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मोबाइल टावरों से RRU चोरी कर विदेश भेजने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 70 लाख की 43 यूनिट बरामद

Kavita2
14 July 2026 5:38 PM IST
मोबाइल टावरों से RRU चोरी कर विदेश भेजने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 70 लाख की 43 यूनिट बरामद
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Delhi दिल्ली: मोबाइल टावरों से रिमोट रेडियो यूनिट्स (RRU) चोरी कर उन्हें नकली दस्तावेजों के जरिए विदेश भेजने वाले एक गिरोह का क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपित चोरी किए गए टेलीकॉम उपकरणों को फर्जी इनवाइस के जरिए एयरलाइन कार्गो से विदेश एक्सपोर्ट कर रहे थे।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान हर्ष विहार निवासी हेमंत गुप्ता, संगम विहार निवासी विकास पासवान, गाजियाबाद निवासी फरीद और मेरठ निवासी शेर मोहम्मद के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, इनके कब्जे से करीब 70 लाख रुपये कीमत की 43 चोरी की गई आरआरयू बरामद की गई हैं।

क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि गिरोह मोबाइल टावरों से चोरी किए गए टेलीकॉम उपकरणों को छिपाने और उनकी पहचान बदलने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था। इसके बाद इन उपकरणों को दूसरे सामान के रूप में दिखाकर विदेश भेजा जाता था।

नकली इनवाइस बनाकर हांगकांग भेजते थे उपकरण

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरोह चोरी किए गए टेलीकॉम इक्विपमेंट को नकली इनवाइस के साथ एक्सपोर्ट करता था। आरोपित आरआरयू को दस्तावेजों में "पावर सप्लाई पाइंट" बताकर गलत जानकारी देते थे।

इसके बाद इन सामानों को एयरलाइन कार्गो के माध्यम से हांगकांग भेजा जाता था। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क के जरिए लंबे समय से चोरी के टेलीकॉम उपकरणों की तस्करी की जा रही थी।

मोबाइल नेटवर्क को नुकसान पहुंचाने की कोशिश

रिमोट रेडियो यूनिट्स मोबाइल टावरों का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। इनका इस्तेमाल मोबाइल नेटवर्क के सिग्नल ट्रांसमिशन में किया जाता है। आरआरयू चोरी होने से मोबाइल टावरों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और नेटवर्क सेवाओं में परेशानी आ सकती है।

टेलीकॉम कंपनियों को ऐसे मामलों से आर्थिक नुकसान के साथ-साथ नेटवर्क संचालन में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से पुलिस इस तरह की चोरी को गंभीरता से ले रही है।

जांच के दौरान सामने आया गिरोह

क्राइम ब्रांच को टेलीकॉम उपकरणों की चोरी और उनके अवैध निर्यात से जुड़े इनपुट मिले थे। इसके बाद टीम ने जांच शुरू की और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कुछ लोग चोरी किए गए आरआरयू को इकट्ठा कर रहे हैं और उन्हें विदेश भेजने की तैयारी में हैं। इसके बाद कार्रवाई करते हुए चारों आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।

बरामद उपकरणों की जांच जारी

पुलिस ने आरोपितों के पास से बरामद 43 आरआरयू को जब्त कर लिया है। इनकी जांच की जा रही है कि ये किस-किस मोबाइल टावर से चोरी की गई थीं।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह ने अब तक कितने उपकरण चोरी किए और कितनी खेप विदेश भेजी गई। इसके अलावा हांगकांग में मौजूद इनके संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

नेटवर्क में और लोगों के शामिल होने की आशंका

पुलिस को शक है कि इस गिरोह का नेटवर्क बड़ा हो सकता है और इसमें अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। क्राइम ब्रांच गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और चोरी के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि चोरी किए गए उपकरणों को खरीदने वाले लोग कौन हैं और क्या विदेश में भी इस नेटवर्क से जुड़े लोग सक्रिय हैं।

टेलीकॉम सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

मोबाइल टावरों से उपकरण चोरी के मामले टेलीकॉम कंपनियों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे मामलों में न केवल कंपनियों को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी नेटवर्क संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि टेलीकॉम उपकरणों की चोरी और अवैध बिक्री रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

फिलहाल क्राइम ब्रांच ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

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