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व्हाट्सएप के ‘यूज़रनेम’ फीचर पर सरकार की निगरानी तेज

Kavita2
6 July 2026 5:23 PM IST
व्हाट्सएप के ‘यूज़रनेम’ फीचर पर सरकार की निगरानी तेज
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New Delhi नई दिल्ली : मेटा के स्वामित्व वाले लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप को उसके विवादित ‘यूज़रनेम’ फीचर को लेकर भारतीय सरकार को जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने इस मामले में अपना विस्तृत पक्ष रखने के लिए और समय की मांग की थी, जिसके बाद उसे तीन दिन का अतिरिक्त समय प्रदान किया गया है। इसी के साथ व्हाट्सएप ने सरकार को यह भरोसा दिलाया है कि जब तक इस मुद्दे पर पूरी बातचीत और स्पष्टता नहीं हो जाती, तब तक यह फीचर भारत में लॉन्च नहीं किया जाएगा।

यह पूरा मामला व्हाट्सएप के उस नए फीचर से जुड़ा है जिसमें उपयोगकर्ताओं को बिना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से बातचीत करने की सुविधा मिलेगी। इस फीचर को ‘यूज़रनेम’ सिस्टम कहा जा रहा है, जिसके तहत यूजर अपने फोन नंबर के बजाय एक यूज़रनेम के जरिए संपर्क स्थापित कर सकेंगे। यह बदलाव मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के पारंपरिक उपयोग मॉडल में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने इस फीचर को लेकर कुछ सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी चिंताएं व्यक्त की हैं। इन्हीं चिंताओं के आधार पर संबंधित विभाग ने व्हाट्सएप से विस्तृत जवाब और तकनीकी जानकारी मांगी है। सरकार यह समझना चाहती है कि नए सिस्टम के लागू होने से उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी और साइबर निगरानी पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

सरकारी नोटिस के जवाब में व्हाट्सएप को पहले एक निश्चित समयसीमा दी गई थी, लेकिन कंपनी ने अधिक समय की मांग की। इसके बाद अधिकारियों ने कंपनी को तीन दिन का अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया है। यह समय सीमा इसलिए बढ़ाई गई है ताकि कंपनी अपने तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं को विस्तार से प्रस्तुत कर सके।

सूत्रों का कहना है कि व्हाट्सएप ने यह भी आश्वासन दिया है कि जब तक सरकार के साथ सभी चर्चाएं पूरी नहीं हो जातीं और आवश्यक स्पष्टता नहीं मिल जाती, तब तक इस फीचर को भारत में लागू नहीं किया जाएगा। यह आश्वासन इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कंपनी फिलहाल सरकार के साथ सहयोगात्मक रुख अपना रही है।

यूज़रनेम फीचर को लेकर वैश्विक स्तर पर भी चर्चा हो रही है। इस फीचर का मुख्य उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता को बढ़ाना बताया जा रहा है, जिससे लोग अपने मोबाइल नंबर को सार्वजनिक किए बिना संवाद कर सकें। इससे व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

हालांकि, विशेषज्ञों और नियामक संस्थाओं का मानना है कि इस तरह के फीचर से कुछ नए जोखिम भी सामने आ सकते हैं। इनमें स्पैम मैसेज, फर्जी पहचान, साइबर धोखाधड़ी और निगरानी से जुड़े मुद्दे शामिल हो सकते हैं। इसी कारण सरकार इस फीचर को लेकर सावधानीपूर्वक समीक्षा कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, सरकार चाहती है कि किसी भी नए डिजिटल फीचर को भारत में लॉन्च करने से पहले सभी सुरक्षा मानकों और कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाए। इसके लिए व्हाट्सएप से तकनीकी दस्तावेज, सुरक्षा प्रोटोकॉल और उपयोगकर्ता डेटा प्रबंधन से जुड़ी जानकारी मांगी गई है।

भारत में व्हाट्सएप के करोड़ों सक्रिय उपयोगकर्ता हैं और यह देश के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक है। ऐसे में किसी भी नए फीचर का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से सरकार इस बदलाव को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है।

टेक विशेषज्ञों का कहना है कि यूज़रनेम आधारित प्रणाली मैसेजिंग की दुनिया में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे जहां उपयोगकर्ताओं को अधिक गोपनीयता मिलेगी, वहीं पहचान आधारित सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं। इसलिए इस तकनीक के लागू होने से पहले संतुलित नियमों की आवश्यकता होगी।

फिलहाल सरकार और व्हाट्सएप के बीच बातचीत जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है। यह तय किया जाएगा कि यह फीचर भारत में कब और किन शर्तों के साथ लागू किया जाएगा।

इस पूरे मामले पर तकनीकी जगत की भी नजर बनी हुई है, क्योंकि यह निर्णय भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के भविष्य के नियमन के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

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