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New Delhi नई दिल्ली : हरियाणा और राजस्थान ने सोमवार को 1994 के ऊपरी यमुना नदी बोर्ड (UYRB) समझौते को लागू करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुआ, जिससे लंबे समय से लंबित जल बंटवारे के मुद्दे पर एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके तहत राजस्थान को मानसून के दौरान हथिनी कुंड बैराज से पानी उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा।
इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी मौजूद रहे। सभी नेताओं की उपस्थिति में इस समझौते को औपचारिक रूप दिया गया, जिसे दोनों राज्यों के बीच जल संसाधन सहयोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, ऊपरी यमुना नदी बोर्ड समझौते पर वर्ष 1994 में हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन पिछले 32 वर्षों से इसे पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका था। इसका प्रमुख कारण राजस्थान तक पानी पहुंचाने के लिए आवश्यक नहर प्रणाली का अभाव बताया जा रहा है, जिससे समझौते का लाभ राज्य को नहीं मिल पा रहा था।
अब नए एमओयू के माध्यम से इस बाधा को दूर करने का प्रयास किया गया है, ताकि मानसून के दौरान उपलब्ध अतिरिक्त जल का उचित वितरण सुनिश्चित किया जा सके। इससे राजस्थान के जल संकट प्रभावित क्षेत्रों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और दोनों राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल कृषि क्षेत्र को लाभ मिलेगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में पेयजल की उपलब्धता भी बेहतर हो सकेगी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि जल संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है और राज्यों के बीच सहयोग से ही देश में जल संकट की चुनौती का समाधान संभव है।
राजस्थान सरकार ने भी इस समझौते को राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है और उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में इस योजना के क्रियान्वयन से किसानों और आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।
हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया कि जल प्रबंधन को लेकर पारदर्शी और तकनीकी आधार पर आगे बढ़ने की आवश्यकता है, जिससे सभी पक्षों को उचित लाभ मिल सके।
इस समझौते के साथ ही लंबे समय से अटके जल बंटवारे के मुद्दे पर नई शुरुआत मानी जा रही है। अब निगरानी और क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि समझौते का वास्तविक लाभ जमीन पर दिखाई दे।





