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कूनो नेशनल पार्क में खुशखबरी: भारतीय मूल की चीता ‘गामिनी’ ने 4 शावकों को दिया जन्म
SHIDDHANT
11 April 2026 10:39 PM IST

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Delhi दिल्ली: मध्य प्रदेश में श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यहां 25 माह की भारतीय मूल की चीता गामिनी ने चार शावकों को शनिवार को जन्म दिया है। यह घटना भारत में चीतों के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। इसकी जानकारी खुद वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट शेयर कर साझा की है। दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब वर्ष 2022 में शुरू हुए चीता पुनर्वास कार्यक्रम के बाद किसी चीता ने प्राकृतिक जंगल वातावरण में शावकों को जन्म दिया है। खास बात यह भी है कि किसी भारतीय मूल की मादा चीता द्वारा यह पहली सफल प्रसूति मानी जा रही है, जिससे परियोजना को नई दिशा और मजबूती मिली है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक वर्ष से अधिक समय से यह मादा चीता खुले जंगल में रह रही थी और पूरी तरह प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप ढल चुकी थी। ऐसे में जंगल में शावकों का जन्म होना इस बात का संकेत है कि कूनो का पर्यावरण अब चीतों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है। मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) उत्तम कुमार शर्मा ने इस घटना की पुष्टि करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता परियोजना के उस मुख्य उद्देश्य की पूर्ति की दिशा में बड़ा कदम है, जिसमें चीतों को प्राकृतिक परिस्थितियों में स्थापित करना और उनका प्रजनन सुनिश्चित करना शामिल है।
इस उपलब्धि को लेकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर खुशी जताई है। उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए वन विभाग की टीम और सभी संबंधित कर्मचारियों को बधाई दी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने अपने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि कूनो का एक ऐतिहासिक पल... कूनो नेशनल पार्क में एक ऐतिहासिक पल सामने आया है, जहां 'गामिनी' नाम की 25 महीने की, भारत में जन्मी एक मादा चीता ने जंगल में चार शावकों को जन्म दिया है,जो भारत की चीता संरक्षण यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि है।
एक साल से ज्यादा समय से जंगल में रहने के बाद, 2022 में चीतों को फिर से बसाने की शुरुआत के बाद से जंगल में यह पहला दर्ज जन्म है, और खास बात यह है कि यह भारत में जन्मी किसी मादा चीता से जुड़ा ऐसा पहला मामला है। यह प्रोजेक्ट के मुख्य लक्ष्यों-प्राकृतिक परिस्थितियों में जीवित रहना और प्रजनन करना-को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह उपलब्धि भारतीय परिस्थितियों के प्रति चीतों के बढ़ते तालमेल को दर्शाती है, और कूनो के प्रबंधकों, पशु चिकित्सकों और फील्ड स्टाफ के समर्पण और अथक प्रयासों का एक जीता-जागता प्रमाण है। राष्ट्र के लिए यह एक गर्व का पल है—सभी को हार्दिक बधाई।
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