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दिल्ली-एनसीआर
चेन्नई में जुटेंगे 32 देशों के विशेषज्ञ, समुद्री तेल रिसाव आपदा से निपटने का होगा अभ्यास
SHIDDHANT
4 Oct 2025 10:22 PM IST

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Delhi दिल्ली: भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) समुद्री तेल रिसाव आपदाओं से निपटने की अपनी तैयारियों को मजबूती देने के लिए 5 से 6 अक्टूबर को तमिलनाडु के चेन्नई के तट पर एक बड़ा अभ्यास आयोजित करने जा रहा है। आयोजन में 32 देशों के 40 से अधिक विदेशी पर्यवेक्षक और 100 से अधिक राष्ट्रीय प्रतिनिधि भाग लेंगे। यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर प्रदूषण प्रतिक्रिया अभ्यास (एनएटीपीओएलआरईएक्स-एक्स) का 10वां संस्करण होगा, जो 27वीं राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिक योजना (एनओएसडीसीपी) एवं तैयारी बैठक के साथ मिलकर आयोजित किया जाएगा।
भारतीय तटरक्षक बल का यह द्विवार्षिक अभ्यास समुद्री तेल रिसाव की घटनाओं से निपटने के लिए भारत की राष्ट्रीय तैयारियों का मूल्यांकन और संवर्धन करने के साथ-साथ एनओएसडीसीपी के तहत उल्लिखित अंतर-एजेंसी समन्वय की दक्षता का परीक्षण करेगा। इस अभ्यास की देखरेख भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक और एनओएसडीसीपी के अध्यक्ष परमेश शिवमणि, एवीएसएम, पीटीएम, टीएम करेंगे। वह भाग लेने वाली एजेंसियों के बीच तैयारियों और तालमेल के स्तर का आकलन करेंगे।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में केंद्रीय मंत्रालयों, तटीय राज्य सरकारों, प्रमुख बंदरगाहों, तेल प्रबंधन एजेंसियों और समुद्री संगठनों सहित विभिन्न राष्ट्रीय हितधारकों की सक्रिय भागीदारी की उम्मीद है। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देते हुए, इस आयोजन में 32 देशों के 40 से अधिक विदेशी पर्यवेक्षक और 100 से अधिक राष्ट्रीय प्रतिनिधि भाग लेंगे, जिससे यह समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया के लिए एक वैश्विक रूप से प्रासंगिक मंच बन जाएगा।
भारत की परिचालन तैयारियों को प्रदर्शित करने के लिए, आईसीजी समुद्री प्रदूषण नियंत्रण के लिए तैयार किए गए जहाजों और विमानों सहित प्रदूषण प्रतिक्रिया परिसंपत्तियों की एक व्यापक श्रृंखला तैनात करेगा। यह अभ्यास आईसीजी की बहु-स्तरीय प्रतिक्रिया रणनीति को प्रदर्शित करेगा और राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय दोनों भागीदारों को शामिल करते हुए समन्वित समुद्री अभियानों के महत्व को सुदृढ़ करेगा।
एनएटीपीओएलआरईएक्स-एक्स 2025 समुद्री पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगा। यह अंतर-एजेंसी सहयोग को और मजबूत करेगा, सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने को बढ़ावा देगा और समुद्री पर्यावरण प्रबंधन, परिचालन तत्परता तथा तकनीकी एकीकरण में नए मानक स्थापित करेगा। यह अभ्यास सतत विकास और पारिस्थितिक उत्तरदायित्व के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।
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