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अमेरिकी अदालत के फैसले पर गौतम अडानी बोले- सच्चाई और न्याय में भरोसा अटूट

नई दिल्ली। अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अपने खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से खारिज किए जाने के अमेरिकी अदालत के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि मुश्किल दौर के बावजूद उनका सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में भरोसा अटूट रहा। अदालत के फैसले के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अडानी ने न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान व्यक्त किया और उन लोगों का आभार जताया, जिन्होंने कठिन समय में भी उन पर और न्याय व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखा।
गौतम अडानी ने अपने संदेश में कहा कि वह अदालत के फैसले का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल दौर में भी सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में उनका विश्वास बना रहा।
न्यायिक प्रक्रिया में भरोसा जताया
गौतम अडानी ने कहा कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं। उन्होंने अपने संदेश में उन सभी लोगों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने इस पूरे मामले के दौरान उन पर भरोसा बनाए रखा।
उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में भी सच्चाई और न्याय में विश्वास बनाए रखना महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, कानून का शासन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान बना रहना चाहिए।
अडानी के बयान को अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद उनकी पहली प्रमुख सार्वजनिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने अपने संदेश में मामले के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करने के बजाय भविष्य की दिशा और अपने विश्वास पर जोर दिया।
देश के लिए काम जारी रखने का संकल्प
अडानी ने कहा कि वह और उनका समूह आगे भी महत्वपूर्ण काम करता रहेगा। उन्होंने देश के विकास में योगदान देने और ऐसी वैल्यू तैयार करने की प्रतिबद्धता जताई, जिसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहे।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल व्यावसायिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के लिए निर्माण करना और अपने से बड़े उद्देश्य के लिए काम करना है। उन्होंने इसे अपने समूह की प्रतिबद्धता बताया।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अडानी ग्रुप पिछले कुछ वर्षों में कई तरह की जांच और आरोपों के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद बढ़ी थी जांच
अडानी ग्रुप पर जांच और सार्वजनिक बहस का एक बड़ा दौर जनवरी 2023 में शुरू हुआ था। उस समय शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी ग्रुप को लेकर कई आरोप लगाए थे।
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद अडानी समूह की कंपनियों के कारोबार, कॉरपोरेट गवर्नेंस और वित्तीय गतिविधियों को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हुई थी। समूह ने उस समय रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को खारिज किया था।
रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप को बाजार में भी काफी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा। इसके बाद समूह से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भारत और विदेशों में नियामकीय और कानूनी स्तर पर भी चर्चा हुई।
हिंडनबर्ग रिसर्च अब बंद
हिंडनबर्ग रिसर्च, जिसने अडानी ग्रुप को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की थी, अब अपना संचालन बंद कर चुकी है। हालांकि, उसकी रिपोर्ट का अडानी समूह पर प्रभाव लंबे समय तक चर्चा में रहा।
रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप ने अपने स्तर पर कई स्पष्टीकरण दिए और आरोपों को खारिज किया। कंपनी समूह ने कहा था कि वह लागू कानूनों और नियमों का पालन करता है।
अमेरिकी मामले पर भी रही नजर
अडानी समूह से जुड़े अमेरिकी कानूनी मामले ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था। इस मामले में गौतम अडानी समेत अन्य लोगों के खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोपों को लेकर कानूनी प्रक्रिया चली।
अब अमेरिकी अदालत द्वारा आरोपों को स्थायी रूप से खारिज किए जाने के फैसले के बाद अडानी ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अदालत के फैसले को स्वीकार करते हुए न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान जताया है।
अडानी के मुताबिक, इस पूरे कठिन दौर में उनके लिए सच्चाई, निष्पक्षता और कानून का शासन महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने उन लोगों के प्रति आभार जताया जिन्होंने इस अवधि में उन पर भरोसा बनाए रखा।
अडानी ग्रुप के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम
अदालत का फैसला अडानी ग्रुप के लिए ऐसे समय में आया है जब समूह ऊर्जा, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, हवाई अड्डे, नवीकरणीय ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है।
गौतम अडानी ने अपने संदेश में भविष्य की योजनाओं पर भी संकेत दिया। उन्होंने कहा कि समूह महत्वपूर्ण काम जारी रखेगा और देश के लिए निर्माण करता रहेगा।
उन्होंने लंबे समय तक टिकने वाली वैल्यू बनाने की बात कही। साथ ही यह भी कहा कि समूह खुद से बड़े उद्देश्य के लिए काम करने की प्रतिबद्धता पर कायम रहेगा।
मुश्किल दौर के बाद आगे की ओर नजर
अडानी ग्रुप के लिए पिछले कुछ साल कई चुनौतियों से भरे रहे हैं। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद समूह की कंपनियों को लेकर बाजार और निवेशकों के बीच व्यापक चर्चा हुई। इसके बाद अलग-अलग कानूनी और नियामकीय मामलों ने भी समूह का ध्यान खींचा।
अब अमेरिकी अदालत के फैसले पर गौतम अडानी की प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि समूह भविष्य की गतिविधियों पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहता है। उन्होंने अपने बयान में आरोपों या विवादों को विस्तार से दोहराने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया और भविष्य के काम पर जोर दिया।
अडानी ने कहा कि वह देश के लिए निर्माण करते रहेंगे और ऐसी वैल्यू बनाने का प्रयास करेंगे जो आने वाली पीढ़ियों तक कायम रहे। उनके मुताबिक, यही उनका कमिटमेंट है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी अदालत का फैसला और गौतम अडानी की प्रतिक्रिया अडानी ग्रुप के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम के रूप में सामने आई है। अब समूह की नजर अपने कारोबार के विस्तार और आगे की परियोजनाओं पर रहेगी।





