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विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोपीय संघ की उपाध्यक्ष काजा कल्लास से नई दिल्ली में की बैठक

SHIDDHANT
25 Jan 2026 9:11 PM IST
विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोपीय संघ की उपाध्यक्ष काजा कल्लास से नई दिल्ली में की बैठक
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Delhi दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में यूरोपीय संघ की उपाध्यक्ष काजा कल्लास के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और व्यापार, निवेश, रक्षा, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए आयोजित की गई। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के महत्व पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, जयशंकर और कल्लास ने व्यापार एवं निवेश के बढ़ते अवसरों पर चर्चा की, जिसमें दोनों पक्षों के बीच एफटीए (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श शामिल था।

जयशंकर ने यूरोपीय संघ को भारत का एक विश्वसनीय और स्थिर साझेदार बताते हुए कहा कि भारत ईयू के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और सतत विकास के दृष्टिकोण से देखता है। काजा कल्लास ने भी भारत के आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और जलवायु लक्ष्यों की सराहना की। बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, सुरक्षा साझेदारी, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे। दोनों पक्षों ने वैश्विक शांति और स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए साझा प्रयासों की आवश्यकता पर भी सहमति जताई।

इसके अलावा, बैठक में सस्टेनेबल डेवलपमेंट, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संक्रमण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार किया गया। जयशंकर ने भारत की शुद्ध ऊर्जा परियोजनाओं और हरित तकनीक में निवेश की योजनाओं की जानकारी साझा की, जबकि काजा कल्लास ने ईयू की तकनीकी सहायता और साझेदारी की संभावनाओं का समर्थन किया। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि यह बैठक भारत और यूरोपीय संघ के बीच चल रहे बहुस्तरीय सहयोग को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों पक्षों ने साझा मूल्यों, लोकतंत्र, मानवाधिकार और वैश्विक आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तैयार करने पर सहमति व्यक्त की। बैठक के अंत में जयशंकर और काजा कल्लास ने द्विपक्षीय सहयोग के अगले चरणों की रूपरेखा तैयार करने पर भी चर्चा की। बैठक को दोनों पक्षों ने सकारात्मक और उत्साहजनक बताया और इसे भारत-ईयू संबंधों के लिए नई दिशा देने वाला कदम माना गया।
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