दिल्ली-एनसीआर

किसानों के लिए खुशखबरी नई तकनीक से बढ़ेगी फसलों की कीमत

Ratna Netam
20 Oct 2026 6:04 PM IST
किसानों के लिए खुशखबरी नई तकनीक से बढ़ेगी फसलों की कीमत
x
नई दिल्ली। भारत में खाद्य प्रसंस्करण यानी फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक तेजी से नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। बदलती जीवनशैली, सुविधाजनक भोजन की बढ़ती मांग और कृषि उत्पादों के बेहतर उपयोग की जरूरत ने इस उद्योग को नई दिशा दी है। अब आधुनिक मशीनों, डिजिटल सिस्टम और वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के साथ उनकी गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। महाराष्ट्र के नासिक से लेकर राजस्थान के कोटा तक उद्यमी नई तकनीकों का उपयोग करके खाद्य उत्पादों को बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहे हैं।फूड प्रोसेसिंग में तकनीक का सबसे बड़ा फायदा फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में देखा जा रहा है। भारत में बड़ी मात्रा में फल, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद उचित भंडारण तथा प्रसंस्करण की कमी के कारण खराब हो जाते हैं। आधुनिक तकनीक इन उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और उन्हें मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने का अवसर प्रदान करती है।
नासिक में ऑटोमेटेड फूड प्रोसेसिंग यूनिट
महाराष्ट्र के नासिक में स्थित 'डिवाइन डेलीकेसी' आधुनिक फूड प्रोसेसिंग तकनीक का उपयोग करके रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों को नए स्वरूप में तैयार कर रही है।यह उद्यम पोहा और स्प्राउट्स यानी अंकुरित अनाज जैसी सामान्य खाद्य सामग्री से रेडी-टू-ईट उत्पाद विकसित कर रहा है। इन उत्पादों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को ऐसा भोजन उपलब्ध कराना है, जिसे कम समय में आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।कंपनी की ऑटोमेटेड यूनिट में उत्पादन से जुड़ी प्रक्रियाओं को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा गया है। इससे उत्पादन की विभिन्न गतिविधियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने और कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
ऑस्मोटिक डिहाइड्रेशन तकनीक का इस्तेमाल
डिवाइन डेलीकेसी अपने खाद्य उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए ऑस्मोटिक डिहाइड्रेशन और सुखाने की तकनीक का उपयोग कर रही है।ऑस्मोटिक डिहाइड्रेशन एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें खाद्य पदार्थों को उपयुक्त सांद्रता वाले घोल में रखकर उनमें मौजूद पानी की मात्रा कम की जाती है। इसके बाद आवश्यकतानुसार सुखाने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।खाद्य पदार्थों में नमी कम होने से सूक्ष्मजीवों की वृद्धि की संभावना घट सकती है, जिससे उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। हालांकि किसी भी उत्पाद की वास्तविक शेल्फ लाइफ उसकी पैकेजिंग, नमी, स्वच्छता, प्रसंस्करण और भंडारण की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
कोटा में मूंगफली आधारित पोषण उत्पादों पर जोर
राजस्थान के कोटा में भी स्थानीय कृषि उत्पादों से पोषण आधारित खाद्य सामग्री तैयार करने की दिशा में उद्यमी काम कर रहे हैं। मूंगफली आधारित न्यूट्रिशन ब्रांड इसका एक उदाहरण है।मूंगफली प्रोटीन, वसा और ऊर्जा का स्रोत है। इससे विभिन्न प्रकार के स्नैक्स, स्प्रेड और अन्य पोषण आधारित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। ऐसी पहल स्थानीय फसलों के लिए नए बाजार विकसित करने में मददगार हो सकती है।
किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार
फूड प्रोसेसिंग तकनीक का एक महत्वपूर्ण लाभ किसानों को भी मिल सकता है। कृषि उत्पादों को केवल कच्चे रूप में बेचने के बजाय उनका प्रसंस्करण करके अधिक मूल्य वाले उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।इससे फसलों की बर्बादी कम करने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और छोटे उद्यमों को प्रोत्साहन देने की संभावनाएं बनती हैं।
सुविधाजनक भोजन की बढ़ रही मांग
तेजी से बदलती जीवनशैली के कारण रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक खाद्य पदार्थों की उपयोगिता बढ़ रही है। नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और यात्रियों के लिए ऐसे उत्पाद सुविधाजनक विकल्प बन सकते हैं।नासिक की डिवाइन डेलीकेसी पोहा, खिचड़ी, उपमा और अन्य तैयार खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराती है। कंपनी के अनुसार, उसका जोर सुविधाजनक भोजन तैयार करने के साथ खाद्य अपशिष्ट कम करने पर भी है।आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण तकनीक कृषि और उद्योग के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है। सही गुणवत्ता नियंत्रण, सुरक्षित पैकेजिंग और वैज्ञानिक भंडारण के साथ यह क्षेत्र खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Next Story