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दिल्ली-एनसीआर
मेडिकल डिवाइस आयात घटाने के लिए सरकार की नई पहल, 500 करोड़ की योजना के तहत मांगे प्रस्ताव
SHIDDHANT
4 Jan 2026 9:26 PM IST

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Delhi दिल्ली। केंद्र सरकार ने मेडिकल उपकरणों के आयात को कम करने और देश में ही इन्हें बनाने को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की है। इसके तहत सरकार ने दो निवेश उप-योजनाओं के अंतर्गत कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं। इन योजनाओं की घोषणा एक साल पहले की गई थी। इस समय भारत अपने मेडिकल उपकरणों की जरूरत का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा विदेश से मंगाता है। इस निर्भरता को कम करने के लिए फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने नवंबर 2024 में 500 करोड़ रुपए के सहायता पैकेज की शुरुआत की थी, ताकि देश में मेडिकल डिवाइस बनाने और नई तकनीक को बढ़ावा मिल सके।
सरकार की ओर से हाल ही में जारी एक नोटिस के अनुसार, इस योजना के लिए योग्य कंपनियों को 10 जनवरी 2026 तक अपने प्रस्ताव जमा करने होंगे। पहली उप-योजना के तहत सरकार ने 180 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं, जिसमें करीब 30 कंपनियों को मदद दी जाएगी। इसका उद्देश्य मेडिकल उपकरण बनाने में इस्तेमाल होने वाले जरूरी कच्चे माल और पुर्जों (कंपोनेंट्स) का उत्पादन देश में ही बढ़ाना है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
अभी भारत की कई कंपनियां कच्चा माल और जरूरी हिस्से बाहर से मंगाती हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है और सप्लाई में परेशानी होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार इस योजना में परियोजना लागत का 10 से 20 प्रतिशत तक सब्सिडी देगी, जो अधिकतम 10 करोड़ रुपए तक होगी। यह पैसा खर्च करने के बाद वापस किया जाएगा। यह योजना उन मेडिकल उपकरणों और जांच मशीनों पर लागू होगी, जिन्हें सरकार जरूरत पड़ने पर विदेश से खरीदने की अनुमति देती है, क्योंकि वे भारत में आसानी से उपलब्ध नहीं होते।
दूसरी उप-योजना मेडिकल उपकरणों के क्लिनिकल परीक्षण (जांच) से जुड़ी है। इसे मेडिकल डिवाइस क्लिनिकल स्टडीज सपोर्ट स्कीम कहा जाता है। इसके लिए कुल बजट 110 करोड़ रुपए है, जिसका फायदा बड़ी कंपनियों के साथ-साथ स्टार्टअप्स को भी मिलेगा।
इसके तहत कंपनियों को जानवरों पर होने वाले अध्ययन और जांच के लिए 2.5 करोड़ रुपए तक और मरीजों पर होने वाले क्लिनिकल परीक्षण के लिए 5 करोड़ रुपए तक की मदद दी जाएगी। इसके अलावा, नई जांच किट (इन-विट्रो डायग्नोस्टिक) की गुणवत्ता जांच के लिए 1 करोड़ रुपए तक की सहायता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से देश में मेडिकल डिवाइस उद्योग मजबूत होगा, आयात कम होगा और भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
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