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अच्छी बारिश और सरकारी प्रोत्साहन से बढ़ी चावल उत्पादन की रफ्तार
SHIDDHANT
30 Oct 2025 9:01 PM IST

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Delhi दिल्ली। देश में इस साल चावल उत्पादन में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिल रही है। वरिष्ठ कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी ने कहा है कि अच्छे मानसून और सरकारी प्रोत्साहन नीति (Incentive Structure) ने भारत में धान की खेती को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। उनके अनुसार, इन दो प्रमुख कारणों की वजह से भारत का धान उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की संभावना है, जिससे खाद्य सुरक्षा और निर्यात क्षमता दोनों को मजबूती मिलेगी। गुलाटी ने एक कार्यक्रम में कहा कि 2025 में देश के अधिकांश हिस्सों में समान और समय पर हुई बारिश ने कृषि क्षेत्र, विशेषकर धान उत्पादक राज्यों — पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल — के किसानों को बड़ी राहत दी है। उन्होंने बताया कि इससे न केवल बोआई क्षेत्र बढ़ा है बल्कि उत्पादकता में भी 8–10% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
अर्थशास्त्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) में नियमित वृद्धि, उर्वरक सब्सिडी, और फसल बीमा योजनाओं जैसे उपायों ने किसानों को धान की खेती की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने कहा, “भारत सरकार का इंसेंटिव स्ट्रक्चर किसानों को स्पष्ट संदेश देता है कि चावल उत्पादन देश की खाद्य नीति का प्रमुख स्तंभ बना हुआ है। गुलाटी ने यह भी कहा कि देश में सिंचाई ढांचे में सुधार, ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक के प्रसार, तथा कृषि ऋण सुविधा में वृद्धि ने उत्पादन क्षमता को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पूर्वी भारत के राज्यों में भी धान की दूसरी फसल (Rabi Rice) का रकबा काफी बढ़ा है, जिससे कुल वार्षिक उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ पानी के अत्यधिक उपयोग और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर ध्यान देना आवश्यक है। गुलाटी ने कहा कि चावल उत्पादन के लिए अत्यधिक सिंचाई की जरूरत होती है, जो भूजल स्तर पर दबाव डाल सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को ‘कम पानी में अधिक उत्पादन’ (More Crop per Drop) नीति को और आक्रामक रूप से लागू करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भारत इस समय दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक देशों में है, और अगर मौजूदा स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में भारत का कृषि निर्यात संतुलन और मजबूत होगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थायित्व आएगा। अशोक गुलाटी ने यह भी कहा कि अब जरूरत इस बात की है कि भारत केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि क्वालिटी और वैल्यू एडिशन पर भी ध्यान दे। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले बासमती और ऑर्गेनिक चावल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देने से भारत को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
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