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फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से दाखिले का खेल, 9 आरोपी गिरफ्तार
Ashish verma
8 Oct 2026 10:02 PM IST

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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र तैयार कराकर कॉलेजों में दाखिला दिलाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्रवाई करते हुए नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में शिक्षा सलाहकार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालयों से जुड़े कर्मचारी और दिव्यांगता प्रमाणन बोर्ड का एक सदस्य भी शामिल है। आरोपियों के कब्जे से 27 कथित फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, नकदी और एक लग्जरी कार बरामद की गई है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पैसे लेकर छात्रों के लिए दिव्यांग प्रमाणपत्र तैयार कराता था, ताकि उन्हें दिव्यांगजन कोटे के तहत विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिला मिल सके।
कॉलेजों में दाखिला दिलाने के नाम पर चल रहा था खेल
दिल्ली पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य जेबीटी, बीटेक और अन्य स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला दिलाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र उपलब्ध कराते थे। इसके बदले छात्रों से 20 हजार से 30 हजार रुपये तक लिए जाते थे।
पुलिस को इस गिरोह के संबंध में सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति पैसे लेकर छात्रों को दिव्यांगजन श्रेणी में दाखिला दिलाने का काम कर रहा है। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।जांच के दौरान सामने आया कि इस नेटवर्क में शिक्षा सलाहकारों के साथ सरकारी स्वास्थ्य कार्यालयों से जुड़े कर्मचारियों की भी कथित मिलीभगत थी।
31 अगस्त को पकड़ा गया पहला आरोपी
पुलिस ने 31 अगस्त 2026 को इस मामले में पहली बड़ी कार्रवाई की। अलीगढ़ निवासी ललित कुमार उर्फ आदित्य को पकड़ा गया, जो वर्तमान में फरीदाबाद में रह रहा था।पुलिस के अनुसार, उसके पास से 16 दिव्यांग प्रमाणपत्र बरामद हुए। ये प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश के बदायूं, बरेली और सिद्धार्थनगर के सरकारी अस्पतालों से जारी किए गए दिखाए गए थे।
इनमें सुनने की क्षमता में कमी, चलने-फिरने संबंधी दिव्यांगता और कम दृष्टि से संबंधित प्रमाणपत्र शामिल थे। पुलिस ने उसके कब्जे से तीन मोबाइल फोन और एक लैपटॉप भी जब्त किया।इस मामले में दिल्ली के मौरिस नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
नोएडा के शिक्षा सलाहकार की भूमिका सामने आई
ललित से पूछताछ के दौरान पुलिस को नोएडा के एक शिक्षा सलाहकार रोशन कुमार की भूमिका की जानकारी मिली।रोशन कुमार नोएडा के सेक्टर-18 में कंसल्टेंसी संचालित करता था। पुलिस के अनुसार, वह छात्रों के आधार कार्ड, फोटो, हस्ताक्षर और ओटीपी जैसी जानकारी एकत्र करता था।
आरोप है कि यह जानकारी ललित को भेजी जाती थी, जिसके माध्यम से दिव्यांग प्रमाणपत्र तैयार कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती थी।पुलिस ने रोशन कुमार को 1 सितंबर को पकड़ लिया। जांच में दोनों के बीच संपर्क और कथित लेनदेन की पड़ताल की गई।
AI टूल से आधार कार्ड के पते बदलने का आरोप
पुलिस जांच में गिरोह द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आधारित उपकरणों के कथित दुरुपयोग की जानकारी भी सामने आई है।आरोप है कि छात्रों के आधार कार्ड में दर्ज पते को बदलकर उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर, बदायूं, बरेली और गोरखपुर जैसे जिलों का पता दिखाया जाता था।
इसके बाद संबंधित विवरण दिव्यांगजन पहचान पत्र से जुड़े यूडीआईडी पोर्टल पर आवेदन के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया में गिरोह से जुड़े कुछ लोगों ने सरकारी कार्यालयों के भीतर अपने संपर्कों का कथित तौर पर इस्तेमाल किया।
बरेली CMO कार्यालय का कर्मचारी गिरफ्तार
