन के लंबे समय तक प्रभाव को लेकर और अधिक अध्ययन की जरूरत है। याचिकाकर्ताओं ने नियमित स्क्रीनिंग को भी कैंसर से बचाव का अहम तरीका बताया है।

अब हाई कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार और आईसीएमआर को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा। आने वाली सुनवाई में सरकार की ओर से वैक्सीन की सुरक्षा, प्रभावशीलता और वैज्ञानिक आधार से जुड़े आंकड़े पेश किए जाने की संभावना है।

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