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गुरजीत औजला और श्रीनिवास बीवी ने दोहराई इस्तीफे की मांग

Ratna Netam
8 Oct 2026 4:26 PM IST
गुरजीत औजला और श्रीनिवास बीवी ने दोहराई इस्तीफे की मांग
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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार, 8 अक्टूबर को कांग्रेस नेता गुरजीत सिंह औजला और श्रीनिवास बीवी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना विरोध दोहराते हुए स्पष्ट किया कि विपक्ष अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगा। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इस दौरान गुरजीत सिंह औजला ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि विपक्ष पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाने वाली भाजपा को अपने कामकाज पर जवाब देना चाहिए।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस नेता गुरजीत सिंह औजला ने विपक्ष द्वारा अराजकता फैलाए जाने के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने पलटवार करते हुए भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के जरिए सत्ता हासिल करने का आरोप लगाया। औजला ने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता के सवालों को लेकर आवाज उठा रहा है।गुरजीत सिंह औजला ने कहा, "नहीं, अराजकता कौन फैला रहा है? आप (बीजेपी) ही हैं जिन्होंने अराजकता फैलाई है। आपने वोट लूटकर पूरे देश में सरकारें बनाई हैं।औजला ने सवाल उठाया कि यदि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है, तो लोगों को अपनी पसंद के जनप्रतिनिधियों को चुनने का पूरा अवसर क्यों नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठा रहा है।
हालांकि, भाजपा द्वारा कथित तौर पर वोट लूटकर सरकारें बनाने का आरोप कांग्रेस नेता का राजनीतिक दावा है। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों के प्रमाणित होने की पुष्टि नहीं की गई है। भाजपा और चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में अनियमितता तथा राजनीतिक पक्षपात से जुड़े आरोपों का खंडन किया है।कांग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखेंगे। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़े सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
दरअसल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस सहित INDIA गठबंधन के कई दलों ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और संशोधन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं।विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी योग्य नागरिक का नाम बिना उचित प्रक्रिया के मतदाता सूची से नहीं हटाया जाए।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। हालांकि, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य अपात्र और दोहराई गई प्रविष्टियों की पहचान करना तथा सूची को अद्यतन रखना है।इससे पहले मंगलवार, 6 अक्टूबर को कांग्रेस और INDIA गठबंधन के सांसदों ने दिल्ली में निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। इस दौरान विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया था।
बुधवार, 7 अक्टूबर को भी विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन जारी रहा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई विपक्षी नेता जंतर-मंतर की ओर जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कई विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।गुरुवार को लगातार तीसरे दिन भी विपक्षी दलों ने अपना आंदोलन जारी रखा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेताओं ने महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट पर शांतिपूर्ण धरना देने की योजना बनाई। विपक्षी सांसदों ने इसके जरिए चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी मांगों को दोहराने का फैसला किया।
दिल्ली में इन प्रदर्शनों के कारण सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा में अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं। उनके आवास और चुनाव आयोग के कार्यालय के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई है। अधिकारियों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा संबंधी सूचनाओं को ध्यान में रखते हुए ये कदम उठाए गए हैं।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। वे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी उठा रहे हैं। विपक्ष की मांग है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण से संबंधित शिकायतों का उचित समाधान किया जाए और चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित हो।
वहीं, भाजपा ने विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का विरोध किया है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के विरोध प्रदर्शन के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं। भाजपा का कहना है कि विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर निराधार आरोप लगा रहा है।इसी राजनीतिक विवाद के बीच गुरजीत सिंह औजला ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष को अराजकता फैलाने वाला बताना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने का अधिकार विपक्ष को है और कांग्रेस इन मुद्दों पर चुप नहीं रहेगी।श्रीनिवास बीवी ने भी विरोध जारी रखने के संकल्प को दोहराया। दोनों नेताओं के बयानों से स्पष्ट है कि कांग्रेस फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से पीछे हटने के पक्ष में नहीं है।
देश की चुनावी व्यवस्था में चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना उसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण भी चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इस प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान पारदर्शी तरीके से होना आवश्यक है।फिलहाल कांग्रेस और INDIA गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं। दूसरी ओर, भाजपा और चुनाव आयोग विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रहे हैं। गुरजीत सिंह औजला और श्रीनिवास बीवी के ताजा बयानों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा SIR से जुड़े राजनीतिक विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
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