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पीएम मोदी के सेल्फी वीडियो पर फेसबुक ने लगाई अस्थायी रोक, कुछ घंटों बाद किया बहाल

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक सेल्फी वीडियो को लेकर मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर कुछ समय के लिए रोक लगाए जाने का मामला सामने आया। यह वीडियो प्रधानमंत्री मोदी ने ‘जेन ज़ेड’ (Gen Z) को संबोधित करते हुए बनाया था। हालांकि, कुछ घंटों बाद फेसबुक ने इस वीडियो को फिर से बहाल कर दिया।
जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का यह वीडियो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्र विरोध-प्रदर्शनों के बीच सामने आया था। वीडियो में प्रधानमंत्री ने युवाओं और खासतौर पर जेन ज़ेड पीढ़ी को संबोधित किया था। इसी वीडियो को मेटा के स्वामित्व वाले फेसबुक प्लेटफॉर्म पर कुछ समय के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था।
Facebook has crossed every limit. It has blocked Prime Minister Narendra Modi’s post on strict action against paper leaks from being seen in India.
— Tajinder Bagga (@TajinderBagga) July 27, 2026
Who gave this foreign platform the authority to censor India’s Prime Minister and decide what Indians are allowed to read?
This is… pic.twitter.com/6uNiqYk13Q
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार तड़के करीब 1:25 बजे वीडियो पर मौजूद “See Why” यानी “कारण जानें” विकल्प में यह जानकारी दिखाई दे रही थी कि कानूनी अनुरोध के अनुपालन में भारत में इस कंटेंट को प्रतिबंधित किया गया है। हालांकि, इस रोक की अवधि ज्यादा लंबी नहीं रही और कुछ ही घंटों बाद वीडियो को दोबारा उपलब्ध करा दिया गया।
बीजेपी नेता तजिंदर बग्गा ने इस मामले की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। उन्होंने फेसबुक पर वीडियो के अस्थायी रूप से रोके जाने और बाद में बहाल किए जाने को लेकर जानकारी दी। उनके पोस्ट के बाद यह मामला चर्चा में आया।
फेसबुक की ओर से इस मामले में फिलहाल विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है कि वीडियो को किस कानूनी अनुरोध के तहत रोका गया था और इसे बहाल करने का निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आमतौर पर स्थानीय कानूनों और नियामकीय अनुरोधों के आधार पर कुछ सामग्री पर प्रतिबंध लगा सकते हैं।
सोशल मीडिया कंपनियां कई देशों में स्थानीय नियमों और कानूनी निर्देशों के अनुसार सामग्री को सीमित या हटाने की कार्रवाई करती हैं। ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म की ओर से यह जांच की जाती है कि संबंधित सामग्री किसी कानून, अदालत के आदेश या सरकारी अनुरोध के दायरे में आती है या नहीं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह वीडियो युवाओं से संवाद के रूप में देखा जा रहा था। जेन ज़ेड यानी नई पीढ़ी के मतदाताओं और युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए राजनीतिक दल और नेता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में किसी प्रमुख राजनीतिक संदेश वाले वीडियो पर अस्थायी रोक लगना चर्चा का विषय बन गया।
हाल के वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक सामग्री को लेकर विवाद बढ़े हैं। अलग-अलग देशों में सरकारें और सोशल मीडिया कंपनियां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, स्थानीय कानूनों और ऑनलाइन सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती रही हैं।
फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर सामग्री नियंत्रण के लिए अलग-अलग नीतियां लागू हैं। इनमें आपत्तिजनक सामग्री, गलत सूचना, हिंसा को बढ़ावा देने वाली पोस्ट और कानूनी रूप से प्रतिबंधित सामग्री से जुड़े नियम शामिल होते हैं। हालांकि, राजनीतिक और सार्वजनिक महत्व वाले कंटेंट पर लिए गए फैसले अक्सर बहस का विषय बन जाते हैं।
इस मामले में वीडियो को कुछ समय के लिए रोके जाने और फिर बहाल किए जाने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रतिबंध किस कारण से लगाया गया था। फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
प्रधानमंत्री मोदी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से संवाद करते रहे हैं। वीडियो संदेशों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल सरकार और राजनीतिक अभियानों में लगातार बढ़ा है। ऐसे में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आने वाली किसी भी कार्रवाई का राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर असर देखने को मिलता है।
बीजेपी नेता तजिंदर बग्गा द्वारा मामला उठाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ा मामला बताया, जबकि कुछ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की नीतियों पर सवाल उठाए।
फिलहाल फेसबुक पर प्रधानमंत्री मोदी का उक्त वीडियो दोबारा उपलब्ध है। वीडियो को लेकर हुई अस्थायी कार्रवाई और उसके बाद बहाली की प्रक्रिया पर मेटा की ओर से आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक और सार्वजनिक संदेशों की पहुंच के साथ-साथ कंटेंट मॉडरेशन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले समय में सोशल मीडिया कंपनियों और सरकारों के बीच नियमों और पारदर्शिता को लेकर चर्चा जारी रहने की संभावना है।





