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- महंगाई पर काबू के लिए...

नई दिल्ली: देश में थोक मूल्य मुद्रास्फीति (Wholesale Price Inflation) जून महीने में बढ़कर 9.87 प्रतिशत पहुंच गई। सोमवार को संसद में सरकार ने इसकी जानकारी दी। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि महंगाई दर में बढ़ोतरी मुख्य रूप से उन वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई, जिन पर वैश्विक कमोडिटी बाजार और ऊर्जा लागत में होने वाले बदलावों का सीधा असर पड़ता है।
सरकार ने कहा कि महंगाई को नियंत्रित करने और आम उपभोक्ताओं पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं। वित्त राज्य मंत्री ने सदन को बताया कि आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों में स्थिरता लाने के लिए सरकार लगातार निगरानी कर रही है।
पंकज चौधरी ने कहा कि महंगाई का असर कम करने के लिए सरकार ने कई उपाय लागू किए हैं। इनमें आवश्यक वस्तुओं का बफर स्टॉक बढ़ाना, बाजार में आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों की नियमित निगरानी जैसे कदम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य उपभोक्ताओं को राहत देना और बाजार में संतुलन बनाए रखना है।
थोक मूल्य मुद्रास्फीति किसी भी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं की कीमतों में होने वाले बदलाव को मापने का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसमें कच्चे माल, ईंधन, विनिर्माण उत्पादों और अन्य थोक स्तर की वस्तुओं की कीमतों को शामिल किया जाता है। जब थोक कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो इसका असर आगे चलकर खुदरा बाजार पर भी पड़ सकता है।
सरकार के अनुसार, जून में महंगाई बढ़ने के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव एक प्रमुख कारण रहा। ऊर्जा की कीमतों में बदलाव का असर भी कई क्षेत्रों पर पड़ा। कच्चे तेल, धातुओं और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों में होने वाली वृद्धि घरेलू बाजार में लागत बढ़ा सकती है।
वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि सरकार लगातार वैश्विक परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का घरेलू कीमतों पर असर पड़ता है, इसलिए सरकार समय-समय पर आवश्यक कदम उठाती है।
महंगाई पर नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों में खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी शामिल है। इसके लिए आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण किया जाता है, ताकि बाजार में अचानक कमी न हो और कीमतों पर दबाव कम किया जा सके।
इसके अलावा, सरकार विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करती है। जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर कीमतों को स्थिर रखने के प्रयास किए जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और कच्चे माल की कीमतों में बदलाव का असर भारत जैसे बड़े आयातक देश पर पड़ता है। उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियों पर दबाव बढ़ता है, जिसका प्रभाव वस्तुओं की कीमतों में दिखाई दे सकता है।
हालांकि, सरकार का कहना है कि वह महंगाई के प्रभाव को सीमित रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वित्त मंत्रालय और अन्य संबंधित विभाग कीमतों की स्थिति की समीक्षा करते रहते हैं और जरूरत के अनुसार नीतिगत कदम उठाए जाते हैं।
लोकसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी ऐसे समय आई है जब आम उपभोक्ता रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों को लेकर चिंता जता रहे हैं। खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य जरूरी सामान की कीमतों में बदलाव का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है।
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि महंगाई को नियंत्रित करना उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता, मजबूत आपूर्ति व्यवस्था और बाजार निगरानी के माध्यम से कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश जारी रहेगी।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में महंगाई की दिशा वैश्विक बाजार की स्थिति, ऊर्जा कीमतों और घरेलू आपूर्ति व्यवस्था पर निर्भर करेगी। सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों का असर आने वाले महीनों में कीमतों की स्थिति पर दिखाई दे सकता है।





