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परिसीमन बिल पास कराने को सरकार की बड़ी तैयारी

Ratna Netam
5 Aug 2026 2:36 PM IST
परिसीमन बिल पास कराने को सरकार की बड़ी तैयारी
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दिल्ली :केंद्र सरकार लंबे समय से चर्चा में रहे परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय हो गई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार सरकार इन दोनों अहम विधेयकों को पारित कराने के उद्देश्य से संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित विशेष सत्र 16 से 18 अगस्त के बीच आयोजित किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों का कहना है कि सरकार चाहती है कि लंबे समय से लंबित इन दोनों विषयों पर जल्द निर्णय लिया जाए। हालांकि विपक्ष के कड़े रुख और विभिन्न दलों की अलग-अलग चिंताओं को देखते हुए सरकार के सामने सर्वसम्मति बनाना बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इसी वजह से सरकार ने विपक्षी दलों से संवाद बढ़ाने की पहल भी शुरू कर दी है।
इसी क्रम में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को संसद भवन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। राहुल गांधी के कार्यालय में हुई यह बैठक करीब 50 मिनट तक चली। बैठक में कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद रहीं। माना जा रहा है कि इस दौरान संसद के मौजूदा गतिरोध के साथ-साथ प्रस्तावित विशेष सत्र और महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर भी चर्चा हुई।
सरकारी सूत्रों के अनुसार सरकार विपक्ष की राय जानने और सहमति बनाने का प्रयास कर रही है ताकि संसद में विधेयकों को लेकर अनावश्यक टकराव से बचा जा सके। वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि परिसीमन जैसे संवेदनशील विषय पर उनकी कई आशंकाएं हैं। उनका स्पष्ट रुख है कि जब तक इन चिंताओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक वे किसी भी प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं लेंगे।
परिसीमन का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। विभिन्न राज्यों के बीच जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी राय है। कई विपक्षी दलों का मानना है कि परिसीमन की प्रक्रिया से कुछ राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है, इसलिए इस विषय पर व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है।
दूसरी ओर महिला आरक्षण विधेयक भी लंबे समय से देश की राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से इस विषय पर कई वर्षों से राजनीतिक चर्चा होती रही है। सरकार इसे जल्द लागू करने की इच्छुक बताई जा रही है, जबकि विपक्ष चाहता है कि इसके क्रियान्वयन और अन्य संबंधित पहलुओं पर भी स्पष्टता लाई जाए।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब संसद का मानसून सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है। संसद के दोनों सदनों में कई दिनों से व्यवधान की स्थिति बनी हुई है, जिससे विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
विपक्ष मुख्य रूप से दो प्रमुख मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है। पहला मुद्दा 22 जुलाई को छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है, जबकि दूसरा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से संबंधित है। विपक्ष इन दोनों मामलों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में जवाब देने की मांग कर रहा है।
बुधवार को भी विपक्षी दलों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन जारी रखा। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई विपक्षी सांसदों ने प्रेरणा स्थल स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा से संसद के मकर द्वार तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी की और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सरकार वास्तव में अगस्त के मध्य में विशेष सत्र बुलाती है तो परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर व्यापक बहस देखने को मिल सकती है। सरकार जहां इन विधेयकों को पारित कराना चाहती है, वहीं विपक्ष अपनी चिंताओं और सुझावों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। ऐसे में आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बातचीत और राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। विशेष सत्र की आधिकारिक घोषणा और उसके एजेंडे पर अब सभी राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।
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