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नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आशंका जताई है कि ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी जानकारी पाकिस्तान की ओर से अमेरिका तक पहुंचाई गई होगी। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम को लेकर हुई बातचीत द्विपक्षीय थी और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी।
पूर्व CDS अनिल चौहान ने इस बात पर हैरानी जताई कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते या संघर्ष विराम की जानकारी सबसे पहले अमेरिका की ओर से कैसे सामने आई। उन्होंने कहा कि जब बातचीत दोनों देशों के बीच हो रही थी तो किसी तीसरे देश द्वारा इसकी घोषणा किया जाना कई सवाल खड़े करता है।
जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की ओर से आतंकवाद के खिलाफ की गई एक महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाई थी। इस अभियान के दौरान भारतीय सेनाओं ने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया था। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील अभियानों से जुड़ी सूचनाओं की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि सैन्य अभियानों के दौरान सूचनाओं का आदान-प्रदान बेहद सीमित दायरे में होता है। ऐसे में अगर किसी अभियान से जुड़ी जानकारी बाहर जाती है तो यह गंभीर विषय बन जाता है। उन्होंने आशंका जताई कि संभव है कि पाकिस्तान की ओर से यह जानकारी अमेरिका तक पहुंची हो।
पूर्व CDS ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम को लेकर कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी और यह बातचीत पूरी तरह द्विपक्षीय प्रक्रिया का हिस्सा थी। इसमें किसी अन्य देश की मध्यस्थता या हस्तक्षेप नहीं था। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से यह स्पष्ट करता रहा है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी मुद्दे पर बातचीत द्विपक्षीय स्तर पर ही होगी।
उन्होंने अमेरिका द्वारा सबसे पहले संघर्ष विराम की घोषणा किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह समझना जरूरी है कि जानकारी वहां तक कैसे पहुंची। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में घटनाक्रम और सूचनाओं के स्रोत को लेकर स्पष्टता जरूरी होती है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। भारतीय पक्ष ने इस अभियान को आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई बताया था। वहीं, पाकिस्तान की ओर से भी कई बयान सामने आए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिशें हुईं।
जनरल अनिल चौहान ने सैन्य रणनीति और सुरक्षा मामलों पर बात करते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध में सूचना और खुफिया जानकारी की भूमिका बेहद अहम हो गई है। किसी भी अभियान की सफलता केवल हथियारों और सैनिक क्षमता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सही समय पर सही जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होता है।
उन्होंने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी सैन्य क्षमता और रणनीतिक तैयारी का प्रदर्शन किया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे अभियानों से जुड़े हर पहलू की समीक्षा की जाती है, ताकि भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।
पूर्व CDS के इस बयान के बाद ऑपरेशन सिंदूर और उससे जुड़ी सूचनाओं को लेकर राजनीतिक और सुरक्षा गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी सैन्य अभियान से जुड़ी जानकारी लीक होती है तो इसकी जांच जरूरी होती है, क्योंकि इससे भविष्य के अभियानों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए सुरक्षा हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। किसी भी अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम में भारत अपने हितों और नीतियों के अनुसार फैसले लेता है।
फिलहाल पूर्व CDS अनिल चौहान के बयान के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है कि ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी किस माध्यम से और किस स्तर तक पहुंची। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक रूप से किसी लीक की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उनके बयान ने सुरक्षा और कूटनीतिक हलकों में बहस को तेज कर दिया है।





