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राज्यसभा सूची से बाहर हरदीप पुरी और बीएल वर्मा, नई भूमिका को लेकर अटकलें तेज

Kavita2
6 Oct 2026 10:02 AM IST
राज्यसभा सूची से बाहर हरदीप पुरी और बीएल वर्मा, नई भूमिका को लेकर अटकलें तेज
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश से होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया। सूची में कई नए और संगठन से जुड़े चेहरों को मौका दिया गया है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा दो केंद्रीय मंत्रियों हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाए जाने की हो रही है। दोनों का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। पार्टी ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि आगे उनकी भूमिका क्या होगी।

भाजपा की ओर से घोषित आठ उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। पार्टी ने इस सूची में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है। इसमें दो महिला उम्मीदवारों के साथ OBC, अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग के नेताओं को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश से रिटायर हो रहे अपने सभी मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को दोबारा मौका नहीं दिया। इनमें केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा भी शामिल हैं। दोनों केंद्र सरकार में मंत्री हैं, इसलिए टिकट न मिलने के बाद उनकी आगे की राजनीतिक भूमिका को लेकर स्वाभाविक रूप से चर्चा तेज हो गई है।

हरदीप सिंह पुरी वर्तमान में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हैं। वहीं बीएल वर्मा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण के साथ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। दोनों की राज्यसभा सदस्यता नवंबर के आखिरी सप्ताह में समाप्त होने वाली है। ऐसे में संवैधानिक रूप से मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें छह महीने के भीतर संसद के किसी सदन का सदस्य होना जरूरी होगा, यदि उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वे मंत्रिपरिषद में बने रहते हैं।

यही वजह है कि दोनों नेताओं को टिकट न मिलने के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल की अटकलों को बल मिला है। कुछ राजनीतिक रिपोर्टों में इसे मोदी सरकार के संभावित मिड-टर्म रिवैम्प से जोड़कर देखा गया है। हालांकि भाजपा या केंद्र सरकार की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल इसे केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा की नई सूची यह संकेत जरूर देती है कि पार्टी संगठनात्मक और सामाजिक समीकरणों पर जोर दे रही है। पार्टी सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार उम्मीदवारों के चयन में क्षेत्रीय, जातीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व का संतुलन ध्यान में रखा गया है। तीन उम्मीदवार सामान्य वर्ग, तीन OBC और दो अनुसूचित जाति से बताए गए हैं।

सूची में पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार को जगह दी गई है। वहीं प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय और राम प्रताप सिंह चौहान जैसे लंबे समय से संगठन में सक्रिय नेताओं को भी उम्मीदवार बनाया गया है। इससे यह संदेश गया है कि पार्टी राज्यसभा के जरिए संगठनात्मक कार्यकर्ताओं और नए चेहरों को आगे लाना चाहती है।

हरदीप पुरी और बीएल वर्मा के साथ भाजपा ने उत्तर प्रदेश से रिटायर हो रहे अन्य मौजूदा सदस्यों को भी टिकट नहीं दिया है। इनमें अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल और सीमा द्विवेदी शामिल हैं। ऐसे में यह बदलाव सिर्फ दो केंद्रीय मंत्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यसभा में पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रतिनिधित्व में व्यापक बदलाव का संकेत देता है।

उत्तर प्रदेश से कुल 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। इनमें आठ सीटों पर भाजपा अपने संख्याबल के आधार पर मजबूत स्थिति में है। यही वजह है कि पार्टी की सूची जारी होते ही यह तय माना जा रहा है कि भाजपा के ये आठ उम्मीदवार राज्यसभा पहुंच सकते हैं, बशर्ते अंतिम मुकाबले में कोई अप्रत्याशित राजनीतिक स्थिति न बने।

राज्यसभा चुनाव 16 अक्टूबर को होना है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों की अंतिम स्थिति साफ होगी। भाजपा की सूची के बाद अब राजनीतिक चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को पार्टी आगे किस जिम्मेदारी में देखती है। क्या उन्हें किसी दूसरे राज्य से राज्यसभा भेजा जाएगा, लोकसभा की किसी संभावित सीट से मौका मिलेगा या संगठन तथा सरकार में नई भूमिका दी जाएगी—इस पर फिलहाल कोई आधिकारिक संकेत नहीं है।

हरदीप सिंह पुरी का नाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह केंद्र सरकार के प्रमुख चेहरों में रहे हैं और शहरी विकास, आवास, नागरिक उड्डयन और पेट्रोलियम जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके हैं। बीएल वर्मा भी भाजपा संगठन और पिछड़ा वर्ग की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में दोनों को राज्यसभा सूची से बाहर रखने के फैसले को केवल टिकट काटने की सामान्य प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जा रहा।

कुछ राजनीतिक हलकों में हरदीप पुरी को पंजाब की भविष्य की राजनीति से जोड़कर भी अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन इस बारे में पार्टी की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है। इसी तरह बीएल वर्मा के अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन संभावनाओं को आधिकारिक रणनीति मानना अभी जल्दबाजी होगी।

भाजपा की सूची ने यह भी साफ कर दिया है कि पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और दूसरे राज्यों के राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपने संसदीय चेहरों में बदलाव कर रही है। हालांकि राज्यसभा टिकट और संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल के बीच सीधा संबंध है या नहीं, इस पर पार्टी ने कुछ नहीं कहा है।

फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए भाजपा ने बड़े पैमाने पर नए चेहरों पर भरोसा जताया है। हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का नाम सूची से बाहर होने के बाद अब नजर पार्टी नेतृत्व के अगले फैसले पर रहेगी। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो सकता है कि दोनों केंद्रीय मंत्रियों को नई संसदीय सीट, संगठनात्मक जिम्मेदारी या सरकार में किसी अलग भूमिका के साथ आगे बढ़ाया जाता है या नहीं।

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