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SC में पांच नए जजों ने ली शपथ, कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ी 37

New Delhi नई दिल्ली : भारत के चीफ़ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के पांच नए नियुक्त जजों को पद की शपथ दिलाई। इस अवसर पर जजों ने न्यायिक कर्तव्यों का पालन करने की शपथ ली और शीर्ष न्यायालय में अपने नए दायित्वों का निर्वाह करना शुरू कर दिया।
शपथ लेने वाले नए जजों में जस्टिस शील नागू, जस्टिस श्री चंद्रशेखर, जस्टिस संजीव सचदेवा, जस्टिस अरुण पल्ली और सीनियर एडवोकेट वी मोहना शामिल हैं। वी मोहना को सीनियर एडवोकेट के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में शामिल किया गया है, जबकि चार अन्य नियुक्तियां हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस पद पर कार्यरत न्यायाधीशों की हैं।
इस शपथ ग्रहण के बाद सुप्रीम कोर्ट में कुल जजों की संख्या 37 हो गई है, जिसमें चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट में कुल मंज़ूर संख्या 38 है, जिससे अब भी एक पद खाली है।
इस नियुक्ति की प्रक्रिया से पहले, 27 मई को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाई कोर्ट चीफ़ जस्टिस और सीनियर एडवोकेट वी मोहना को सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट करने की सिफारिश की थी। कॉलेजियम ने 22 और 27 मई की बैठकों में पांच नए जजों की नियुक्ति की मंजूरी दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या में यह वृद्धि न्यायिक प्रणाली की तीव्रता और मामलों के निपटारे की गति बढ़ाने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है। वर्तमान में कोर्ट में कई संवैधानिक, व्यापारिक और अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई लंबित है। नए जजों के शामिल होने से मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
जस्टिस शील नागू, जस्टिस चंद्रशेखर, जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस अरुण पल्ली पहले विभिन्न हाई कोर्टों में अपनी न्यायिक सेवाएं दे चुके हैं और लंबे समय से न्यायिक क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। वहीं, वी मोहना एक सीनियर एडवोकेट हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामलों में पैरवी की है और उनकी नियुक्ति कोर्ट के लिए नए दृष्टिकोण और विशेषज्ञता जोड़ने के रूप में देखी जा रही है।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने शपथ ग्रहण समारोह में कहा कि नए जजों का न्यायिक अनुभव और विशेषज्ञता कोर्ट की न्यायिक क्षमता को मजबूत करेगी। उन्होंने नए जजों को याद दिलाया कि न्यायिक जिम्मेदारी केवल मामलों का निपटान नहीं है, बल्कि समाज में विश्वास बनाए रखना और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना भी है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की यह सिफारिश और केंद्र सरकार की मंजूरी न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को दर्शाती है। नए जजों के शामिल होने से कोर्ट की कामकाजी क्षमता बढ़ेगी और लंबित मामलों के निपटारे में मदद मिलेगी।
इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट में पांच नए नियुक्त जजों का शामिल होना न केवल न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया में समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।





