दिल्ली-एनसीआर

पहले कोर्ट मैरिज फिर मंदिर में फेरे परिजनों ने पहुंचकर किया बवाल

Ratna Netam
5 Sept 2026 4:05 PM IST
पहले कोर्ट मैरिज फिर मंदिर में फेरे परिजनों ने पहुंचकर किया बवाल
x
नई दिल्ली। मंदिर में शादी की रस्में चल रही थीं। दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे के साथ नई जिंदगी शुरू करने की तैयारी में थे। इसी बीच युवती के परिवार के लोग वहां पहुंच गए और देखते ही देखते खुशियों का माहौल विवाद में बदल गया। शादी का विरोध कर रहे परिजनों और वहां मौजूद लोगों के बीच कहासुनी शुरू हुई और मामला इतना बढ़ गया कि मंदिर में तोड़फोड़ होने लगी। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। इसके बाद पुलिस दूल्हा-दुल्हन को अपने साथ ले गई।
घटना के बाद मंदिर परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। शादी में शामिल होने आए लोगों के बीच भी अचानक हुए घटनाक्रम से हड़कंप मच गया। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया और मामले की जानकारी जुटानी शुरू की। शुरुआती तौर पर पूरा विवाद युवक और युवती की शादी को लेकर परिवार की नाराजगी से जुड़ा बताया जा रहा है।
मंदिर में चल रही थीं शादी की रस्में
जानकारी के मुताबिक युवक और युवती एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे। दोनों ने मंदिर में विवाह करने का फैसला किया और तय कार्यक्रम के मुताबिक वहां पहुंचे। मंदिर में शादी से जुड़ी तैयारियां की गई थीं और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार रस्में पूरी की जा रही थीं।
इस दौरान दोनों के परिचित और कुछ अन्य लोग भी वहां मौजूद थे। शुरुआत में सबकुछ सामान्य तरीके से चल रहा था। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में शादी का माहौल विवाद में बदल जाएगा।
बताया जा रहा है कि युवती के परिवार को शादी की जानकारी मिली तो परिवार के सदस्य मंदिर पहुंच गए। उनके वहां पहुंचते ही स्थिति बदल गई।
परिवार ने किया शादी का विरोध
युवती के परिजन इस शादी से कथित तौर पर सहमत नहीं थे। मंदिर पहुंचने के बाद उन्होंने विवाह का विरोध शुरू कर दिया। पहले बातचीत और बहस हुई, लेकिन कुछ ही देर में मामला गर्म हो गया।
युवक और युवती की तरफ से शादी करने की इच्छा जताई गई, जबकि परिवार के लोग उन्हें रोकने पर अड़े रहे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
मंदिर में मौजूद अन्य लोगों ने विवाद शांत कराने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने लगी और हंगामे की स्थिति बन गई।
मंदिर में हुई तोड़फोड़
विवाद बढ़ने के बाद मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई। अचानक हुई इस घटना से वहां मौजूद श्रद्धालु और शादी में शामिल लोग घबरा गए।
मंदिर जैसी जगह पर हंगामा और तोड़फोड़ होने से मामला और संवेदनशील हो गया। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई।
पुलिस को बताया गया कि शादी को लेकर दो पक्षों में विवाद हो रहा है और मंदिर परिसर में स्थिति बिगड़ गई है। इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
पुलिस के पहुंचते ही संभाले हालात
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सबसे पहले दोनों पक्षों को अलग किया। हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराया गया और मंदिर परिसर में कानून-व्यवस्था बहाल करने की कोशिश की गई।
इसके बाद पुलिस ने युवक और युवती से बातचीत की। दोनों से उनकी उम्र, पहचान और शादी से संबंधित परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली गई।
पुलिस ने विवाद बढ़ने की आशंका को देखते हुए दूल्हा-दुल्हन को अपने साथ ले जाना उचित समझा। दोनों को पुलिस स्टेशन ले जाकर उनके बयान दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
दूल्हा-दुल्हन को साथ क्यों ले गई पुलिस?
