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CBG उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की बड़ी पहल, 23,731 करोड़ की गोबरधन योजना शुरू

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अपनी महत्वाकांक्षी ‘गोबरधन’ (GOBARdhan) योजना शुरू कर दी है। इस योजना के तहत CBG उत्पादकों को उत्पादन और बिक्री को लेकर अधिक भरोसा देने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं।
सरकार ने इस योजना के लिए 23,731 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य देश में जैविक कचरे और कृषि अवशेषों से ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना और CBG उद्योग के लिए स्थिर बाजार तैयार करना है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 15 सितंबर को जारी ऑपरेशनल गाइडलाइंस में योजना से जुड़े विस्तृत नियम तय किए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी।
CBG उत्पादकों को खरीद की गारंटी
गोबरधन योजना के तहत CBG उत्पादकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान उत्पादन की खरीद को लेकर किया गया है। योजना में उत्पादकों को उनके उत्पादन का 100 प्रतिशत तक खरीद की गारंटी देने की व्यवस्था की गई है।
इससे CBG प्लांट लगाने वाले निवेशकों और कंपनियों को बाजार को लेकर अनिश्चितता कम होगी। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक उद्यमी CBG उत्पादन क्षेत्र में निवेश करें।
तय कीमत से मिलेगा भरोसा
योजना के तहत CBG उत्पादकों को कम से कम 10 वर्षों तक सरकार द्वारा निर्धारित कीमत मिलने की व्यवस्था की गई है। इससे कंपनियों को लंबे समय की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए कीमतों में स्थिरता महत्वपूर्ण मानी जाती है। सरकार का मानना है कि तय मूल्य व्यवस्था से CBG उत्पादन को गति मिलेगी और नए प्लांट स्थापित करने में रुचि बढ़ेगी।
कैपिटल सपोर्ट का भी प्रावधान
गोबरधन योजना में CBG परियोजनाओं के लिए पूंजीगत सहायता (Capital Support) का भी प्रावधान रखा गया है। इससे नए प्लांट लगाने और मौजूदा इकाइयों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
CBG प्लांट स्थापित करने में शुरुआती निवेश काफी अधिक होता है। ऐसे में सरकार की सहायता से छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमियों को भी इस क्षेत्र में अवसर मिल सकता है।
जैविक कचरे से ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा
गोबरधन योजना का मुख्य उद्देश्य देश में उपलब्ध जैविक कचरे का बेहतर उपयोग करना है। इसके तहत गोबर, कृषि अवशेष, खाद्य अपशिष्ट और अन्य जैविक सामग्री से बायोगैस तैयार कर उसे कम्प्रेस्ड बायोगैस में बदला जाएगा।
इससे एक ओर जहां कचरा प्रबंधन बेहतर होगा, वहीं दूसरी ओर स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है। CBG जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देकर सरकार ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
CBG को वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इसके उत्पादन से प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को फायदा
गोबरधन योजना का लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिलने की उम्मीद है। कृषि अवशेष और पशुओं से निकलने वाले अपशिष्ट का उपयोग CBG उत्पादन में किया जा सकेगा।
इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
पर्यावरण संरक्षण में मदद
CBG उत्पादन से पर्यावरण को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। जैविक कचरे के वैज्ञानिक उपयोग से खुले में कचरा जमा होने की समस्या कम होगी और प्रदूषण में भी कमी आ सकती है।
सरकार का लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन कम करना भी है।
2035 तक चलेगी योजना
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, गोबरधन योजना वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी।
इस अवधि में CBG उत्पादन क्षमता बढ़ाने और उद्योग के लिए मजबूत बाजार व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।
CBG सेक्टर को मिलेगी नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि खरीद गारंटी, कीमत स्थिरता और पूंजी सहायता जैसे कदम CBG क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं।
गोबरधन योजना के जरिए सरकार का प्रयास है कि जैविक कचरे को संसाधन में बदला जाए और देश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का नया मॉडल विकसित किया जाए।





