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हावड़ा चेन्नई रेल रूट से बिहार हाईवे तक मोदी कैबिनेट ने लिए बड़े फैसले

Ratna Netam
19 Aug 2026 5:11 PM IST
हावड़ा चेन्नई रेल रूट से बिहार हाईवे तक मोदी कैबिनेट ने लिए बड़े फैसले
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दिल्ली : देश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में रेलवे और सड़क क्षेत्र से जुड़ी पांच बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं पर कुल ₹13,041 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य देश में रेल और सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करना, माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाना और यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के तहत चार रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं और बिहार में एक बड़े फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है। इनमें रेलवे परियोजनाओं पर करीब ₹9,450 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि बिहार की सड़क परियोजना के लिए ₹3,591 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से देश के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर पर ट्रैफिक दबाव कम होगा। साथ ही यात्रियों के लिए ट्रेन संचालन बेहतर होगा और उद्योगों व व्यापार को भी फायदा मिलेगा। खासतौर पर मालगाड़ियों की रफ्तार और क्षमता बढ़ाने पर सरकार का विशेष ध्यान है।
रेलवे परियोजनाओं में हावड़ा-चेन्नई रेल मार्ग से जुड़े कई महत्वपूर्ण हिस्सों को मजबूत किया जाएगा। इस व्यस्त रेल कॉरिडोर पर अतिरिक्त लाइनें बिछाने से ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और संचालन को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी। यह रूट देश के प्रमुख रेल मार्गों में शामिल है, जहां यात्री और माल दोनों का दबाव काफी अधिक रहता है।
कैबिनेट ने खड़गपुर-भद्रक चौथी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹3,352 करोड़ रुपये है। इसके अलावा भद्रक-हरिदासपुर चौथी रेल लाइन के लिए ₹1,583 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इन परियोजनाओं से पूर्वी भारत में रेल कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
इसके अलावा गुम्मिडिपुंडी-गुडूर रेल सेक्शन में तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण को भी मंजूरी मिली है। इस परियोजना पर लगभग ₹2,229 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं, कटक-पारादीप रेल मार्ग पर तीसरी और चौथी लाइन विकसित करने के लिए ₹2,286 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
रेलवे के इन विस्तार कार्यों का लाभ कई राज्यों को मिलेगा। इससे ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी और औद्योगिक क्षेत्रों तक माल पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी। रेलवे का मानना है कि मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं भविष्य में बढ़ती यात्री और माल परिवहन जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगी।
कैबिनेट के फैसले में बिहार के लिए भी बड़ी सौगात दी गई है। मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा फोर-लेन हाईवे परियोजना को मंजूरी दी गई है। यह सड़क नेपाल सीमा के पास तक कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। इस परियोजना से उत्तर बिहार में आवागमन आसान होने के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि बेहतर सड़क और रेल नेटवर्क किसी भी देश की आर्थिक प्रगति की रीढ़ होते हैं। मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से उद्योगों को फायदा मिलता है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और लोगों की यात्रा आसान होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रेलवे में नई लाइनों और मल्टी-ट्रैकिंग से ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार हो सकता है। वहीं, सड़क परियोजनाओं से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को बड़े बाजारों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से रेलवे और हाईवे नेटवर्क के विस्तार पर लगातार जोर दे रही है। वंदे भारत ट्रेन, आधुनिक रेलवे स्टेशन, फ्रेट कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे जैसी योजनाओं के बाद अब इन नई परियोजनाओं को भी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इन परियोजनाओं से निर्माण क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। सड़क और रेलवे निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में श्रमिकों, इंजीनियरों और अन्य तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत होगी।
सरकार का लक्ष्य केवल परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाना नहीं है, बल्कि देश के आर्थिक विकास को तेज करना भी है। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योग, पर्यटन और व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
मोदी कैबिनेट के इस फैसले को देश के परिवहन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यात्रियों और व्यापारिक क्षेत्र दोनों को इसका लाभ मिलने की संभावना है।
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