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दिल्ली-एनसीआर
डीप टेक स्टार्टअप्स को सरकार की बड़ी राहत, डीएसआईआर मान्यता प्राप्त करने के लिए की छूट की घोषणा
SHIDDHANT
4 Jan 2026 10:17 PM IST

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Delhi दिल्ली। केंद्र सरकार ने डीप टेक्नोलॉजी पर काम करने वाले स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब ऐसे स्टार्टअप्स को सरकारी मान्यता पाने के लिए तीन साल तक काम करना जरूरी नहीं होगा। यह छूट वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के औद्योगिक अनुसंधान और विकास प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत दी गई है।
रविवार को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के 42वें स्थापना दिवस के मौके पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य भारत के स्टार्टअप क्षेत्र को तेजी से आगे बढ़ाना है। इस कदम से नए और शुरुआती स्तर पर काम कर रहे नवाचार करने वाले युवाओं और उद्यमियों को जल्दी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने पहले ही एक लाख करोड़ रुपए का अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष बनाया है, जिससे देश में नई तकनीक को लेकर उत्साह बढ़ा है। यह कोष उन स्टार्टअप्स के लिए है, जो तकनीकी के क्षेत्र में एक निश्चित स्तर तक पहुंच चुके हैं।
उन्होंने कहा कि जो नवाचारकर्ता और स्टार्टअप अभी शुरुआती दौर में हैं, उनके लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड जैसी संस्थाओं में पहले से कई योजनाएं मौजूद हैं। तीन साल की शर्त हटाना डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है, जिससे वे जल्दी आगे बढ़ सकेंगे।
मंत्री ने बताया कि पहले वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद की ओर से स्टार्टअप्स को आर्थिक सहायता दी जाती थी, लेकिन इसके लिए कम से कम तीन साल तक काम करना जरूरी था। कई मामलों में यह सहायता एक करोड़ रुपए तक की होती थी।
अब सरकार ने तीन साल की यह शर्त हटा दी है। मंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य नए डीप टेक स्टार्टअप्स को जल्दी मजबूत बनाना है, भले ही वे अभी पूरी तरह स्थापित न हुए हों। साथ ही, तकनीक की गुणवत्ता की जांच पहले की तरह जारी रहेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब सिर्फ आत्मनिर्भर बनने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब दूसरे देश भी भारत की तकनीकी क्षमताओं पर निर्भर होने लगे हैं।
सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा कि आज के समय में तकनीकी आत्मनिर्भरता बहुत जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा घोषित एक लाख करोड़ रुपए के अनुसंधान कोष का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रयोगशालाओं में बनी तकनीकों को बाजार तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने यह भी बताया कि नई तकनीकों की सही जांच के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी तत्परता मूल्यांकन ढांचा (एनटीआरएएफ) तैयार किया गया है। इसके अलावा, मंथन और उत्थान जैसे मंचों के जरिए छोटे शहरों और संस्थानों को भी नवाचार में भाग लेने का मौका मिल रहा है।
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