- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- किसानों को मिलेगी बड़ी...
किसानों को मिलेगी बड़ी सौगात, 1.27 MMTPA क्षमता का प्लांट तैयार

नई दिल्ली। देश में उर्वरक उत्पादन बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। गेल (इंडिया) लिमिटेड और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF) ने महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में एक बड़े गैस आधारित यूरिया संयंत्र की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना के तहत 1.27 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) क्षमता वाला यूरिया उत्पादन संयंत्र स्थापित किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह परियोजना देश में खाद उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ आयात निर्भरता कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
इस संयुक्त परियोजना को विशेष प्रयोजन इकाई (SPV) के माध्यम से विकसित किया जाएगा। इसके लिए गेल और आरसीएफ मिलकर काम करेंगे। प्रस्तावित संयंत्र को गेल की मुंबई-नागपुर-झारसुगुड़ा प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (MNJPL) से जोड़ा जाएगा, जिससे संयंत्र को प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति मिल सकेगी। गैस आधारित तकनीक के इस्तेमाल से उत्पादन प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर होने की उम्मीद है।
इस समझौते पर गेल की ओर से कार्यकारी निदेशक (बिजनेस डेवलपमेंट और स्टार्ट-अप) संजय अग्रवाल और आरसीएफ की ओर से कार्यकारी निदेशक (प्रोजेक्ट, कॉरपोरेट और कोऑर्डिनेशन) सु ज्योति पाटिल ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर गेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक दीपक गुप्ता और आरसीएफ के सीएमडी एस. शिवकुमार समेत दोनों कंपनियों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
गेल के सीएमडी दीपक गुप्ता ने इस साझेदारी को देश की ऊर्जा सुरक्षा और उर्वरक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्राकृतिक गैस के बेहतर उपयोग के जरिए लंबे समय तक आर्थिक लाभ पैदा करेगी। साथ ही यह भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल और देश में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति के अनुरूप है।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना में गेल की प्राकृतिक गैस आपूर्ति क्षमता और आरसीएफ के उर्वरक उत्पादन अनुभव का बेहतर तालमेल देखने को मिलेगा। इससे देश में यूरिया उत्पादन को नई गति मिलेगी और किसानों के लिए खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
वहीं आरसीएफ के सीएमडी एस. शिवकुमार ने कहा कि यह संयंत्र देश में बढ़ती उर्वरक मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने बताया कि भारत में कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना जरूरी है। इस परियोजना से आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत होगी।
विदर्भ क्षेत्र के लिए भी यह परियोजना काफी अहम मानी जा रही है। इस क्षेत्र में बड़े औद्योगिक निवेश के आने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। संयंत्र के निर्माण और संचालन के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर मिलने की संभावना है।
गेल और आरसीएफ की यह साझेदारी भारत के उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। सरकार लगातार घरेलू उत्पादन बढ़ाने और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर दे रही है। ऐसे में 1.27 एमएमटीपीए क्षमता वाला यह यूरिया प्लांट देश की खाद सुरक्षा को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकता है।
महाराष्ट्र के विदर्भ में स्थापित होने वाला यह संयंत्र न केवल किसानों के लिए खाद की उपलब्धता बढ़ाएगा, बल्कि प्राकृतिक गैस आधारित उद्योगों के विस्तार को भी बढ़ावा देगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना कृषि, उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण बन सकती है। आने वाले वर्षों में इसके जरिए भारत के उर्वरक उत्पादन क्षेत्र को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।





