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खाड़ी क्षेत्र में संचालित भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर सरकार की नजर
SHIDDHANT
12 March 2026 11:40 PM IST

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Delhi दिल्ली। बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में संचालित भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या 28 ही बनी हुई है। मंत्रालय ने बताया कि सभी भारतीय जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा और संरक्षा पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद इन भारतीय जहाजों में से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं। वहीं चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्व में हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक मौजूद हैं।
मंत्रालय के अनुसार, भारतीय दूतावासों और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर संबंधित प्राधिकरण, जहाज प्रबंधक और भर्ती एजेंसियां लगातार समन्वय कर रही हैं, ताकि नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और जरूरत पड़ने पर चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके। डीजी शिपिंग द्वारा 28 फरवरी को जारी की गई सलाह, जिसमें भारतीय नाविकों, भारतीय ध्वज वाले जहाजों और समुद्री व्यापार संचालन की सुरक्षा के लिए एहतियाती उपाय बताए गए थे, अभी भी लागू हैं।
देश के सभी बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य रूप से जारी है। सभी प्रमुख बंदरगाहों और राज्य समुद्री बोर्डों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई है, ताकि शिपिंग कंपनियों और निर्यातकों को समन्वय के माध्यम से सहायता दी जा सके और उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जा सके। सभी प्रमुख बंदरगाहों पर एक नोडल अधिकारी को ‘सिंगल प्वाइंट ऑफ कॉन्टैक्ट’ के रूप में नियुक्त किया गया है।
प्रमुख बंदरगाहों को एलपीजी जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर बर्थिंग (लंगर डालने की सुविधा) देने के निर्देश भी दिए गए हैं। सके अलावा बंदरगाहों ने कई सहूलियतें लागू की हैं, जैसे मध्य-पूर्व जाने वाले प्रभावित कार्गो को ट्रांसशिपमेंट कार्गो के रूप में स्टोर करने की अनुमति देना, अतिरिक्त भंडारण स्थान उपलब्ध कराना, जरूरत पड़ने पर जहाजों को अस्थायी रूप से बर्थिंग की अनुमति देना, कस्टम विभाग के साथ समन्वय कर ‘बैक टू टाउन’ प्रक्रिया को तेज करना और जहां संभव हो वहां ईंधन आपूर्ति (बंकरिंग) बढ़ाना।
इसके साथ ही प्रमुख बंदरगाहों को कस्टम और डीजीएफटी जैसी एजेंसियों के साथ समन्वय करने, बंदरगाह शुल्क में राहत पर विचार करने और मंत्रालय को रोजाना कार्रवाई की रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि संकट के दौरान लॉजिस्टिक्स व्यवस्था सुचारू बनी रहे।सरकार ने बुनियादी ढांचे, वित्तीय सहायता, ऊर्जा सुरक्षा की निगरानी और जहाजों की सुरक्षा से जुड़े कई समन्वित कदम उठाए हैं।a
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