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पहली बार गैर-मुस्लिम को मिली अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी

नई दिल्ली। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के इतिहास में एक बड़ा बदलाव हुआ है। आयोग के 26 साल के इतिहास में पहली बार किसी गैर-मुस्लिम व्यक्ति को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। भाजपा के वरिष्ठ संगठनकर्ता और जनप्रतिनिधि निर्मल जैन को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग का नया अध्यक्ष बनाया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से इसकी जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में बताया कि निर्मल जैन को आयोग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही कुलदीप सिंह और मोहम्मद हारून को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है। नई नियुक्तियों के बाद दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर नई दिशा तय होने की उम्मीद जताई जा रही है।
निर्मल जैन की नियुक्ति को इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2000 में गठन के बाद से अब तक आयोग के सभी अध्यक्ष मुस्लिम समुदाय से रहे हैं। अब पहली बार इस पद पर गैर-मुस्लिम व्यक्ति की नियुक्ति हुई है। इससे आयोग के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
निर्मल जैन लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ संगठनकर्ता हैं और करीब पांच दशक से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक के रूप में जुड़े रहे हैं। छात्र जीवन से ही उन्होंने सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया था।
उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। संगठनात्मक अनुभव और लंबे सार्वजनिक जीवन को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। नियुक्ति के बाद निर्मल जैन ने कहा कि वह सभी अल्पसंख्यक समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष रूप से काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य सभी समुदायों के लोगों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना है। उन्होंने सरकार और संगठन का आभार जताते हुए कहा कि वह मिली जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास करेंगे।
निर्मल जैन की नियुक्ति का जैन समाज ने भी स्वागत किया है। शाहदरा जैन समाज के अध्यक्ष रमेश चंद जैन ने कहा कि जैन समाज हमेशा सेवा और परोपकार की भावना से काम करता है। उन्होंने निर्मल जैन को जिम्मेदारी मिलने को समाज के लिए सम्मान की बात बताया।
दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग का गठन वर्ष 2000 में किया गया था। इसका उद्देश्य राजधानी में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों को उठाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। अब तक आयोग में सात अध्यक्ष रह चुके हैं।
आयोग के पहले अध्यक्ष जफर अली नकवी रहे, जिन्होंने वर्ष 2000 से 2003 तक जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद प्रो. अबू बकर (2003-2006), कमाल फारुकी (2007-2010), सफदर एच. खान (2011-2014), कमर अहमद (2014-2017), डॉ. जफरुल इस्लाम खान (2017-2020) और जाकिर खान (2020-2023) अध्यक्ष रहे।
अब जुलाई 2026 से निर्मल जैन ने आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली है। उनकी नियुक्ति को दिल्ली की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह नियुक्ति भाजपा सरकार के आयोगों में नए चेहरों को जिम्मेदारी देने की रणनीति का हिस्सा भी मानी जा रही है। वहीं, आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी अल्पसंख्यक समुदायों के बीच विश्वास कायम करना और उनकी समस्याओं का समाधान करना होगी।
निर्मल जैन के सामने शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े अन्य मुद्दों पर काम करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई टीम आयोग की भूमिका को किस तरह आगे बढ़ाती है।





