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दिल्ली-एनसीआर
दिल्ली-NCR में GRAP-3 लागू, स्कूलों से दफ्तरों तक बढ़ीं पाबंदियां
Rajeshwari Nishad
6 Nov 2026 5:46 PM IST

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नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। दीपावली से पहले राजधानी की हवा की गुणवत्ता में गिरावट ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार, 6 नवंबर को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 382 दर्ज किया गया, जो 'बेहद खराब' श्रेणी में आता है। वहीं, कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर 450 से भी ऊपर पहुंच गया और कुछ निगरानी केंद्रों पर AQI 500 के करीब दर्ज किया गया। बिगड़ते हालात को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण यानी GRAP-3 को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।
इस फैसले के बाद दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के प्रमुख शहरों में भी प्रदूषण नियंत्रण के उपाय और सख्त होंगे। निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर प्रतिबंध, पुराने वाहनों के संचालन पर पाबंदी और धूल नियंत्रण के उपायों को प्रभावी तरीके से लागू करना होगा। CAQM की उपसमिति ने यह फैसला प्रदूषण की मौजूदा स्थिति और आगे हवा की गुणवत्ता और बिगड़ने की आशंका को ध्यान में रखते हुए लिया है।
कई इलाकों में 450 के पार पहुंचा AQI
शुक्रवार सुबह दिल्ली के आसमान में धुंध की मोटी परत छाई रही। सड़कों पर निकलने वाले लोगों को कम दृश्यता और प्रदूषित हवा का सामना करना पड़ा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 8 बजे दिल्ली का औसत AQI 389 दर्ज किया गया था, जबकि गुरुवार को यह 367 था। बाद में CAQM के लाइव डैशबोर्ड पर शाम 4 बजे औसत AQI 382 दर्ज हुआ।राजधानी के कई इलाकों में स्थिति और अधिक चिंताजनक रही। IIT दिल्ली और रोहिणी में AQI 474 दर्ज किया गया, जबकि पंजाबी बाग में यह 465 तक पहुंच गया। इन इलाकों में हवा की गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में रही। हालांकि, दिल्ली का औसत AQI 382 होने के कारण समग्र स्थिति 'बेहद खराब' श्रेणी में दर्ज की गई।विशेषज्ञों के अनुसार, हवा की गति कम होने और प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के कारण प्रदूषक कण वातावरण में जमा हो रहे हैं। इससे प्रदूषण का स्तर कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहा है। दीपावली के आसपास पटाखों से निकलने वाला धुआं स्थिति को और बिगाड़ सकता है।
GRAP-3 लागू होने के बाद क्या-क्या बदलेगा?
GRAP-3 लागू होने के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर अतिरिक्त नियंत्रण लगाया गया है। इसके तहत धूल पैदा करने वाले निर्माण एवं तोड़फोड़ के कार्यों पर सख्ती की जाएगी। इसमें खुदाई, पाइलिंग, विध्वंस, खुले में मिट्टी हटाने और खुले ट्रेंच से जुड़े कार्य शामिल हैं। आवश्यक सार्वजनिक परियोजनाओं जैसे मेट्रो, रेलवे, अस्पताल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कुछ कार्यों को निर्धारित छूट दी गई है।निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। संबंधित एजेंसियों को नियमों का उल्लंघन करने वाली साइटों की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने के निर्देश हैं। पहले से लागू GRAP-1 और GRAP-2 के उपाय भी जारी रहेंगे। इनमें सड़कों की मशीनी सफाई, पानी का छिड़काव, कूड़े के खुले में जलाने पर रोक और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर निगरानी जैसे कदम शामिल हैं।
पुराने वाहनों पर लगेगी पाबंदी
GRAP-3 के तहत वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। दिल्ली और कुछ एनसीआर जिलों में BS-III पेट्रोल तथा BS-IV और उससे पुराने मानकों वाले डीजल चारपहिया वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध लागू होगा। इसके दायरे में दिल्ली के अलावा गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और सोनीपत शामिल हैं।इसके अलावा दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-IV और उससे पुराने मानकों वाले डीजल लाइट एवं मीडियम गुड्स वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध रहेगा। आवश्यक वस्तुओं और जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों के लिए लागू नियमों के अनुसार व्यवस्था होगी। CAQM ने सितंबर 2026 में GRAP के नियमों में संशोधन कर कुछ वाहन प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया था।
स्कूलों में हाइब्रिड पढ़ाई का विकल्प
प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है। इसे देखते हुए GRAP-3 के तहत दिल्ली और संबंधित एनसीआर जिलों में कक्षा पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए हाइब्रिड मोड में पढ़ाई का विकल्प लागू किया जा सकता है। इसमें स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाओं के साथ ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा भी शामिल होगी।इसके अलावा सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति को 50 प्रतिशत तक सीमित करने और शेष कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि, कार्यालयों के संबंध में यह व्यवस्था संबंधित सरकार और प्रशासन के फैसले के अनुसार लागू होगी।
दीपावली से पहले बढ़ी प्रदूषण की चिंता
दीपावली से ठीक पहले प्रदूषण का स्तर बढ़ने से प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है। त्योहार के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं पहले से प्रदूषित हवा में जहरीले कणों की मात्रा बढ़ा सकता है। इसके अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां भी प्रदूषण में योगदान देती हैं।CAQM ने सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों को GRAP-3 के नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के एनसीआर क्षेत्रों में संबंधित प्रशासन को प्रदूषण नियंत्रण के लिए समन्वय बनाकर काम करना होगा।
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जा रही है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा, फेफड़ों या हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। बाहर निकलना जरूरी हो तो अच्छी गुणवत्ता वाला N95 मास्क इस्तेमाल करना उपयोगी हो सकता है।लोगों को सुबह और देर रात के समय खुले में ज्यादा देर तक व्यायाम करने से बचना चाहिए। आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी, खांसी या गले में खराश जैसी शिकायत होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से राहत मिलने के संकेत नहीं हैं। GRAP-3 लागू होने के बाद अब निगरानी एजेंसियों की जिम्मेदारी होगी कि प्रतिबंधों का प्रभावी पालन कराया जाए। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति, हवा की गति और प्रदूषण के स्तर के आधार पर CAQM आगे की रणनीति तय करेगा। त्योहार से पहले हवा की गुणवत्ता में सुधार करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
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