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करोल बाग अग्निकांड में छात्रा का रेस्क्यू, सामने आया खौफनाक मंजर

Saba Naaz
22 July 2026 9:07 PM IST
करोल बाग अग्निकांड में छात्रा का रेस्क्यू, सामने आया खौफनाक मंजर
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नई दिल्ली: करोल बाग इलाके में बुधवार सुबह एक तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने अफरा-तफरी मचा दी। आग की चपेट में आई इमारत की तीसरी मंजिल पर बने पीजी में रह रहीं दो छात्राएं धुएं और लपटों के बीच फंस गईं। बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं मिलने पर दोनों छात्राओं ने अपनी जान बचाने के लिए खतरनाक कदम उठाया। एक छात्रा ने तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी, जबकि दूसरी ने पास की इमारत की छत पर कूदकर अपनी जान बचाई।

यह घटना मध्य दिल्ली के करोल बाग स्थित चना मार्केट इलाके की है। बुधवार सुबह करीब 10:58 बजे दमकल विभाग को इमारत में आग लगने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। आग की गंभीरता को देखते हुए दमकल की 14 गाड़ियों को राहत और बचाव कार्य में लगाया गया। करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया।

जानकारी के मुताबिक, करीब 161 वर्ग गज में बनी इस इमारत के बेसमेंट और पहली व दूसरी मंजिल पर चमड़े के जूतों का गोदाम संचालित हो रहा था। वहीं, तीसरी मंजिल पर छात्राओं के रहने के लिए पीजी बनाया गया था। बुधवार सुबह आग सबसे पहले पहली मंजिल पर बने जूतों के गोदाम में लगी, जिसके बाद धुआं तेजी से ऊपर की मंजिलों तक फैल गया।

आग लगने के समय पीजी में जयपुर की रहने वाली विप्रा आर्या और ग्वालियर की नमृता यादव मौजूद थीं। अचानक पूरे कमरे और फ्लोर पर धुआं भरने लगा, जिससे दोनों छात्राएं घबरा गईं। उन्होंने बाहर निकलने का रास्ता तलाशा, लेकिन स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी।

दोनों छात्राएं सबसे पहले छत की ओर भागीं, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि छत का दरवाजा बंद था और उस पर ताला लगा हुआ था। इसके बाद उन्होंने नीचे आने की कोशिश की, लेकिन आग और धुएं के कारण सामान्य रास्ते से निकलना संभव नहीं था। सामने की ओर कोई बालकनी नहीं थी, जबकि पीछे की बालकनी लोहे के जाल से बंद थी।

मुश्किल हालात में दोनों छात्राओं ने हिम्मत दिखाई और पीछे की ओर लगे लोहे के जाल के पास पहुंचीं। उन्होंने किसी तरह शीट हटाकर बाहर निकलने का रास्ता बनाया। इसके बाद अपनी जान बचाने के लिए विप्रा आर्या ने तीसरी मंजिल से नीचे छलांग लगा दी। गनीमत रही कि गिरते समय वह गली में लगे केबल तारों में उलझ गईं, जिससे सीधे जमीन पर गिरने से बच गईं। हालांकि, उन्हें चोटें आईं और शरीर में फ्रैक्चर हुआ। हादसे के बाद उन्हें तुरंत सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत खतरे से बाहर बताई है।

वहीं, दूसरी छात्रा नमृता यादव ने पास वाली इमारत की छत पर छलांग लगाकर अपनी जान बचाई। आसपास मौजूद लोगों ने भी तुरंत मदद की और छात्राओं को सुरक्षित बाहर निकालने में सहयोग किया।

दमकल अधिकारियों के अनुसार, इमारत काफी हद तक बंद थी, जिसके कारण धुआं तेजी से अंदर भर गया और बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण हो गया। एहतियात के तौर पर आसपास की इमारतों को भी खाली कराया गया, ताकि आग फैलने की स्थिति में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।

शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए क्राइम टीम और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम ने मौके से कई साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने इमारत के मालिक से भी पूछताछ शुरू कर दी है।

इस घटना ने एक बार फिर पीजी और व्यावसायिक इमारतों में सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी इमारतों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं में लोगों की जान जोखिम में न पड़े। वहीं, छात्राओं की हिम्मत और समय पर किए गए प्रयासों की भी सराहना की जा रही है, जिनकी वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।

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