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नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया और राहुल गांधी से जुड़ी ईडी की याचिका पर सुनवाई टली

Kavita2
11 Sept 2026 3:50 PM IST
नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया और राहुल गांधी से जुड़ी ईडी की याचिका पर सुनवाई टली
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नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी है। यह याचिका कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य लोगों के खिलाफ ईडी की अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार करने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई है। जस्टिस मनोज जैन की एकल पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए नौ अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है।

ईडी ने राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश द्वारा 16 दिसंबर 2025 को पारित आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। उस आदेश में विशेष अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत एजेंसी की अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। अब हाई कोर्ट को यह तय करना है कि निचली अदालत का आदेश कानूनी रूप से उचित था या ईडी की शिकायत पर आगे विचार किया जाना चाहिए।

शुक्रवार को मामला जस्टिस मनोज जैन की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और पक्षों की स्थिति को देखते हुए सुनवाई आगे बढ़ा दी। अगली तारीख पर ईडी की ओर से निचली अदालत के आदेश के विरुद्ध विस्तृत दलीलें रखे जाने की संभावना है। दूसरी ओर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य संबंधित पक्ष भी एजेंसी की याचिका का विरोध करते हुए अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।

ईडी की चुनौती का केंद्र 16 दिसंबर 2025 का वही आदेश है, जिसमें विशेष अदालत ने एजेंसी की अभियोजन शिकायत को आगे बढ़ाने से इनकार किया था। अभियोजन शिकायत मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में आरोपपत्र के समान न्यायिक दस्तावेज होती है। इसमें जांच एजेंसी अदालत के सामने एकत्र किए गए साक्ष्य और संबंधित व्यक्तियों की कथित भूमिका का विवरण प्रस्तुत करती है। अदालत इसके अध्ययन के बाद तय करती है कि शिकायत पर संज्ञान लेकर आगे की कार्यवाही शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं।

संज्ञान लेने से इनकार किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाई कोर्ट ने आरोपों की सत्यता या संबंधित लोगों के दोषी अथवा निर्दोष होने पर कोई फैसला दिया है। फिलहाल विवाद प्रक्रियात्मक और कानूनी स्तर पर है। ईडी निचली अदालत के निर्णय को चुनौती दे रही है और हाई कोर्ट को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस पर फैसला करना है।

नेशनल हेराल्ड मामला लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बना हुआ है। ईडी की जांच एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड और यंग इंडियन से संबंधित वित्तीय लेन-देन से जुड़ी है। एजेंसी की ओर से इन लेन-देन को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए गए हैं। वहीं कांग्रेस और संबंधित नेताओं ने आरोपों को खारिज करते हुए मामले को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया है।

कांग्रेस का लगातार कहना रहा है कि नेशनल हेराल्ड से जुड़े लेन-देन में किसी प्रकार की व्यक्तिगत संपत्ति अथवा आर्थिक लाभ हासिल नहीं किया गया। पार्टी ने ईडी की कार्रवाई को विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का प्रयास बताया है। दूसरी तरफ जांच एजेंसी का दावा है कि उसकी कार्यवाही उपलब्ध दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और कानून के प्रावधानों पर आधारित है। इन परस्पर दावों की न्यायिक समीक्षा अदालत में होनी है।

ईडी की ओर से दाखिल याचिका में विशेष अदालत के आदेश को रद्द करने और अभियोजन शिकायत पर कानून के अनुसार दोबारा विचार करने की मांग किए जाने की बात सामने आई है। एजेंसी को हाई कोर्ट में यह बताना होगा कि निचली अदालत के निष्कर्ष में क्या कानूनी कमी रही और उसकी शिकायत पर संज्ञान लेने के लिए कौन से आधार मौजूद हैं।

वहीं बचाव पक्ष यह दलील दे सकता है कि विशेष अदालत ने उपलब्ध सामग्री और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद ही आदेश पारित किया था। मामले से जुड़े पक्षों को हाई कोर्ट में ईडी के तर्कों का जवाब देने और अपने कानूनी आधार प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। अदालत की आगामी सुनवाई में इसी प्रक्रियात्मक विवाद पर मुख्य रूप से बहस होने की संभावना है।

इस स्तर पर हाई कोर्ट के सामने यह प्रश्न नहीं है कि मामले में नामित लोग दोषी हैं या नहीं। अदालत फिलहाल निचली अदालत द्वारा ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार किए जाने के आदेश की वैधता की जांच कर रही है। अगर हाई कोर्ट ईडी की याचिका स्वीकार करता है तो विशेष अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करते हुए आगे की कार्यवाही के निर्देश दिए जा सकते हैं। यदि याचिका खारिज होती है तो निचली अदालत का आदेश बरकरार रह सकता है।

नौ अक्टूबर की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस दौरान अदालत मामले की मेरिट पर पक्षों की दलीलें सुन सकती है। हालांकि सुनवाई की वास्तविक दिशा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड और वकीलों की दलीलों पर निर्भर करेगी। अगली तारीख पर मामले में नोटिस, जवाब दाखिल करने की समयसीमा या अंतरिम निर्देशों से संबंधित पहलुओं पर भी विचार हो सकता है।

इस मामले का राजनीतिक महत्व भी काफी अधिक है क्योंकि इसमें कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के नाम जुड़े हुए हैं। जब भी नेशनल हेराल्ड प्रकरण में कोई न्यायिक या जांच संबंधी गतिविधि होती है, कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो जाते हैं। कांग्रेस इसे केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग से जोड़ती है, जबकि भाजपा नेताओं की ओर से कानून को अपना काम करने देने की बात कही जाती रही है।

कानूनी रूप से किसी व्यक्ति के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं होता। आपराधिक न्याय प्रक्रिया में आरोपों को अदालत के सामने साक्ष्यों के आधार पर साबित करना आवश्यक होता है। संबंधित पक्षों को अपना बचाव प्रस्तुत करने और आदेशों को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का अधिकार भी प्राप्त है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अदालत ने केवल सुनवाई स्थगित करते हुए नई तारीख तय की है। इस कारण 16 दिसंबर 2025 के विशेष अदालत के आदेश की स्थिति पर अंतिम कानूनी फैसला अभी बाकी है। सभी की निगाहें अब नौ अक्टूबर की सुनवाई पर रहेंगी, जब ईडी और संबंधित पक्ष अपनी दलीलें अदालत के सामने रख सकते हैं।

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