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Delhi दिल्ली। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के महत्व और इसे सामाजिक आंदोलन के रूप में मान्यता मिलने पर आज एक विस्तृत बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह दिन संस्कृति मंत्रालय और मिशन पांडुलिपियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ज्ञान भारतम’ नाम दिया है। मंत्री शेखावत ने बताया कि इस मिशन को मूर्तरूप देने और इसे व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए मंत्रालय ने अपने प्रयासों का विस्तार किया है। अब इसे केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन के रूप में मान्यता दी गई है। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे आधुनिक शिक्षा और जन जीवन में प्रासंगिक बनाने का माध्यम है। उन्होंने आगे बताया कि इस मिशन के तहत देशभर में काम करने वाली विभिन्न संस्थाओं के साथ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन संस्थाओं के सहयोग से ज्ञान भारतम मिशन को तेजी से लागू किया जाएगा और यह भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं को युवाओं तक पहुँचाना है। उन्होंने यह भी बताया कि मिशन का केंद्र बिंदु पांडुलिपियों का संरक्षण और उनका डिजिटलीकरण है, ताकि इन्हें सुरक्षित रखते हुए दुनिया भर में साझा किया जा सके। शेखावत ने यह भी कहा कि मिशन को सामाजिक आंदोलन के रूप में मान्यता मिलने से यह जनता की भागीदारी के माध्यम से और मजबूत होगा। विभिन्न शिक्षण संस्थान, शोधकेंद्र और सांस्कृतिक संगठन इस मिशन में सहयोग करेंगे। इसके अलावा, नागरिक और स्वयंसेवी संगठन भी इसमें शामिल होंगे, जिससे भारत के सांस्कृतिक ज्ञान का प्रसार होगा।
केंद्रीय मंत्री ने यह बताया कि मंत्रालय ने अपने प्रयासों का दायरा बढ़ाया है ताकि भारत के विभिन्न भागों में कार्यरत पांडुलिपि संरक्षण केंद्र और शोध संस्थान भी इस मिशन से जुड़े। उन्होंने कहा कि यह मिशन न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करेगा, बल्कि युवाओं में भारतीय ज्ञान और संस्कृति के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा। शेखावत ने मीडिया से कहा कि इस पहल से भारत में शिक्षा और संस्कृति का नया अध्याय शुरू होगा। Mission Manuscripts के माध्यम से पुरानी पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाएगा और उनका लाभ छात्रों, शोधकर्ताओं और सामान्य जनता को मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि ज्ञान भारतम मिशन से भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण को गति मिलेगी और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्रालय ने मिशन के लिए तकनीकी और प्रशासनिक संसाधनों का पूरा प्रबंध किया है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए यह मिशन ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर खोलेगा। इस तरह, ज्ञान भारतम मिशन को सामाजिक आंदोलन के रूप में मान्यता मिलने से यह पहल अब व्यापक स्तर पर कार्यान्वित होगी। मंत्रालय के प्रयास और संस्थाओं के सहयोग से भारतीय संस्कृति, पांडुलिपियों और ज्ञान की धरोहर को सुरक्षित और सुलभ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मिशन भारत में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक निर्णायक पहल के रूप में देखा जा रहा है, और आने वाले समय में इसके सकारात्मक प्रभाव और उपलब्धियों की उम्मीद की जा रही है।
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