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Fake करेंसी मामला: एनआईए कोर्ट ने 7 आरोपियों को सुनाई सजा
SHIDDHANT
3 March 2026 10:07 PM IST

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Delhi दिल्ली। साल 2015 के फेक इंडियन करेंसी नोट (एफआईसीएन) मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए विशाखापत्तनम स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने सात आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत 7 से 10 वर्ष तक के साधारण कारावास और जुर्माने की सजा निर्धारित की है।
दोषी ठहराए गए आरोपियों की पहचान असम, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के रहने वाले सद्दाम हुसैन, रोस्तम, अमीरुल हक, मोहम्मद हकीम शेख, सद्दाम हुसैन (बेंगलुरु), सैयद इमरान और मोहम्मद अकबर अली के रूप में हुई है। एनआईए की जांच में यह सामने आया कि यह गिरोह भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते उच्च गुणवत्ता वाले नकली भारतीय नोटों की तस्करी कर देश के विभिन्न हिस्सों में उन्हें चलाने की साजिश में शामिल था। जांच एजेंसी के अनुसार, इस साजिश का उद्देश्य भारत की वित्तीय सुरक्षा को बाधित करना था।
सद्दाम हुसैन (बरपेटा, असम) को यूएपीए की धारा 16 के तहत 10 वर्ष के साधारण कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है। उसे सितंबर 2015 में विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन पर 5,01,500 रुपए के उच्च गुणवत्ता वाले नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) विशाखापत्तनम ने की थी।
इस मामले में कोर्ट ने अमीरुल हक (बरपेटा, असम) को धारा 18 के तहत 10 वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माना (जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त 1 वर्ष की सजा) सुनाई है। वहीं, रोस्तम (मालदा, पश्चिम बंगाल) को धारा 20 के तहत 7 वर्ष का साधारण कारावास और 2 हजार रुपए जुर्माना (अदायगी न होने पर 8 माह अतिरिक्त सजा) दी गई है। मोहम्मद हकीम शेख (मालदा, पश्चिम बंगाल) को धारा 18 के तहत 8 वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माना (डिफॉल्ट पर 1 वर्ष अतिरिक्त) सुनाया गया है। सद्दाम हुसैन (बेंगलुरु, कर्नाटक) को धारा 20 के तहत 7 वर्ष का साधारण कारावास और 2 हजार रुपए जुर्माना (डिफॉल्ट पर 8 माह अतिरिक्त) की सजा दी गई है। इसके अलावा, सैयद इमरान (मांड्या, कर्नाटक) और मोहम्मद अकबर अली (कामरूप, असम) को भी धारा 20 के तहत 7 वर्ष का साधारण कारावास और 2 हजार रुपए जुर्माना (डिफॉल्ट पर 8 माह अतिरिक्त) की सजा सुनाई गई है। सैयद इमरान पहले भी एनआईए के एक अन्य विशाखापत्तनम एफआईसीएन मामले में दोषी ठहराया जा चुका है।
डीआरआई द्वारा प्रारंभिक कार्रवाई के बाद दिसंबर 2015 में एनआईए ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। एजेंसी ने जुलाई 2016 में सद्दाम हुसैन के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की थी, जबकि अन्य छह आरोपियों के खिलाफ 2018 और 2019 में पूरक चार्जशीट दायर की गई। अदालत के इस फैसले को नकली मुद्रा के जरिए देश की आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की साजिशों पर एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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