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करतारपुर साहिब कॉरिडोर पर सरकार का बड़ा बयान, सुरक्षा कारणों से नहीं खुलेगा रास्ता

nidhi
1 Aug 2026 6:52 AM IST
करतारपुर साहिब कॉरिडोर पर सरकार का बड़ा बयान, सुरक्षा कारणों से नहीं खुलेगा रास्ता
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संसद में सरकार ने साफ किया रुख, सुरक्षा चिंताओं के चलते बंद रहेगा करतारपुर कॉरिडोर

नई दिल्ली : भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि करतारपुर साहिब कॉरिडोर को दोबारा खोलने का कोई निर्णय फिलहाल नहीं लिया गया है। संसद में सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। इसी कारण कॉरिडोर वर्तमान स्थिति में बंद रहेगा, जब तक सुरक्षा एजेंसियां इसे पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानतीं।

सरकार की ओर से संसद में दिए गए जवाब में कहा गया कि करतारपुर साहिब कॉरिडोर से संबंधित सभी निर्णय सुरक्षा एजेंसियों के आकलन, सीमा पर मौजूद परिस्थितियों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। केंद्र ने दोहराया कि श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था का सम्मान किया जाता है, लेकिन सुरक्षा संबंधी जोखिमों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
करतारपुर साहिब कॉरिडोर भारत के पंजाब स्थित डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान के करतारपुर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब से जोड़ता है। यह कॉरिडोर विशेष रूप से सिख श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक मार्ग है, क्योंकि माना जाता है कि गुरुद्वारा दरबार साहिब वही स्थान है जहां सिख धर्म के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए थे। इसी कारण देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन की इच्छा रखते हैं।
सरकार ने संसद में यह भी संकेत दिया कि सीमा पार की गतिविधियों और सुरक्षा से जुड़े इनपुट पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि भविष्य में परिस्थितियां अनुकूल होती हैं और सुरक्षा एजेंसियां सकारात्मक रिपोर्ट देती हैं, तभी इस संबंध में आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव, सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां ऐसे निर्णयों को सीधे प्रभावित करती हैं। इसलिए सरकार धार्मिक यात्रा की सुविधा और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाकर कदम उठाने की नीति पर काम कर रही है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमा से जुड़े किसी भी कॉरिडोर या आवाजाही मार्ग का संचालन अत्यधिक संवेदनशील विषय होता है। ऐसे मामलों में खुफिया रिपोर्ट, सीमा की स्थिति और संभावित सुरक्षा जोखिमों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। इसी प्रक्रिया के आधार पर सरकार अंतिम फैसला लेती है।
संसद में दी गई जानकारी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल करतारपुर साहिब कॉरिडोर को फिर से खोलने की कोई तत्काल योजना नहीं है। सरकार ने दोहराया कि श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए भी देश की सुरक्षा से जुड़ा कोई जोखिम स्वीकार नहीं किया जाएगा।
करतारपुर साहिब कॉरिडोर का महत्व
साल 2019 में शुरू किया गया करतारपुर साहिब कॉरिडोर भारत और पाकिस्तान के बीच एक विशेष धार्मिक गलियारा है। इसके माध्यम से भारतीय श्रद्धालु बिना वीजा के निर्धारित प्रक्रिया के तहत पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब के दर्शन कर सकते हैं। यह पहल दोनों देशों के बीच धार्मिक संपर्क को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
हालांकि समय-समय पर सुरक्षा परिस्थितियों और द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए इसके संचालन को लेकर फैसले लिए जाते रहे हैं। सरकार का कहना है कि भविष्य में भी सभी निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा और देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ही किए जाएंगे।
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