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राजोआना की फांसी पर 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

Ratna Netam
7 Oct 2026 9:32 PM IST
राजोआना की फांसी पर 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आदेश दिया कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में दोषी बलवंत सिंह राजोआना की याचिका पर 28 अक्टूबर को सुनवाई की जाए। राजोआना ने अपनी मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने निर्देश दिया कि इस मामले को 28 अक्टूबर की सुनवाई सूची में सबसे ऊपर रखा जाए। अदालत का यह आदेश राजोआना के वकील की उस मांग के बाद आया, जिसमें मामले की सुनवाई बार-बार टलने का मुद्दा उठाया गया था।सुनवाई के दौरान राजोआना की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि याचिका लंबे समय से लंबित है और इस पर कई बार सुनवाई स्थगित हो चुकी है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि मामले को जल्द और प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए।
पीठ ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए कहा कि 28 अक्टूबर को मामले को प्राथमिकता दी जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इसे उस दिन सुनवाई के लिए सबसे ऊपर सूचीबद्ध किया जाए, ताकि मामले पर विस्तार से विचार किया जा सके।बलवंत सिंह राजोआना पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए बम विस्फोट में बेअंत सिंह की मौत हो गई थी। इस घटना में कई अन्य लोगों की भी जान गई थी।
इस मामले की जांच और मुकदमे के बाद राजोआना को दोषी ठहराया गया और उसे मौत की सजा सुनाई गई। बाद में उसकी ओर से सजा को लेकर विभिन्न स्तरों पर कानूनी प्रक्रिया चली। अब राजोआना की प्रमुख मांग यह है कि उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदला जाए।राजोआना की याचिका में उसकी लंबी अवधि की कैद और दया याचिका से संबंधित प्रक्रिया में हुई देरी जैसे पहलुओं का उल्लेख किया गया है। उसका कहना है कि इतने लंबे समय तक मौत की सजा के साथ जेल में रहने को ध्यान में रखते हुए उसकी सजा को उम्रकैद में बदला जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के सामने अब यह प्रश्न है कि राजोआना की सजा में बदलाव के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद हैं या नहीं। 28 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अदालत इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलें सुन सकती है।राजोआना के वकील ने बुधवार को खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि मामला बार-बार स्थगित होने से अंतिम निर्णय में देरी हो रही है। इसी वजह से उन्होंने इसे जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की।पीठ ने इस दलील का संज्ञान लिया और मामले को अगली तय तारीख पर प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। इससे संकेत मिलता है कि सुप्रीम कोर्ट अब इस लंबित मुद्दे पर सुनवाई आगे बढ़ाना चाहता है।
बेअंत सिंह हत्याकांड पंजाब के राजनीतिक इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक रहा है। उस समय पंजाब लंबे समय तक उग्रवाद और हिंसा के दौर से निकल रहा था। बेअंत सिंह को राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया से जुड़े प्रमुख राजनीतिक नेताओं में गिना जाता था।1995 में उनकी हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच हुई और कई आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला। राजोआना को मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद मौत की सजा दी गई थी।
राजोआना की सजा से जुड़ा मुद्दा पिछले कई वर्षों से कानूनी और राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है। अलग-अलग समय पर उसकी दया याचिका, सजा में बदलाव और जेल में बिताई अवधि को लेकर सवाल उठते रहे हैं।मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने से जुड़े मामलों में अदालतें आमतौर पर कई पहलुओं पर विचार करती हैं। इनमें दया याचिका के निपटारे में देरी, दोषी की जेल में बिताई अवधि, मामले की परिस्थितियां और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन शामिल हो सकता है।
हालांकि, किसी भी मामले में सजा को बदलने का फैसला तथ्यों और कानून के आधार पर अलग-अलग परिस्थितियों को देखते हुए किया जाता है। इसलिए राजोआना की याचिका पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की विस्तृत सुनवाई के बाद ही होगा।बुधवार की सुनवाई में अदालत ने फिलहाल सजा के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की। उसने केवल अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए मामले को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
राजोआना की ओर से यह भी तर्क दिया जा सकता है कि वह लंबे समय से जेल में है और उसकी सजा पर अंतिम निर्णय में असाधारण देरी हुई है। दूसरी ओर राज्य और केंद्र सरकार की ओर से हत्या की गंभीरता और मामले से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं को अदालत के सामने रखा जा सकता है।28 अक्टूबर की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि लंबे समय से लंबित इस याचिका पर अब विस्तृत बहस होने की उम्मीद है। अदालत यह तय कर सकती है कि मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग पर आगे क्या आदेश दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट रूप से इसे सुनवाई सूची में शीर्ष पर रखने का निर्देश दिया है। इससे राजोआना के वकील की जल्द सुनवाई की मांग को तत्काल राहत मिली है।फिलहाल बलवंत सिंह राजोआना की मौत की सजा बरकरार है। 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट उसकी उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें उसने सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की है।अब सभी की नजर इस सुनवाई पर रहेगी, क्योंकि अदालत का फैसला न केवल राजोआना के मामले में महत्वपूर्ण होगा, बल्कि लंबे समय से लंबित दया याचिकाओं और मौत की सजा से जुड़े कानूनी सवालों के संदर्भ में भी अहम माना जाएगा।
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