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विदेशी फंडिंग से दुष्प्रचार तक, कैसे चलता है प्रोपेगैंडा नेटवर्क

Saba Naaz
25 July 2026 6:16 PM IST
विदेशी फंडिंग से दुष्प्रचार तक, कैसे चलता है प्रोपेगैंडा नेटवर्क
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नई दिल्ली। भारत की आंतरिक सुरक्षा और वैश्विक छवि को प्रभावित करने के लिए विदेशों में बैठे कुछ नेटवर्कों की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं। खुफिया इनपुट के अनुसार, कुछ विदेशी एजेंसियां, संगठन और उनसे जुड़े नेटवर्क फंडिंग, दुष्प्रचार, साइबर गतिविधियों और सूचना युद्ध जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर भारत से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक समय में किसी देश को कमजोर करने के लिए केवल सैन्य ताकत का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, आर्थिक दबाव और गलत सूचनाओं के जरिए भी प्रभाव डालने की कोशिश की जाती है। ऐसे अभियानों का उद्देश्य समाज में भ्रम फैलाना, संस्थाओं पर भरोसा कम करना और देश की सामाजिक एकता को प्रभावित करना हो सकता है।

इन नेटवर्कों के काम करने का तरीका कई स्तरों पर बताया जाता है। सबसे पहले विदेशी स्रोतों से फंडिंग और संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके बाद स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले लोगों, संगठनों, समूहों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। तीसरे चरण में इंटरनेट मीडिया, वेबसाइटों और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए किसी मुद्दे को एक खास नजरिए से पेश करने की कोशिश की जाती है।

दुष्प्रचार यानी गलत या भ्रामक जानकारी फैलाना ऐसे अभियानों का एक प्रमुख हिस्सा माना जाता है। सोशल मीडिया के दौर में फर्जी खबरें, एडिट किए गए वीडियो और भ्रामक दावे तेजी से फैल सकते हैं। इससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और सामाजिक तनाव बढ़ने की संभावना रहती है।

खुफिया इनपुट में यह भी बताया गया है कि कुछ विदेशी नेटवर्क साइबर गतिविधियों के जरिए भी दबाव बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इनमें सरकारी संस्थानों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और डिजिटल सिस्टम को निशाना बनाने वाले साइबर हमले शामिल हो सकते हैं। हालांकि, किसी भी गतिविधि की पुष्टि जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही की जाती है।

सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, सूचना युद्ध आज वैश्विक राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। कई देश अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैरेटिव बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में किसी भी देश के लिए जरूरी हो जाता है कि वह गलत सूचनाओं की पहचान करे और लोगों में डिजिटल जागरूकता बढ़ाए।

भारत के खिलाफ कथित प्रोपेगैंडा गतिविधियों में कई तरह के माध्यमों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आती रही है। इनमें विदेशी फंडिंग नेटवर्क, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, कुछ संगठन और साइबर समूह शामिल बताए जाते हैं। इनका लक्ष्य भारत की नीतियों, सामाजिक मुद्दों और अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित करने का प्रयास करना हो सकता है।

ऐसे अभियानों से राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जाती है। गलत सूचनाओं के कारण समाज में विभाजन पैदा हो सकता है और लोगों के बीच अविश्वास बढ़ सकता है।

भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों पर नजर रखने के लिए लगातार निगरानी तंत्र को मजबूत कर रही हैं। साइबर सुरक्षा को बढ़ावा देने, फेक न्यूज की पहचान करने और डिजिटल साक्षरता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रोपेगैंडा अभियान से निपटने के लिए केवल सुरक्षा उपाय ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आम नागरिकों की जागरूकता भी बेहद जरूरी है। सोशल मीडिया पर आने वाली हर जानकारी को बिना जांचे साझा करने से बचना चाहिए और विश्वसनीय स्रोतों से ही खबरों की पुष्टि करनी चाहिए।

आज के समय में सूचना भी एक शक्ति बन चुकी है। ऐसे में भारत सहित दुनिया के सभी देशों के सामने चुनौती है कि वे अपनी सुरक्षा, सामाजिक एकता और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत बनाए रखें। विदेशी प्रभाव और दुष्प्रचार से निपटने के लिए तकनीकी क्षमता, जागरूकता और मजबूत संस्थागत व्यवस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

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