- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- सोशल मीडिया बैन से...
सोशल मीडिया बैन से जंतर-मंतर तक, CJP आंदोलन की पूरी कहानी

दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन कुछ ही महीनों में सोशल मीडिया की चर्चा से निकलकर देश के बड़े छात्र-युवा आंदोलनों में शामिल हो गया। NEET पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ यह अभियान सोशल मीडिया विवाद, धरना, भूख हड़ताल और संसद मार्च जैसे कई चरणों से गुजरा। आखिरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और सरकार की ओर से कुछ मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद CJP ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।
CJP का गठन 16 मई 2026 को उस समय हुआ, जब अभिजीत दीपके की बेरोजगार युवाओं पर की गई टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी नाम से एक अभियान शुरू किया गया, जिसने देखते ही देखते सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन हासिल कर लिया। कुछ ही दिनों में इसके लाखों फॉलोअर्स हो गए और यह युवाओं के बीच चर्चा का विषय बन गया।
हालांकि, आंदोलन की राह आसान नहीं रही। 21 मई को राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए CJP का एक्स अकाउंट निलंबित कर दिया गया। इसके बाद संगठन ने कानूनी लड़ाई लड़ी और हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सोशल मीडिया अकाउंट दोबारा बहाल किया गया। इस घटना के बाद CJP ने ऑनलाइन अभियान के साथ-साथ जमीन पर आंदोलन तेज करने का फैसला किया।
1 जून को अभिजीत दीपके के अमेरिका से भारत लौटने के बाद दिल्ली में जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया। इसके बाद 2 जून को घोषणा की गई कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़ेंगे। 6 जून को CJP ने पुलिस अनुमति के साथ एक दिवसीय धरना आयोजित किया, जिसमें NEET पेपर लीक मामले की जांच और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई गई।
इसके बाद आंदोलन ने बड़ा रूप लिया। 20 जून को जंतर-मंतर पर छात्र और CJP समर्थक अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। आंदोलनकारियों का कहना था कि NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में गड़बड़ी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
28 जून को सोनम वांगचुक ने भी CJP की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की। उनके जुड़ने से आंदोलन को और व्यापक समर्थन मिला। बड़ी संख्या में छात्र और युवा जंतर-मंतर पहुंचने लगे।
जुलाई में आंदोलन और तेज हो गया। 9 जुलाई को CJP ने संसद मार्च का ऐलान किया। 18 जुलाई को सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई। इसके बाद मामला और चर्चा में आ गया।
20 जुलाई को CJP ने संसद मार्च निकाला, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए। इसी दिन भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और CJP प्रतिनिधियों के बीच पहली औपचारिक बातचीत भी हुई, लेकिन संगठन ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया।
21 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट की अनुमति के बाद सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। 23 जुलाई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने 26 दिन लंबी भूख हड़ताल समाप्त की।
24 जुलाई को CJP और सरकार के बीच वीपी हाउस कांस्टीट्यूशन क्लब में बातचीत हुई। इसमें सरकार ने संगठन की तीन प्रमुख मांगों में से दो पर सकारात्मक आश्वासन दिया, जबकि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर समय मांगा गया।
25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद CJP ने इसे आंदोलन की बड़ी सफलता बताया। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद संगठन ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।
CJP आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसकी शुरुआत सोशल मीडिया अभियान से हुई, लेकिन बाद में यह सड़क पर उतरकर बड़े जनआंदोलन में बदल गया। संगठन ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा पारदर्शिता और युवाओं से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखते हुए अपनी आवाज उठाई। आंदोलन के दौरान विरोध के नए तरीके, रचनात्मक प्रदर्शन और युवाओं की भागीदारी ने इसे चर्चा में बनाए रखा। हालांकि आंदोलन समाप्त हो गया है, लेकिन CJP ने शिक्षा और रोजगार से जुड़े अन्य मुद्दों पर आगे भी सक्रिय रहने का संकेत दिया है।