जांच आगे बढ़ने पर दिल्ली पुलिस ने 3 सितंबर को बरेली सीएमओ कार्यालय के दिव्यांगजन कार्यालय में कार्यरत संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर कुलदीप को गिरफ्तार किया।पुलिस के अनुसार, कुलदीप पर कथित फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने और उन्हें पोर्टल पर अपलोड करने में भूमिका निभाने का आरोप है।उसके पास से मोबाइल फोन और एक डेस्कटॉप कंप्यूटर जब्त किया गया। जांच एजेंसी ने इन उपकरणों को मामले से संबंधित साक्ष्य के तौर पर अपने कब्जे में लिया।
इसके अलावा पुलिस ने शेर सिंह सोलंकी और बरेली के दिव्यांगता प्रमाणन बोर्ड के सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत सक्सेना को भी पकड़ा।पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान आरोपियों के बीच वित्तीय लेनदेन के साक्ष्य सामने आए हैं।
सिद्धार्थनगर और देवरिया तक पहुंची जांच
पुलिस की कार्रवाई केवल बरेली तक सीमित नहीं रही। जांच के दौरान उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों में भी आरोपियों के संपर्क सामने आए।10 सितंबर को सिद्धार्थनगर सीएमओ कार्यालय के दिव्यांगजन अनुभाग में तैनात वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जयप्रकाश शुक्ला को गिरफ्तार किया गया।पुलिस का आरोप है कि उसने अपने पद का दुरुपयोग करके रुपये के बदले सिद्धार्थनगर के पते वाले दिव्यांग प्रमाणपत्र तैयार कराने में मदद की।
इसके अलावा देवरिया सीएमओ कार्यालय में कनिष्ठ सहायक धीरेंद्र कुमार पांडेय को 18 सितंबर को पकड़ा गया।आरोप है कि वह कथित फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करके एक सहयोगी को पांच हजार रुपये प्रति प्रमाणपत्र के हिसाब से उपलब्ध कराता था।
27 प्रमाणपत्र और लग्जरी कार बरामद
जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से महत्वपूर्ण सामान बरामद करने की जानकारी दी है।पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से कुल 27 कथित फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बरामद हुए हैं।
इसके अलावा एक लैपटॉप, एक मैकबुक, एक डेस्कटॉप कंप्यूटर, 11 मोबाइल फोन, 75 हजार रुपये नकद और एक मर्सिडीज कार भी जब्त की गई है।मोबाइल फोन में प्रमाणपत्रों से संबंधित बातचीत मिलने का दावा किया गया है। पुलिस इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है।
गोरखपुर के एक अन्य आरोपी की तलाश
पुलिस ने बताया कि गोरखपुर निवासी चंदन सिंह यादव की तलाश की जा रही है।जांच एजेंसी के अनुसार, उसके उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और देवरिया स्थित सरकारी अस्पतालों में कथित संपर्क होने की जानकारी मिली है।
इसके अलावा पुलिस उन चिकित्सकों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है, जो संबंधित अस्पतालों में तैनात थे।जिन छात्रों के नाम पर प्रमाणपत्र जारी हुए, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है।
दिव्यांगजन कोटे के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल
इस मामले ने शिक्षण संस्थानों में दिव्यांगजन कोटे के तहत प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
दिव्यांगजन आरक्षण का उद्देश्य पात्र विद्यार्थियों को शिक्षा में समान अवसर उपलब्ध कराना है। यदि कोई व्यक्ति फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर इस सुविधा का लाभ उठाता है, तो इससे वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
फिलहाल दिल्ली पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के बीच संपर्क, वित्तीय लेनदेन और कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल की जांच कर रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के माध्यम से कितने छात्रों ने दाखिला लेने का प्रयास किया और किन मामलों में प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल हुआ।
इस मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य संदिग्धों की तलाश और संबंधित दस्तावेजों की जांच जारी है। आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
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