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UNSC में भारत की दावेदारी को बड़ी ताकत चार यूरोपीय देशों ने किया स्थायी सदस्यता का समर्थन

Kavita2
22 Sept 2026 9:53 AM IST
UNSC में भारत की दावेदारी को बड़ी ताकत चार यूरोपीय देशों ने किया स्थायी सदस्यता का समर्थन
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नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता की भारत की लंबे समय से चली आ रही मांग को नया कूटनीतिक समर्थन मिला है। मध्य यूरोप के चार देशों हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य ने भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाए जाने का सामूहिक रूप से समर्थन किया है। ये चारों देश विसेग्राड समूह यानी V4 के सदस्य हैं। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान हुई पहली V4-भारत विदेश मंत्रियों की बैठक में यह समर्थन सामने आया।

बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल हुए। स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने बैठक के बाद कहा कि V4 देश इस बात पर सहमत हैं कि ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण देश और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की उभरती शक्ति के रूप में भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के तौर पर स्थान मिलना चाहिए। जयशंकर ने इस बैठक को ऐतिहासिक अवसर बताया।

V4 में हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य शामिल हैं। इन देशों के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की भारत की मांग को एक और क्षेत्रीय समूह का साथ मिला है। बैठक में केवल UNSC सुधार ही नहीं, बल्कि भारत और V4 देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा, अंतरिक्ष, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। विदेश मंत्रियों ने नियमित रूप से बैठक करने और वार्षिक बिजनेस फोरम की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई।

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में सुधार की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों को दर्शाती है और आज की वैश्विक राजनीतिक, आर्थिक तथा जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करती। भारत ने अप्रैल 2026 में संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि 80 साल से अधिक पुरानी संरचना वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं की जरूरतों को पूरा नहीं करती।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन हैं, जबकि बाकी 10 सदस्य संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। केवल पांच स्थायी सदस्यों के पास वीटो अधिकार है, जिसके जरिए वे सुरक्षा परिषद के किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को रोक सकते हैं।

भारत अब तक आठ बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है। उसका सबसे हालिया कार्यकाल 2021-22 में था। भारत अपनी विशाल आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में योगदान और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बढ़ती भूमिका को स्थायी सदस्यता की दावेदारी के महत्वपूर्ण आधारों में रखता है।

भारत अकेले सुरक्षा परिषद में विस्तार की मांग नहीं कर रहा है। वह ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ G4 समूह का हिस्सा है। चारों देश एक-दूसरे की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करते हैं और सुरक्षा परिषद के विस्तार की मांग करते रहे हैं। G4 ने सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में प्रतिनिधित्व बढ़ाने की वकालत की है।

भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन से भी विभिन्न अवसरों पर समर्थन मिला है। हालांकि सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में चीन ने भारत की स्थायी सदस्यता को स्पष्ट समर्थन नहीं दिया है। इसके साथ ही परिषद के विस्तार, नए स्थायी सदस्यों की संख्या और उन्हें वीटो अधिकार देने जैसे मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों में अभी सर्वसम्मति नहीं बनी है।

वीटो अधिकार भी सुरक्षा परिषद में सुधार से जुड़ा बड़ा सवाल है। भारत का रुख रहा है कि अगर सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्य जोड़े जाते हैं तो उनके अधिकार मौजूदा स्थायी सदस्यों से अलग नहीं होने चाहिए। अप्रैल 2026 में संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा कि स्थायी सदस्यों की ऐसी अलग श्रेणी नहीं बनाई जानी चाहिए जिसमें कुछ सदस्यों के पास वीटो हो और नए स्थायी सदस्यों के पास यह अधिकार न हो।

हालांकि चार यूरोपीय देशों का समर्थन मिलने का अर्थ यह नहीं है कि भारत को तत्काल स्थायी सदस्यता या वीटो अधिकार मिल जाएगा। सुरक्षा परिषद में बदलाव के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन की आवश्यकता होगी। इसके लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति के साथ मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों की भूमिका भी निर्णायक है। सुरक्षा परिषद के विस्तार को लेकर अलग-अलग देशों और समूहों के अपने प्रस्ताव हैं, इसलिए सुधार प्रक्रिया लंबे समय से बातचीत के स्तर पर बनी हुई है।

V4 देशों का समर्थन इस मायने में महत्वपूर्ण है कि भारत की मांग को एक साथ चार मध्य यूरोपीय देशों का समर्थन मिला है। इसके साथ भारत और V4 देशों ने अपने संबंधों को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। जयशंकर ने कहा कि भारत के यूरोपीय संघ के साथ संबंध गहरे हो रहे हैं और V4 देशों के साथ भी विशेष पहल की जाएगी।

भारत ने जुलाई 2026 में 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए अपना अभियान भी शुरू किया है। दूसरी ओर उसकी दीर्घकालिक प्राथमिकता सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार और स्थायी सदस्यता बनी हुई है। अब हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य के सामूहिक समर्थन से इस मांग को नया कूटनीतिक बल मिला है, लेकिन अंतिम बदलाव संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच व्यापक समझौते और चार्टर संशोधन की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

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