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15 अक्टूबर से बड़े UPI पेमेंट पर मर्चेंट्स को देना होगा MDR चार्ज, ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर

Kavita2
18 Sept 2026 5:47 PM IST
15 अक्टूबर से बड़े UPI पेमेंट पर मर्चेंट्स को देना होगा MDR चार्ज, ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर
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नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 15 अक्टूबर से कुछ मर्चेंट्स को बड़े मूल्य वाले UPI लेनदेन पर नया चार्ज देना होगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के नियमों के तहत 2,000 रुपये से अधिक के योग्य पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा।

हालांकि, इस बदलाव का सीधा असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। ग्राहक पहले की तरह UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे और उन्हें किसी भी तरह की ट्रांजैक्शन फीस नहीं देनी होगी। यह शुल्क केवल मर्चेंट यानी दुकानदार, कारोबारी या सेवा प्रदाता को देना होगा।

किन UPI भुगतान पर लगेगा चार्ज

नए नियम के अनुसार, यह MDR चार्ज केवल उन UPI भुगतान पर लागू होगा, जो पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) श्रेणी में आते हैं और जिनकी राशि 2,000 रुपये से अधिक है।

इसका मतलब है कि जब कोई ग्राहक किसी दुकान, कारोबारी या सेवा प्रदाता को UPI के माध्यम से बड़ी रकम का भुगतान करेगा, तो उस भुगतान पर मर्चेंट को निर्धारित शुल्क देना पड़ सकता है।

वहीं, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले UPI ट्रांसफर इस चार्ज के दायरे में नहीं आएंगे।

अधिकतम 300 रुपये तक होगा चार्ज

NPCI के नियमों के मुताबिक, MDR की दर 0.4 प्रतिशत तय की गई है। हालांकि, इस चार्ज की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।

यानी बड़ी राशि के भुगतान पर भी मर्चेंट को 300 रुपये से अधिक MDR नहीं देना होगा।

उदाहरण से समझें चार्ज का गणित

यदि कोई मर्चेंट किसी योग्य UPI पेमेंट के माध्यम से 5,000 रुपये प्राप्त करता है, तो 0.4 प्रतिशत MDR के हिसाब से उसे 20 रुपये चार्ज देना होगा।

इसी तरह, अगर भुगतान राशि 50,000 रुपये है, तो MDR की रकम बढ़कर 200 रुपये हो जाएगी।

वहीं, 75,000 रुपये के ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से 300 रुपये बनते हैं और यहीं से अधिकतम सीमा लागू हो जाएगी। इससे बड़ी राशि के भुगतान पर भी चार्ज 300 रुपये से ज्यादा नहीं होगा।

ग्राहकों पर नहीं आएगा अतिरिक्त बोझ

नए नियमों को लेकर कई ग्राहकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या UPI भुगतान करने पर उन्हें अतिरिक्त शुल्क देना होगा। लेकिन नियमों के अनुसार, ग्राहक से किसी तरह की ट्रांजैक्शन फीस नहीं ली जाएगी।

UPI के जरिए भुगतान करने वाले उपयोगकर्ता पहले की तरह ही बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे।

कार्ड पेमेंट के मुकाबले अभी भी सस्ता

जानकारों के अनुसार, MDR लागू होने के बाद भी UPI भुगतान कई कार्ड आधारित भुगतान विकल्पों की तुलना में कम लागत वाला बना रहेगा।

क्रेडिट और डेबिट कार्ड भुगतान में मर्चेंट्स को कई बार अधिक शुल्क देना पड़ता है। ऐसे में UPI अब भी छोटे और बड़े कारोबारियों के लिए एक किफायती डिजिटल भुगतान माध्यम बना रहेगा।

डिजिटल भुगतान व्यवस्था में बदलाव

UPI भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारी तक बड़ी संख्या में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

हालांकि, भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए समय-समय पर नियमों में बदलाव किए जाते हैं। MDR से जुड़ा यह बदलाव भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

मर्चेंट्स को करना होगा ध्यान

नए नियम लागू होने के बाद मर्चेंट्स को अपने भुगतान सिस्टम और लागत व्यवस्था को ध्यान में रखना होगा। बड़े मूल्य वाले UPI लेनदेन करने वाले कारोबारियों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

वहीं, छोटे दुकानदार जो 2,000 रुपये से कम के अधिकतर लेनदेन करते हैं, उन पर इस बदलाव का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

15 अक्टूबर से लागू होने वाले इस नियम के बाद UPI भुगतान व्यवस्था में एक नया शुल्क ढांचा जुड़ जाएगा। हालांकि, ग्राहकों के लिए UPI की सुविधा और बिना शुल्क भुगतान की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।

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