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वोटर लिस्ट विवाद में पूर्व CEC कुरैशी की एंट्री चुनाव आयोग पर साधा निशाना

Ratna Netam
6 Sept 2026 3:00 PM IST
वोटर लिस्ट विवाद में पूर्व CEC कुरैशी की एंट्री चुनाव आयोग पर साधा निशाना
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नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश में जारी बहस के बीच पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) **एसवाई कुरैशी** ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया का फोकस नए मतदाताओं को जोड़ने की बजाय बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाने पर दिखाई दे रहा है।
एसवाई कुरैशी ने कहा कि लोकतंत्र में मतदान करना हर योग्य नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में लोग मतदाता सूची से बाहर हो जाते हैं तो यह चिंता का विषय है।
करोड़ों लोगों को सूची से बाहर कर दिया गया’
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि इस पूरी कवायद का ध्यान इस बात पर ज्यादा है कि कितने लोगों के नाम हटाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पहले चुनावी प्रक्रिया में यह कोशिश रहती थी कि छोटी-मोटी गलतियों के कारण कोई वास्तविक मतदाता सूची से बाहर न हो जाए। लेकिन अब स्थिति अलग नजर आ रही है।
कुरैशी के बयान के अनुसार, बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कितने लोगों के नाम हटाए गए और उसके पीछे क्या कारण रहे।
SIR को लेकर क्यों छिड़ी बहस
SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलतियों को सुधारना बताया जाता है। चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची की समीक्षा करता है ताकि मृत लोगों, स्थान बदल चुके मतदाताओं और गलत प्रविष्टियों को हटाया जा सके।
हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और कुछ पूर्व चुनाव अधिकारियों ने चिंता जताई है कि कहीं इसके कारण वास्तविक मतदाता अपने अधिकार से वंचित न हो जाएं।
‘कितने विदेशी नागरिक मिले, यह बताना चाहिए’
कुरैशी ने अवैध प्रवासियों की पहचान के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर SIR का एक उद्देश्य अवैध मतदाताओं की पहचान करना है तो चुनाव आयोग को यह आंकड़ा सार्वजनिक करना चाहिए कि वास्तव में कितने ऐसे लोग मिले।
उन्होंने सवाल किया कि अगर कुछ संदिग्ध मामलों की पहचान के लिए करोड़ों लोगों को प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, तो इसका पूरा हिसाब देश के सामने रखा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठे सवाल
एसवाई कुरैशी 2010 से 2012 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे। ([Election Commission of India Hindi][2]) अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर लोगों का भरोसा लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। इसलिए मतदाता सूची से जुड़े किसी भी बदलाव में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि इस प्रक्रिया से गरीब, बुजुर्ग और कमजोर वर्ग के मतदाताओं को परेशानी हो सकती है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में सुधार के नाम पर किसी भी योग्य नागरिक का नाम नहीं हटना चाहिए।
वहीं चुनाव आयोग की ओर से लगातार कहा जाता रहा है कि मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाने के लिए पुनरीक्षण जरूरी है।
लोकतंत्र में वोटर लिस्ट का महत्व
मतदाता सूची किसी भी चुनावी प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। इसमें सही नाम शामिल होना और गलत नाम हटाना दोनों जरूरी हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पूर्व CEC कुरैशी के बयान के बाद एक बार फिर SIR को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक बहस तेज हो गई है। अब नजर इस बात पर होगी कि चुनाव आयोग इन आरोपों और सवालों पर क्या जवाब देता है।
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