ऐसे मामलों में पुलिस के लिए सबसे पहले युवक और युवती की उम्र तथा उनकी सहमति की पुष्टि करना महत्वपूर्ण होता है। यदि दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से विवाह कर रहे हैं तो कानून के तहत उन्हें जीवनसाथी चुनने का अधिकार है।
लेकिन यदि किसी पक्ष की ओर से जबरदस्ती, अपहरण, दबाव या अन्य गंभीर आरोप लगाए जाते हैं तो पुलिस को उनकी जांच करनी पड़ती है।
इसी कारण पुलिस ने दोनों को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर अलग-अलग बातचीत की। परिवार के सदस्यों से भी घटना के बारे में जानकारी जुटाई गई।
उम्र की जांच भी महत्वपूर्ण
मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक युवती और युवक की उम्र है। अगर दोनों की उम्र कानूनी रूप से विवाह योग्य है तो मामला उनकी स्वतंत्र सहमति से जुड़ जाता है।
भारत में सामान्य कानूनी प्रावधानों के अनुसार पुरुष के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिला के लिए 18 वर्ष है।
अगर युवती नाबालिग निकलती है तो मामले की कानूनी स्थिति पूरी तरह बदल सकती है। ऐसे में पुलिस को बाल विवाह और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करनी पड़ सकती है।
इसीलिए ऐसे विवादों में आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड या दूसरे दस्तावेजों से उम्र की पुष्टि की जाती है।
बालिग होने पर अपनी पसंद से शादी का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि दो बालिग व्यक्तियों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार है। परिवार या समाज की असहमति अपने-आप में दो वयस्कों की सहमति से होने वाले विवाह को अवैध नहीं बनाती।
संविधान के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकार के दायरे में जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण माना गया है।
हालांकि हर मामले के तथ्य अलग होते हैं। इसलिए इस घटना में भी युवक और युवती की उम्र तथा बयान सामने आने के बाद ही कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
परिवार क्यों था नाराज?
परिवार की नाराजगी की वास्तविक वजह पुलिस जांच और दोनों पक्षों के बयान के बाद साफ होगी। प्रेम विवाह से जुड़े विवादों में कई कारण सामने आते हैं। कभी परिवार रिश्ते से सहमत नहीं होता तो कभी सामाजिक, पारिवारिक या व्यक्तिगत कारणों से विरोध होता है।
इस मामले में भी पुलिस परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि शादी का विरोध किस वजह से किया जा रहा था।
यह भी जांच का विषय हो सकता है कि क्या परिवार को शादी की जानकारी पहले से थी या उन्हें अचानक इसकी सूचना मिली।
तोड़फोड़ करने वालों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की घटना को लेकर पुलिस अलग से कार्रवाई कर सकती है। अगर जांच में यह साबित होता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया या हिंसा की तो उसके खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।
पुलिस सीसीटीवी फुटेज और मौके पर मौजूद लोगों के वीडियो भी देख सकती है। आजकल ऐसे आयोजनों में मोबाइल फोन से वीडियो बनाए जाते हैं, इसलिए घटना का पूरा क्रम समझने में डिजिटल फुटेज महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अगर मंदिर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं तो उनकी रिकॉर्डिंग से यह पता लगाया जा सकता है कि तोड़फोड़ किसने शुरू की और उसमें कौन-कौन शामिल था।
मंदिर प्रशासन का बयान भी अहम
पुलिस मंदिर के पुजारी और प्रबंधन से भी घटना की जानकारी ले सकती है। शादी किसकी अनुमति से हो रही थी और हंगामा किस समय शुरू हुआ, इन सवालों के जवाब मंदिर में मौजूद लोगों से मिल सकते हैं।
तोड़फोड़ से कितना नुकसान हुआ, इसका आकलन भी किया जा सकता है। अगर मंदिर प्रबंधन की ओर से लिखित शिकायत दी जाती है तो पुलिस उसके आधार पर अलग मामला दर्ज कर सकती है।
दोनों पक्षों के बयान होंगे महत्वपूर्ण
पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए पुलिस युवक और युवती के बयान को सबसे ज्यादा महत्व देगी। खासकर युवती से यह पूछा जा सकता है कि वह अपनी इच्छा से शादी कर रही थी या उस पर किसी तरह का दबाव था।
अगर युवती स्पष्ट रूप से कहती है कि वह बालिग है और अपनी इच्छा से युवक के साथ गई तथा शादी कर रही थी तो पुलिस उस बयान और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
वहीं अगर वह दबाव, धोखे या जबरदस्ती की शिकायत करती है तो मामले की दिशा अलग हो जाएगी।
परिवार और प्रेम विवाह के बीच टकराव
देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रेम विवाह को लेकर परिवारों के विरोध के मामले सामने आते रहते हैं। कई बार युवक और युवती परिवार की सहमति नहीं मिलने पर मंदिर या कोर्ट में शादी करने का फैसला करते हैं।
ऐसे मामलों में तनाव तब बढ़ जाता है जब परिवार अचानक शादी की जगह पहुंच जाता है। कई बार बातचीत से विवाद सुलझ जाता है, लेकिन कुछ मामलों में मारपीट और तोड़फोड़ तक की नौबत आ जाती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दोनों व्यक्ति बालिग हैं तो परिवारों को हिंसा का रास्ता अपनाने के बजाय कानून के दायरे में अपनी आपत्ति रखनी चाहिए।
पुलिस के सामने दोहरी चुनौती
इस घटना में पुलिस के सामने दो अलग-अलग पहलुओं की जांच की चुनौती है। पहला मामला युवक और युवती की शादी और उनकी सहमति से जुड़ा है। दूसरा मंदिर में हुए हंगामे और तोड़फोड़ से संबंधित है।
पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि युवक या युवती पर किसी तरह का दबाव न हो। इसके साथ ही मंदिर में कानून हाथ में लेने वाले लोगों की पहचान भी करनी होगी।
अगर किसी पक्ष ने मारपीट या धमकी की शिकायत की है तो उसकी भी जांच की जाएगी।
सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ तो बढ़ सकती है जांच
ऐसी घटनाओं के वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो जाते हैं। अगर इस मामले का भी वीडियो सामने आता है तो पुलिस उसे जांच में शामिल कर सकती है।
हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल किसी वीडियो का छोटा हिस्सा पूरी घटना की वास्तविक तस्वीर नहीं बताता। इसलिए पुलिस मूल फुटेज और मौके पर मौजूद लोगों के बयान के आधार पर घटनाक्रम की पुष्टि करती है।
वीडियो में तोड़फोड़ करते लोग स्पष्ट दिखाई देते हैं तो उनकी पहचान में भी मदद मिल सकती है।
दूल्हा-दुल्हन की सुरक्षा अहम
प्रेम विवाह से जुड़े विवाद में युवक और युवती की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा होती है। अगर दोनों बालिग हैं और उन्हें परिवार या किसी दूसरे व्यक्ति से खतरे की आशंका है तो वे पुलिस से सुरक्षा की मांग कर सकते हैं।
ऐसे मामलों में अदालत से भी सुरक्षा मांगी जा सकती है। कई मामलों में हाईकोर्ट ने बालिग जोड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को निर्देश दिए हैं।
इस घटना में भी अगर दूल्हा-दुल्हन खतरे की आशंका जताते हैं तो पुलिस उनकी सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठा सकती है।
जांच के बाद साफ होगी पूरी कहानी
फिलहाल मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य पुलिस जांच के बाद सामने आएंगे। युवक और युवती की उम्र क्या है, दोनों ने शादी का फैसला अपनी इच्छा से लिया था या नहीं, परिवार ने किस वजह से विरोध किया और मंदिर में तोड़फोड़ किसने की—इन सभी सवालों के जवाब जांच से मिलने बाकी हैं।
पुलिस के सामने दूल्हा-दुल्हन के बयान के साथ परिवार और मंदिर प्रबंधन का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा सीसीटीवी या मोबाइल वीडियो उपलब्ध होने पर उनकी जांच से घटनाक्रम को समझने में मदद मिलेगी।
शादी की खुशियों के बीच शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते मंदिर में हंगामे और तोड़फोड़ तक पहुंच गया। अब पुलिस की जांच तय करेगी कि किस पक्ष के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।
Next Story