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दूषित पानी की घटना पर हरीश रावत का हमला, हर घर नल योजना में भ्रष्टाचार का आरोप
SHIDDHANT
1 Jan 2026 10:01 PM IST

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Delhi दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से करीब 1400 लोगों के प्रभावित होने की घटना को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे प्रशासनिक विफलता और भ्रष्टाचार का परिणाम बताया है। दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान हरीश रावत ने कहा कि इंदौर जैसे शहर में, जिसे देशभर में स्वच्छता के उच्च मानकों के लिए जाना जाता है, अगर पानी दूषित निकलता है तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।
हरीश रावत ने कहा, “1400 लोग दूषित पानी पीने से प्रभावित हुए हैं, यह कोई साधारण बात नहीं है। इंदौर को देश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिना जाता है। अगर वहां लोगों को पीने के लिए साफ पानी भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, तो यह साफ तौर पर प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्वच्छता में नंबर वन कहे जाने वाले शहर का यह हाल है, तो प्रदेश के अन्य इलाकों की स्थिति क्या होगी। कांग्रेस नेता ने इस घटना को मध्य प्रदेश सरकार की ‘हर घर नल योजना’ से जोड़ते हुए कहा कि यह योजना भ्रष्टाचार का शिकार हो गई है। उनका आरोप है कि कागजों में तो योजना सफल दिखाई जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा, “हर घर नल योजना का मकसद लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन इंदौर की घटना यह बताती है कि योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। सरकार लोगों को साफ पानी देने में पूरी तरह फेल साबित हुई है।”
हरीश रावत ने यह भी कहा कि दूषित पानी से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही प्रभावित लोगों को उचित इलाज और मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ जल हर नागरिक का मूल अधिकार है और सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराए। अगर सरकार इस बुनियादी जरूरत को भी पूरा नहीं कर पा रही है, तो उसे आत्ममंथन करना चाहिए। हरीश रावत ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश सरकार केवल योजनाओं के उद्घाटन और प्रचार में व्यस्त है, जबकि उनकी गुणवत्ता और निगरानी पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
इंदौर में दूषित पानी की घटना के बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने और प्रभावित लोगों के इलाज की बात कही जा रही है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह केवल तात्कालिक कदम हैं। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को आगे भी उठाएगी और सरकार से जवाब मांगेगी। कुल मिलाकर, इंदौर की यह घटना न सिर्फ मध्य प्रदेश सरकार की जल आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि ‘हर घर नल योजना’ की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करती है। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या प्रभावित लोगों को न्याय मिल पाता है या नहीं।
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