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पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन, 1984 दंगा मामले में काट रहे थे उम्रकैद

नई दिल्ली। 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां अस्पताल सूत्रों के अनुसार उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल की ओर से उनकी मौत के कारण की तत्काल कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
सज्जन कुमार लंबे समय से 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े कानूनी मामलों का सामना कर रहे थे। दोषसिद्धि के बाद वह तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। उनके निधन के साथ ही दिल्ली की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले एक ऐसे नेता का राजनीतिक और कानूनी सफर समाप्त हो गया, जिसकी पहचान बाद के वर्षों में 1984 की हिंसा से जुड़े मुकदमों के कारण भी होती रही।
Sajjan Kumar, former Member of Parliament and leader of the Indian National Congress, is no more. He was brought dead to Delhi's Safdarjung Hospital: Hospital sources
— ANI (@ANI) August 20, 2026
ANI File Photo pic.twitter.com/BvYJR9PXcT
तिहाड़ जेल में काट रहे थे उम्रकैद
सज्जन कुमार को 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया था। दिल्ली की एक अदालत ने फरवरी 2025 में उन्हें एक अन्य दंगा मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह मामला 1 नवंबर 1984 को दिल्ली के सरस्वती विहार इलाके में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से जुड़ा था। अदालत ने उन्हें दंगा, हत्या और अन्य संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाया था।
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने दिसंबर 2018 में पालम कॉलोनी में पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाए जाने से जुड़े मामले में सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में अदालत के फैसले के बाद 1984 की हिंसा से जुड़े मामलों में उनकी कानूनी स्थिति और गंभीर हो गई थी।
1984 की हिंसा से जुड़ा रहा नाम
#WATCH | Delhi | Jag Parvesh Kumar (in a kurta), son of the late Congress leader and former MP Sajjan Kumar, arrives at Safdarjung Hospital pic.twitter.com/bb5KBMkqZd
— ANI (@ANI) August 20, 2026
31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख-विरोधी हिंसा भड़क उठी थी। राजधानी में कई सिख परिवारों को हिंसा का सामना करना पड़ा और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। इन घटनाओं की जांच और न्यायिक प्रक्रिया कई दशकों तक चली।
सज्जन कुमार पर भीड़ को उकसाने और हिंसा में भूमिका निभाने के आरोप लगे थे। लंबे समय तक चले मुकदमों के बाद अदालतों में उनके खिलाफ कुछ मामलों में दोषसिद्धि हुई। हालांकि, 1984 की हिंसा से जुड़े सभी मामलों में उनका दोष सिद्ध नहीं हुआ था। जनवरी 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें जनकपुरी और विकासपुरी में हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में बरी कर दिया था। इस मामले में दो सिख नागरिकों की हत्या और एक अन्य व्यक्ति को जिंदा जलाने के आरोपों की जांच हुई थी।
दिल्ली की राजनीति में रहा प्रभाव
सज्जन कुमार का राजनीतिक सफर दिल्ली की राजनीति से शुरू हुआ और वह कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए। उन्होंने बाहरी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और कई बार लोकसभा सदस्य चुने गए। उनके राजनीतिक जीवन के दौरान दिल्ली में उनका प्रभाव काफी मजबूत माना जाता था।
हालांकि, 1984 की हिंसा के बाद उनके राजनीतिक जीवन पर गंभीर सवाल उठते रहे। दंगों से जुड़े मामलों में लंबे समय तक चली जांच और मुकदमों के कारण उनका नाम लगातार सार्वजनिक और राजनीतिक बहस में बना रहा। बाद में दोषसिद्धि के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली।
लंबे समय तक चला न्यायिक संघर्ष
1984 के दंगा मामलों की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि कई मामलों में न्याय मिलने की प्रक्रिया बेहद लंबी चली। घटनाओं के दशकों बाद भी अदालतों में सुनवाई जारी रही। विशेष जांच दलों के गठन और पुराने मामलों की दोबारा जांच के बाद कई मामलों में अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
सज्जन कुमार से जुड़े मामलों में भी अलग-अलग अदालतों में सुनवाई हुई। कुछ मामलों में उन्हें दोषी ठहराया गया, जबकि कुछ में राहत मिली। जनवरी 2026 में जनकपुरी-विकासपुरी हिंसा मामले में उन्हें बरी किए जाने के बाद भी वह अन्य मामलों में मिली उम्रकैद की सजा के कारण जेल में थे।
अस्पताल में हुई मौत
गुरुवार को जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद सज्जन कुमार को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, उन्हें वहां मृत अवस्था में लाया गया और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी मृत्यु की सटीक वजह की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद 1984 के दंगा मामलों और उनसे जुड़े न्यायिक घटनाक्रम एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। सज्जन कुमार की राजनीतिक पहचान जहां दिल्ली में कांग्रेस के एक प्रभावशाली नेता के तौर पर रही, वहीं उनके जीवन का अंतिम लंबा दौर 1984 की हिंसा से जुड़े मुकदमों और सजा के बीच बीता।
सज्जन कुमार के निधन के बाद अब उनके खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रियाओं और सजा से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं पर भी संबंधित एजेंसियों को आगे की कार्रवाई करनी होगी। फिलहाल उनके निधन की सूचना के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का इंतजार है।
इस तरह दिल्ली की राजनीति के एक चर्चित चेहरे का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनका राजनीतिक सफर कई दशकों तक कांग्रेस और दिल्ली की सत्ता की राजनीति से जुड़ा रहा, लेकिन 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मामलों ने उनके सार्वजनिक जीवन पर गहरी छाप छोड़ी। अदालतों में चले लंबे कानूनी संघर्ष के बाद वह उम्रकैद की सजा काट रहे थे और इसी दौरान गुरुवार को उनका निधन हो गया।





