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नई दिल्ली: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली और पेपर लीक मामलों पर अब तेजी से कार्रवाई की तैयारी है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट अब केवल इसी केस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पिछले दो दशकों के कई बड़े परीक्षा घोटालों की सुनवाई भी इसी अदालत में स्थानांतरित किए जाने की संभावना है। इससे लंबे समय से लंबित पड़े मामलों को गति मिलने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार की ओर से परीक्षा माफियाओं पर सख्त कार्रवाई और दोषियों को जल्द सजा दिलाने के उद्देश्य से फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा घोटालों के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की घोषणा के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष अदालत का गठन किया था। अब इस अदालत में पुराने मामलों की सुनवाई भी तेज होने की संभावना है।
इस विशेष अदालत में सबसे प्रमुख मामला नीट-यूजी 2026 पेपर लीक का है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में करीब 20 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिगा की अदालत में इस मामले की आगे की सुनवाई होगी। सीबीआई ने चार्जशीट के साथ कई दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य अहम साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए हैं।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में जिन पुराने मामलों को लाने की तैयारी है, उनमें वर्ष 2003 का कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) पेपर लीक मामला भी शामिल है। यह देश के सबसे पुराने परीक्षा घोटालों में से एक है। नवंबर 2003 में परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी सामने आई थी, जिसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इस घटना से करीब 1.25 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए थे।
सीबीआई ने इस मामले में वर्ष 2004 में ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी, लेकिन करीब 22 साल बाद भी मामला आरोप तय करने की प्रक्रिया से आगे नहीं बढ़ पाया। लंबे समय तक सुनवाई में देरी के कारण अभ्यर्थियों और जांच एजेंसी दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अब फास्ट ट्रैक कोर्ट में आने से इस मामले में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
इसके अलावा वर्ष 2023 में हुए एम्स नारसेट-4 भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले की सुनवाई भी तेज हो सकती है। इस परीक्षा में एम्स और अन्य अस्पतालों में नर्सिंग भर्ती के लिए बड़ी संख्या में उम्मीदवार शामिल हुए थे। सीबीआई का आरोप है कि परीक्षा समाप्त होने से पहले अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराने की साजिश रची गई थी और इसके बदले पैसे लिए गए थे।
इस मामले में आरोप तय करने को लेकर करीब एक साल तक अदालत में बहस चली, लेकिन न्यायाधीश के बदलाव के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब मामला नई फास्ट ट्रैक अदालत में पहुंचने पर दोबारा सुनवाई शुरू हो सकती है।
वर्ष 2024 के यूजीसी-नेट परीक्षा मामले पर भी अदालत की नजर है। इस मामले में सीबीआई ने जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने जांच एजेंसी से सवाल किया कि जब कुछ लोगों द्वारा अभ्यर्थियों से पेपर लीक के नाम पर पैसे लेने की बात सामने आई थी, तो फिर क्लोजर रिपोर्ट किस आधार पर दाखिल की गई।
देशभर में परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों का बोझ पहले से ही काफी ज्यादा है। केंद्र सरकार के अनुसार अप्रैल 2026 तक देश की 775 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट में करीब 2.49 लाख मामले लंबित थे। ऐसे में परीक्षा से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था से न्याय प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
सरकार का उद्देश्य है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखी जाए और पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों को जल्द से जल्द सजा मिले। फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए पुराने मामलों का निपटारा होने से लाखों छात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद है, जो वर्षों से इन मामलों के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।





